Monthly Magzine
Tuesday 21 Nov 2017

अक्षर पर्व July   2015 (अकं 190)  की रचनायें

  • सारे अतिथि आ चुके हैं। जलपान के साथ स्वागत हो गया है। अब सभास्थल की ओर चलना है। लाउडस्पीकर से लगातार घोषणा हो रही है कि कार्यक्रम प्रारंभ होने ही वाला है। स्वागत गृह से सभास्थल दूर नहीं है, बस यही कोई दो-ढाई सौ मीटर या एक फर्लांग। ( प्रस्तावना  )
  • By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • मानवाधिकार और प्रेमचंद ( विचार-लेख  )
  • By : राजेन्द्र उपाध्याय     View in Text Format    |     PDF Format
  • मातला नदी पार करते हुए ( कविता  )
  • By : नित्यानंद गायेन     View in Text Format    |     PDF Format
  • दु:स्वप्न ( पेशावर में बच्चों पर किए गये हमले पर) ( कविता  )
  • By : समासिनी श्रीवास्तव     View in Text Format    |     PDF Format
  • गांधी की लाठी ( कविता  )
  • By : डॉ.राधामणि     View in Text Format    |     PDF Format
  • इन्द्रधनुषी तितलियों के पंख मेरे पास हैं ( कविता  )
  • By : रामानुज मिश्र     View in Text Format    |     PDF Format
  • गज़़ल ( गजल  )
  • By : धर्मेन्द्र निर्मल     View in Text Format    |     PDF Format
  • जो सौ-सौ ग़म उठाना चाहता है ( गज़़ल) ( गजल  )
  • By : दरवेश भारती     View in Text Format    |     PDF Format
  • ये अगर कारवाँ नहीं होते । हम जहाँ हैं वहाँ नहीं होते । ( गजल  )
  • By : देववंश दुबे     View in Text Format    |     PDF Format
  • जिद ( कहानी  )
  • By : वीरा चतुर्वेदी     View in Text Format    |     PDF Format