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Tuesday 21 Nov 2017

पत्र

  • मई 2016 के अंक की उपलब्धि है डॉ. शोभा निगम का आलेख।
  • October  2016   ( अंक205 )
    By : वेदप्रकाश अमिताभ     View in Text Format    |     PDF Format
  • आपने अक्षर पर्व को जो संस्कार दिए, जो सौंदर्य दिया, जो व्यवस्था दी उसके लिए आपकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है।
  • October  2016   ( अंक205 )
    By : अरविंद अवस्थी     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व जुलाई 16 की प्रस्तावना में आपने चंद्रकांत देवताले की कविता के कथ्य और शिल्प को लेकर तथ्यपूर्ण विश्लेषण किया है।
  • November  2016   ( अंक206 )
    By : शिव कुमार अर्चन     View in Text Format    |     PDF Format
  • जुलाई अक्षर पर्व में डॉ. सुनील केशव देवधर का आलेख, रेडियो की भाषा, बच्चों के मूल संस्कारों से जुड़ी बहुत महत्वपूर्ण रचना है
  • November  2016   ( अंक206 )
    By : पूरनचंद बाली \'नमन\',     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व सितम्बर 2016 अंक आद्योपांत अवलोकित कर अत्यंत आनंदानुभूति हुई।
  • November  2016   ( अंक206 )
    By : कैलाशनाथ द्विवेदी     View in Text Format    |     PDF Format
  • सितंबर अंक पढ़ा। बेहद सुंदर कलेवर, उतना ही सुहाना कंटेंट। महाश्वेता देवी पर दोनों आलेख प्रेरणादायक हैं। प्रत्येक लेखक कवि को पढऩा चाहिये।
  • November  2016   ( अंक206 )
    By : -पूनम मिश्रा     View in Text Format    |     PDF Format
  • आदरणीय भाई साहिब, सितंबर अंक में नामवर सिंह के बहाने आपने प्रगतिशील लेखक संघ के साथ ही अप्रत्यक्ष रूप में लेखकीय लोकतंत्र की बात भी उठाई है।
  • November  2016   ( अंक206 )
    By : गफूर तायर     View in Text Format    |     PDF Format
  • मैं अक्षर पर्व को नियमित देखता हूं। आप प्रस्तावना में जो पुस्तकों पर अपनी प्रतिक्रिया समीक्षात्मक लिखते हैं वह बहुत रुचिकर लगता है।
  • December  2016   ( अंक207 )
    By : शशिभूषण बड़ोनी     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व बिना रुके मिल रहा है। मेरा अक्षर ज्ञान बढ़ता है अत: भाषा का भी,
  • December  2016   ( अंक207 )
    By : गिरीशचंद्र चौधरी     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व जुलाई-16 की प्रस्तावना में ललित सुरजन ने हिन्दी के लब्ध प्रतिष्ठ, विलक्षण कवि चंद्रकांत देवताले के नवीनतम कविता संग्रह ‘खुद पर निगरानी का वक्त’ पर जमकर लिखा है
  • December  2016   ( अंक207 )
    By : प्रो. भगवान दास जैन     View in Text Format    |     PDF Format