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Tuesday 16 Jan 2018

अक्षर पर्व April   2015 (अकं 187)  की रचनायें

  • रावण और उसकी लंका का भव्य रूप  ( शोधपत्र  )
  • By : डॉ. शोभा निगम     View in Text Format    |     PDF Format
  • बेजुबानों को जुबां करतार दे ( गजल  )
  • By : परशुराम शुक्ल     View in Text Format    |     PDF Format
  • गज़़ल ( गजल  )
  • By : कुमार विनोद     View in Text Format    |     PDF Format
  • अँधेरे में उजाले के गीत ( समीक्षा  )
  • By : हरेराम समीप     View in Text Format    |     PDF Format
  • यात्राओं के भीतर यात्राएँ ( समीक्षा  )
  • By : राहुल राजेश     View in Text Format    |     PDF Format
  • बिखरे हुए उजास को तलाशती कविता ( समीक्षा  )
  • By : संदीप राशिनकर     View in Text Format    |     PDF Format
  • सजग और सतर्क आलोचक कृष्णदत्त पालीवाल ( स्मृति शेष   )
  • By : डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी     View in Text Format    |     PDF Format
  • व्यक्ति मरते हैं, विचार नहीं ( उपसंहार  )
  • By : सर्वमित्रा सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व के जनवरी अंक की प्रस्तावना में वरिष्ठ कवि मलय के नए संकलन पर ललितजी की आत्मीय टिप्पणी मलय और उनकी कविता के निहितार्थ को समझने में मदद करती है।  ( पत्र  )
  • By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • बहुप्रतीक्षित जनवरी 2015 का अंक मिला। लगा, किसी मित्र से बहुत दिनों बाद भेंट हुई हो। ( पत्र  )
  • By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format