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Tuesday 21 Nov 2017

अक्षर पर्व September   2015 (अकं 192)  की रचनायें

  • बदलते सामाजिक परिवेश का आकलन  ( समीक्षा  )
  • By : उर्मिला शुक्ल     View in Text Format    |     PDF Format
  • आंख का नाम रोटी ( पुन:पाठ  )
  • By : हरि भटनागर     View in Text Format    |     PDF Format
  • आँख का नाम रोटी : सभ्यता की पराजय का त्रास ( पुन:पाठ  )
  • By : पल्लव     View in Text Format    |     PDF Format
  • यौन शोषण का शिकार बच्चे ( उपसंहार  )
  • By : सर्वमित्रा सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • श्याम कश्यप से पहली बार 1973 में जनयुग के कार्यालय में मुलाकात हुई। वह जो थे उसे छिपाते थे और जो नहींथे,उसे दिखाते थे।  ( पत्र  )
  • By : केवल गोस्वामी     View in Text Format    |     PDF Format
  • बहुत दिनों के बाद एक पूरा विशेषांक आदि से अंत तक पढ़ा। इसलिए कि \'\'भीष्म विशेषांक बहुत अच्छा निकला है। उसका प्रत्येक लेख सटीक, सार्थक और तथ्यपरक है। भीष्म जी सही मायने में बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, ( पत्र  )
  • By : डॉ. गंगाप्रसाद बरसैया     View in Text Format    |     PDF Format
  • \'अक्षर पर्व; जुलाई-2015 पढ़ा। इस अंक में पाठक मंच की सार्थक गतिविधियों से अवगत होना सुखद लगा।  ( पत्र  )
  • By : मंजुला उपाध्याय \'मंजुल\'     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व का जुलाई अंक सामने है। ललित जी की प्रस्तावना पहली बार पढ़ी तो सटाक से निकल गई। विचार करने हेतु द्वितीय-तृतीय पाठ किया। कौंध सी उठी कि आप की बात कदाचित् समाप्त नहीं, यहीं से शुरू होती है। ( पत्र  )
  • By : डा.श्यामबाबू शर्मा     View in Text Format    |     PDF Format
  • पिछले दिनों भाई पलाश के सौजन्य से अक्षर पर्व के बहुमूल्य अंक पढऩे को मिले। ( पत्र  )
  • By : राकेश अचल     View in Text Format    |     PDF Format