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Friday 17 Nov 2017

अक्षर पर्व March   2015 (अकं 186)  की रचनायें

  • प्रस्तावना :भारत में वरिष्ठ नागरिकों या यूं कहें वृद्धजनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक समय था जब साठ वर्ष आयु के व्यक्ति को वृद्ध ही माना जाता था। इधर यह स्थिति बदल गई है, यद्यपि सेवानिवृत्ति की आयु औसतन साठ वर्ष की ही है। रेल किराया, आयकर, बीमा आदि में भी साठ वर्ष को एक तरह से वृद्ध हो जाने का कानूनी दर्जा दिया जाता है। फिर आज के सामाजिक वातावरण में इस आयु समूह के लोग वरिष्ठ नागरिक ही कहलाया जाना पसंद करते हैं। वे वृद्धता का बोझ अपने ऊपर नहीं लादना चाहते और यह बड़ी हद तक उचित भी है। ( प्रस्तावना  )
  • By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • कविता का लोकतंत्र ( विचार-लेख  )
  • By : राहुल देव     View in Text Format    |     PDF Format
  • नागार्जुन का कविकर्म  ( विचार-लेख  )
  • By : अजितकुमार     View in Text Format    |     PDF Format
  • संशय में हैं संजय जी ( कहानी  )
  • By : सुषमा मुनीन्द्र     View in Text Format    |     PDF Format
  • तिनके ( कहानी  )
  • By : ऋषि गजपाल     View in Text Format    |     PDF Format
  • मनुष्य : एक किताब ( लघु कथा  )
  • By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • मैं क्यों नहीं ( कहानी  )
  • By : डॉ. नरेश     View in Text Format    |     PDF Format
  • आपदा ( कहानी  )
  • By : ओमीश परुथी     View in Text Format    |     PDF Format
  • इच्छा-मृत्यु ( कहानी  )
  • By : कुंवर किशोर टंडन     View in Text Format    |     PDF Format
  • खुश चेहरा ( कहानी  )
  • By : तरसेम गुजराल     View in Text Format    |     PDF Format