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Monday 20 Nov 2017

अक्षर पर्व November   2015 (अकं 194)  की रचनायें

  • मास्टर जी कित्ती बजी है?... ( कहानी  )
  • By : यादवेन्द्र शर्मा \'चन्द्र\'     View in Text Format    |     PDF Format
  • कहानी और इंसान ( उपसंहार  )
  • By : सर्वमित्रा सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • एक लंबे अर्से के बाद अक्षरपर्व पढऩे मिला। ये पहले भी ओजपूर्ण था और आज भी प्रभावशाली लगा। सितंबर अंक पढ़ा, रचनाएं सभी अच्छी लगीं। ( पत्र  )
  • By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • जुलाई का अक्षरपर्व डाक विभाग की अव्यवस्था से मुझ तक नहींपहुंचा, न पढ़ पाने की महरूमिय-मायूसी बन दिल-दिमाग पर छाई रही। ( पत्र  )
  • By : गफूर तायर     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षरपर्व का सितम्बर अंक पढ़ा, आत्मिक आभार। पत्रिका अपने आरंभिक काल से आज तक अपनी सारस्वत पहचान को बनाए रखने में कामयाब है।  ( पत्र  )
  • By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षरपर्व निरंतर स्तरीय रचनाओं के साथ निकल रहा है, यह देखकर प्रसन्नता होती है। सितम्बर अंक में ललितजी ने प्रस्तावना के बहाने कवि भगवत रावत को याद किया, यह देखकर अच्छा लगा। ( पत्र  )
  • By : रामनिहाल गुंजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व का अक्टूबर अंक मिला। पत्रिका की निरंतर प्रगति तथा बदला कलेवर देखकर आश्वस्ति हुई। ( पत्र  )
  • By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • सितम्बर अंक में कहानी के प्रकाशनार्थ साधुवाद। सुंदर अंक है। कविता, कहानी, संपादकीय टोटली धॉंसू अंक।  ( पत्र  )
  • By : पूनम मिश्रा     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व पत्रिका लगातार उन्नति करते हुए अनवार्य हो रही है पाठकों व लेखकों दोनों के लिए। और. ललित जी के प्रस्तावना की तो बात ही अलग है। ( पत्र  )
  • By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व का सितम्बर अंक देखकर बहुत प्रसन्नता हुई। इसके कई कारण हैं पर सर्वोपरि कारण है जल रंगों से सुसज्जित आवरण ! इ ( पत्र  )
  • By : नवनीत कुमार झा     View in Text Format    |     PDF Format