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Friday 24 Nov 2017

पत्र

  • अक्षर पर्व के अगस्त 2015 अंक में भीष्मजी पर श्याम कश्यप जी का संस्मरण सचमुच प्रगतिशील लेखक संघ के स्वर्णयुग का स्मरण है।
  • March  2016   ( अंक193 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • \'अक्षर पर्व\' में कई बात हैं, जो किसी अन्य पत्रिका में नहीं हंै। सम्पादकीय नहीं है पर सम्पादकीय से ऊँची बात है प्रस्तावना।
  • October  2015   ( अंक193 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • \'अक्षर पर्व\' में कई बात हैं, जो किसी अन्य पत्रिका में नहीं हंै। सम्पादकीय नहीं है पर सम्पादकीय से ऊँची बात है प्रस्तावना।
  • March  2016   ( अंक193 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • जुलाई-15 का अक्षर पर्व मिला। सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया \'नागार्जुन का कविता कर्म चर्चा में योगदानÓ ने। अजित कुमार ने नागार्जुन की कविता का मूलपाठ देकर अच्छा किया
  • October  2015   ( अंक193 )
    By : चन्द्रसेन विराट     View in Text Format    |     PDF Format
  • जुलाई-15 का अक्षर पर्व मिला। सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया \'नागार्जुन का कविता कर्म चर्चा में योगदानÓ ने। अजित कुमार ने नागार्जुन की कविता का मूलपाठ देकर अच्छा किया
  • March  2016   ( अंक193 )
    By : चन्द्रसेन विराट     View in Text Format    |     PDF Format
  • भीष्म साहनी अंक सराहनीय अंक है। इसे संभालकर रखूंगा। बहुत उपयोगी सामग्री है।
  • October  2015   ( अंक193 )
    By : विनोद शाही     View in Text Format    |     PDF Format
  • भीष्म साहनी अंक सराहनीय अंक है। इसे संभालकर रखूंगा। बहुत उपयोगी सामग्री है।
  • March  2016   ( अंक193 )
    By : विनोद शाही     View in Text Format    |     PDF Format
  • अगस्त अंक के कलात्मक आवरण पृष्ठ पर गायों का हर्षित समुदाय नीर भरे मेघों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता सा लग रहा है।
  • October  2015   ( अंक193 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • अगस्त अंक के कलात्मक आवरण पृष्ठ पर गायों का हर्षित समुदाय नीर भरे मेघों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता सा लग रहा है।
  • March  2016   ( अंक193 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व अगस्त-2015 अंक देखकर महान शास्त्रीय गायक भीमसेन जोशी के गाए हुए गीत की पंक्ति- \'\'मिले सुर मेरा तुम्हारा फिर सुर बने हमाराÓÓ याद आ गई, जो राष्ट्रीय एकता हेतु भारत सरकार द्वारा बनाए एक विज्ञापन में थी।
  • October  2015   ( अंक193 )
    By : कुशेश्वर     View in Text Format    |     PDF Format