Monthly Magzine
Monday 20 Nov 2017

अक्षर पर्व May   2015 (अकं 188)  की रचनायें

  • अक्षरपर्व के विगत कुछ अंकों को पढऩे से ऐसा लगता है कि अक्षरपर्व के रूप में सारिका ही पुनर्जीवित हो उठी है। ( पत्र  )
  • By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • जनवरी 15 के अंक में दोनों शोध आलेख बहुत अच्छे लगे। इस अंक की सर्वाधिक यर्थाथवादी कहानी थोपना आज की सच्चाई को बयान करती है। ( पत्र  )
  • By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • मार्च का अंक मिला। पत्रिका में निरंतर प्रगति हो रही है। जर्मन कहानी खुश चेहरा आज भी असंगत नहीं है। हमारे देश में भी यह हो सकता है। ( पत्र  )
  • By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षरपर्व दिसम्बर अंक में प्रकाशित चेखव की कहानी नींद पढ़ी। अब तक वार्का ज़ेहन में छाई है।  ( पत्र  )
  • By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • फरवरी अंक में चंद्रकिशोर जायसवाल का साक्षात्कार पर्याप्त विस्तृत है, तथापि पढ़े बिना नहींछोड़ा गया। ( पत्र  )
  • By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • फरवरी 2015 की प्रस्तावना में सुरेन्द्र तिवारी की अद्भुत पुस्तक ‘विश्व के बीहड़ वन प्रान्तरों के लोमहर्षक प्रसंग’ की आपने तलस्पर्शी समीक्षा लिखी है।  ( पत्र  )
  • By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • एक संपादक के रूप में समाचार से लेकर साहित्य, सिनेमा, समाज चिंतन से आपका मजबूत और रचनात्मक रिश्ता समझा जा सकता है ( पत्र  )
  • By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • जनवरी-15 का ‘अक्षर पर्व’। नंद चतुर्वेदी का बुद्धिजीवियों संबंधी लेख इस अंक की उल्लेखनीय उपलब्धि है। ( पत्र  )
  • By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format