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Sunday 19 Nov 2017

अक्षर पर्व May   2015 (अकं 188)  की रचनायें

  • उज्जैन, अवंतिका या उज्जयिनी। महाकाल, कालिदास, भर्तृहरि और चार कुंभों में से एक सिंहस्थ कुंभ की नगरी। जनमान्यता है कि यह विक्रमादित्य की राजधानी भी थी। इसलिए वेताल की नगरी भी! जाहिर है कि देश के प्राचीनतम नगरों में से एक उज्जैन में आकर्षण बहुत है। महाकालेश्वर की गणना बारह ज्योतिर्लिंगों में की जाती है। ( प्रस्तावना  )
  • By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • अंधविश्वास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ( विचार-लेख  )
  • By : रामकिशोर मेहता     View in Text Format    |     PDF Format
  • दो टूक कलेजे के करता... ( विचार-लेख  )
  • By : अलीक     View in Text Format    |     PDF Format
  • चाय ठंडी हो रही है ( कहानी  )
  • By : रमेश चन्द मीणा     View in Text Format    |     PDF Format
  • तुम्हें क्या कहना है? ( कहानी  )
  • By : योगेन्द्र सिंह राठौर     View in Text Format    |     PDF Format
  • पहेली है ये मन बेईमान ( कहानी  )
  • By : संतोष झांझी     View in Text Format    |     PDF Format
  • राष्ट्रीय विकास ( कहानी  )
  • By : रामनिहोर विमल     View in Text Format    |     PDF Format
  • हलजोता ( कहानी  )
  • By : इश्तियाक़ सईद     View in Text Format    |     PDF Format
  • हर प्रकार अनुगूंज है उसकी ( कविता  )
  • By : नंद किशोर आचार्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • मुखिया  ( कविता  )
  • By : सूर्यप्रकाश मिश्र     View in Text Format    |     PDF Format