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Tuesday 27 Jun 2017

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बीसवीं सदी सभ्यता के इतिहास का ऐसा कालखंड है जिसकी तुलना किसी और समय से नहीं की जा सकती। उन सौ सालों में विश्व में जो युगांतरकारी परिवर्तन हुए, जो उलटफेर हुए, जिस तेजी के साथ बदलाव आए, वैसे पहले कभी नहीं देखे गए। आज इक्कीसवीं सदी में जब यातायात, संचार और सूचना के क्षेत्र में नए-नए आविष्कारों की बदौलत विश्वग्राम की अवधारणा पर बार-बार चर्चाएं हो रही हैं तब यह ध्यान देना दिलचस्प होगा कि बीसवीं सदी में प्रौद्योगिकी के ये उपकरण हासिल न होने के बावजूद जापान से लेकर अमेरिका तक विश्व के तमाम समाजों में एकता, समता और बंधुत्व के सूत्र तलाशे जा रहे थे, परिभाषित किए जा रहे थे और

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