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Saturday 18 Nov 2017

अक्षर पर्व March   2016 (अकं 198)  की रचनायें

  • दूसरे दिन जब चन्दर डॉ. शुक्ला के यहां निबंध की प्रतिलिपि लेकर पहुंचा तो आठ बज चुके थे। सात बजे तो चंदर की नींद ही खुली थी और जल्दी से वह नहा-धोकर साइकिल दौड़ता हुआ भागा था कि कहीं भाषण की प्रतिलिपि पहुंचने में देर न हो जाये।....  ( प्रस्तावना  )
  • By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • संबोधन ( संबोधन  )
  • By : डॉ. राजेश्वर सक्सेना     View in Text Format    |     PDF Format
  • हमारा समय और गांधी-नेहरू होने का अर्थ ( विचार-लेख  )
  • By : डॉ. राजेश्वर सक्सेना     View in Text Format    |     PDF Format
  • जीवन का अर्थ : अर्थमय जीवन ( संबोधन  )
  • By : अनुपम मिश्र     View in Text Format    |     PDF Format
  • सवाल हैं सामने ( कविता  )
  • By : मलय     View in Text Format    |     PDF Format
  • इस चमकदार समय में : दो कविताएं 1- विश्व ग्राम  ( कविता  )
  • By : लक्ष्मेन्द्र चोपड़ा     View in Text Format    |     PDF Format
  • मेरी भाषा ( कविता  )
  • By : कुलजीत सिंह     View in Text Format    |     PDF Format
  • अच्छे दिन  ( कविता  )
  • By : गोविन्द माथुर     View in Text Format    |     PDF Format
  • तटस्थ ( कविता  )
  • By : अजय चन्द्रवंशी     View in Text Format    |     PDF Format
  • दु:ख का कुआं ( कविता  )
  • By : देव नाथ द्विवेदी     View in Text Format    |     PDF Format