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Thursday 23 Nov 2017

अक्षर पर्व September   2015 (अकं 192)  की रचनायें

  • भगवत रावत कविता नहीं लिखते। वे बातचीत करते हैं। वे सुनने या पढऩे वाले को आतंकित नहीं करते, बल्कि साथ लेकर चलते हैं। भगवत जैसे सहज सरल व्यक्तित्व के धनी थे, वैसे ही वे अपनी कविताओं से सामने आते हैं। उन्हें हमारे बीच से गए लगभग दो साल होने आए, लेकिन उनकी कविताएं एक सच्चे और बहुत प्यारे दोस्त की तरह हमारे साथ चल रही हैं।  ( प्रस्तावना  )
  • By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • बीसवीं सदी का नारी विमर्श और प्रेमचंद  ( विचार-लेख  )
  • By : उषा वैरागकर आठले     View in Text Format    |     PDF Format
  • छिन्नमूल ( उपन्यास  )
  • By : पुष्पिता अवस्थी     View in Text Format    |     PDF Format
  • कस्तूरी ( कहानी  )
  • By : पूनम मिश्रा     View in Text Format    |     PDF Format
  • आप तो ऐसे ना थे ( कहानी  )
  • By : ऋषि गजपाल     View in Text Format    |     PDF Format
  • रिश्ता ( कहानी  )
  • By : सुरेश शॉ     View in Text Format    |     PDF Format
  • ताऊ जी से बात करवा दो ( कविता  )
  • By : जवाहर गोयल     View in Text Format    |     PDF Format
  • जलन और ताप ( कविता  )
  • By : हीरालाल मिश्र     View in Text Format    |     PDF Format
  • जीवन के कुछ कड़वे सच ( कविता  )
  • By : कुलभूषण कालड़ा     View in Text Format    |     PDF Format
  • कब तक चुप रहूं ( कविता  )
  • By : रजनीकान्त पाण्डेय \'व्याकुल\'     View in Text Format    |     PDF Format