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Friday 20 Jul 2018

पत्र

  • अक्षर पर्व अप्रैल-16 अंक मिला। ललित सुरजन की प्रस्तावना में नीरजा फिल्म के निमित्त से ऐसी तमाम फिल्मों का बेहतरनी आकलन उन्होंने कर दिया निश्चय ही उनकी हर प्रस्तावना में श्रम व अध्ययन टपकता है।
  • October  2016   ( अंक205 )
    By : हितेश व्यास     View in Text Format    |     PDF Format
  • ‘अक्षर पर्व’ का नव्यांक (जून-2016) मिला। प्रत्येक वर्ष ‘रचना वार्षिकी’ और ‘उत्सव’ शीर्षक दो सुसमृद्ध व संग्रहणीय अंक अपने पाठकों तक पहुंचाना निश्चय ही ‘अक्षर पर्व’ की अपनी उल्लेखनीय पहचान बन गई है। एतदर्थ अंक की संपादिका सर्वमित्रा जी
  • October  2016   ( अंक205 )
    By : भगवान दास जैन     View in Text Format    |     PDF Format
  • मई 2016 के अंक की उपलब्धि है डॉ. शोभा निगम का आलेख।
  • October  2016   ( अंक205 )
    By : वेदप्रकाश अमिताभ     View in Text Format    |     PDF Format
  • आपने अक्षर पर्व को जो संस्कार दिए, जो सौंदर्य दिया, जो व्यवस्था दी उसके लिए आपकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है।
  • October  2016   ( अंक205 )
    By : अरविंद अवस्थी     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व जुलाई 16 की प्रस्तावना में आपने चंद्रकांत देवताले की कविता के कथ्य और शिल्प को लेकर तथ्यपूर्ण विश्लेषण किया है।
  • November  2016   ( अंक206 )
    By : शिव कुमार अर्चन     View in Text Format    |     PDF Format
  • जुलाई अक्षर पर्व में डॉ. सुनील केशव देवधर का आलेख, रेडियो की भाषा, बच्चों के मूल संस्कारों से जुड़ी बहुत महत्वपूर्ण रचना है
  • November  2016   ( अंक206 )
    By : पूरनचंद बाली \'नमन\',     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व सितम्बर 2016 अंक आद्योपांत अवलोकित कर अत्यंत आनंदानुभूति हुई।
  • November  2016   ( अंक206 )
    By : कैलाशनाथ द्विवेदी     View in Text Format    |     PDF Format
  • सितंबर अंक पढ़ा। बेहद सुंदर कलेवर, उतना ही सुहाना कंटेंट। महाश्वेता देवी पर दोनों आलेख प्रेरणादायक हैं। प्रत्येक लेखक कवि को पढऩा चाहिये।
  • November  2016   ( अंक206 )
    By : -पूनम मिश्रा     View in Text Format    |     PDF Format
  • आदरणीय भाई साहिब, सितंबर अंक में नामवर सिंह के बहाने आपने प्रगतिशील लेखक संघ के साथ ही अप्रत्यक्ष रूप में लेखकीय लोकतंत्र की बात भी उठाई है।
  • November  2016   ( अंक206 )
    By : गफूर तायर     View in Text Format    |     PDF Format
  • मैं अक्षर पर्व को नियमित देखता हूं। आप प्रस्तावना में जो पुस्तकों पर अपनी प्रतिक्रिया समीक्षात्मक लिखते हैं वह बहुत रुचिकर लगता है।
  • December  2016   ( अंक207 )
    By : शशिभूषण बड़ोनी     View in Text Format    |     PDF Format