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Wednesday 19 Dec 2018

प्रस्तावना

  • हमें अक्सर यह सुनने मिलता है कि हिन्दी में कविता, कहानी, उपन्यास के अलावा और कुछ लिखा ही नहीं जाता। इस शिकायत में दम तो है, लेकिन बात पूरी तरह सच नहीं है।
  • May  2016   ( अंक200 )
    By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व की इस रचनावार्षिकी में धर्म को केन्द्र में रखकर कट्टरता, आतंकवाद, असहिष्णुता, वैचारिक स्वतंत्रता और बुद्धिजीवियों की भूमिका इत्यादि बिन्दुओं पर चर्चा करने का उपक्रम किया गया है
  • June  2016   ( अंक201 )
    By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • मार्च अंक के उपसंहार में मकबूल शाइर निदा फाज़़ली की शाइरी पर सर्वमित्रा जी के तथ्यपरक, तर्कपूर्ण उद्धरण, शाइर की मकबूलियत को दो बाला करते हैं।
  • June  2016   ( अंक201 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • खुद पर निगरानी का वक्त चंद्रकांत देवताले का नया कविता संग्रह है जो अब एक साल पुराना हो चुका है।
  • July  2016   ( अंक202 )
    By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • इस समय मेरे सामने चार पुस्तकें हैं। एक कहानी संग्रह, दो कविता संग्रह और एक अनूदित कविताओं का संकलन।
  • August  2016   ( अंक203 )
    By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • मंच पर नामवर जी का साथ एक बाजू से केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह दे रहे थे, दूसरी ओर से केन्द्रीय संस्कृति राज्यमंत्री डॉ. महेश शर्मा। क्या इनके बीच नामवर किसी तरह की असुविधा महसूस कर रहे थे या स्थितप्रज्ञ हो गए थे? कौन जाने? राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कटाक्ष किया कि अब उनको कोई असहिष्णु नहीं कहेगा।
  • September  2016   ( अंक204 )
    By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • आज हिन्दी दिवस है और इस अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेकर मैं कुछ देर पहले ही लौटा हूं।
  • October  2016   ( अंक205 )
    By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व का यह उत्सव अंक यात्रा वृत्तांत पर केन्द्रित है, इसका मुझे निज संतोष है।
  • October  2016   ( अंक205 )
    By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व का यह उत्सव अंक यात्रा वृत्तांत पर केन्द्रित है, इसका मुझे निज संतोष है।
  • November  2016   ( अंक206 )
    By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • मुझे यह कहने के लिए माफ कीजिए कि युद्ध के बारे में भारतवासियों का ज्ञान व अनुभव बहुत अल्प, सीमित और अधूरा है।
  • December  2016   ( अंक207 )
    By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format