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Saturday 18 Nov 2017

पत्र

  • अक्षर पर्व का नव वर्ष अंक प्राप्त हुआ, आभार।
  • February  2015   ( अंक185 )
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  • उत्सव अंक मिला। भारत कई-कई बोली बानी और विभिन्न लोक संस्कृतियों का घर रहा है।
  • February  2015   ( अंक185 )
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  • अक्षर पर्वÓ दिसम्बर-2014 पढ़ा। बद्रीनारायण की पुस्तक \'कांशीराम : लीडर ऑफ द दलित्सÓ पर ललित सुरजन की गंभीर और पारदर्शी टिप्पणी, उक्त किताब को पढऩे के लिए प्रेरित करती है।
  • February  2015   ( अंक185 )
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  • उत्सव अंक के रूप में अक्षर पर्व का विशेषांक पाकर कृतार्थ हुआ।
  • February  2015   ( अंक185 )
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  • अक्टूबर का अक्षर पर्व बेहद आकर्षक है। रचना व छपाई दोनों दृष्टिकोण से। लेख, संस्मरण,ग़ज़लों पर बेबाक विवेचन सब मन को मोह लेते हैं।
  • February  2015   ( अंक185 )
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  • पत्रिका नियमित प्राप्त हो रही है। अक्टूबर अंक में प्रो.बिपन चंद्रा को याद करते हुए आपने जो लिखा ,वह ज़रूरी था।
  • February  2015   ( अंक185 )
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  • लोक संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को संस्पर्शित करता हुआ उत्सव अंक नसीब हुआ। प्रस्तावना में तकरीबन वे सारे मुद्दे उठाए गए हैं,
  • February  2015   ( अंक185 )
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  • अक्षर पर्व का दिसम्बर अंक प्राप्त हुआ। यह अंक बेहतर लगा। प्रस्तावना के साथ-साथ इस अंक में प्रकाशित अन्य रचनाएं और लेख जो खासतौर पर पठनीय हैं
  • February  2015   ( अंक185 )
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  • अक्षरपर्व दिसम्बर अंक की प्रस्तावना में आपने श्री बद्रीनारायण रचित पुस्तक के हवाले से लीडर आफ दलित्स : कांशीराम जी के सामाजिक व राजनीतिक व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को बखूबी उजागर किया है।
  • March  2015   ( अंक186 )
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  • \'अक्षर पर्वÓ के उत्सव अंक के अवलोकन का अवसर देने के लिए धन्यवाद । वर्ष में एक अंक सांस्कृतिक विरासत में प्राप्त उत्सवों को समर्पित करने की योजना वास्तव में सराहनीय है। उत्सव हमारे जीवन में प्राणवायु का संचार करते हैं।
  • March  2015   ( अंक186 )
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