Monthly Magzine
Thursday 23 Nov 2017

पत्र

  • अक्षर पर्व का जून अंक वैश्विक आतंकवाद और धर्म के नाम पर की जा रही हिंसा पर एक समग्र विश्लेषण से परिपूर्ण विशिष्ट संग्रहणीय अंक है।
  • September  2016   ( अंक204 )
    By : सुसंस्कृति परिहार     View in Text Format    |     PDF Format
  • ‘अक्षर पर्व’ के जुलाई-16 अंक में तुम्हारी प्रस्तावना में डॉ. चन्द्रकांत देवताले की काव्य-पुस्तक की समीक्षा पढक़र मुझे तुम्हारी उस समीक्षा की याद आ गई जो तुमने डॉ. मलय की काव्य-कृति के बारे में लिखा था।
  • September  2016   ( अंक204 )
    By : डॉ. गंगा प्रसाद बरसैंया     View in Text Format    |     PDF Format
  • जुलाई अंक की प्रस्तावना में ललित जी ने वरिष्ठ कवि चंद्रकांत देवताले के काव्य संग्रह की सुष्ठु एवं सम्यक समीक्षा की है।
  • September  2016   ( अंक204 )
    By : चंद्रसेन विराट     View in Text Format    |     PDF Format
  • जुलाई 2016 अक्षर पर्व प्राप्त हुआ आभार। आज हिंदी क्षेत्र में यूँ तो अनेक पत्रिकाएं प्रकाशित हो रही हैं।
  • September  2016   ( अंक204 )
    By : श्याम सखा श्याम     View in Text Format    |     PDF Format
  • ‘अक्षर पर्व’ का अगस्त-16 अंक ‘आजादी के सुर’ विशेषांक मिला।
  • October  2016   ( अंक205 )
    By : चंद्रसेन विराट     View in Text Format    |     PDF Format
  • रचना वार्षिकी में अधिकांश पढ़े का सार है कि कुछ लोग माक्र्सवाद को इसलिए बुरा मानते हैं
  • October  2016   ( अंक205 )
    By : निशांत     View in Text Format    |     PDF Format
  • ‘अक्षर पर्व’ मई 2016 का अंक प्राप्त हुआ। ललित सुरजन की प्रस्तावना सदैव बहुत जमती है।
  • October  2016   ( अंक205 )
    By : शंकरमोहन झा     View in Text Format    |     PDF Format
  • ‘अक्षर पर्व’ का मई 2016 का अंक नवीन स्तरीय सामग्री से समृद्ध है।
  • October  2016   ( अंक205 )
    By : प्रो. भगवानदास जैन     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व अप्रैल-16 अंक मिला। ललित सुरजन की प्रस्तावना में नीरजा फिल्म के निमित्त से ऐसी तमाम फिल्मों का बेहतरनी आकलन उन्होंने कर दिया निश्चय ही उनकी हर प्रस्तावना में श्रम व अध्ययन टपकता है।
  • October  2016   ( अंक205 )
    By : हितेश व्यास     View in Text Format    |     PDF Format
  • ‘अक्षर पर्व’ का नव्यांक (जून-2016) मिला। प्रत्येक वर्ष ‘रचना वार्षिकी’ और ‘उत्सव’ शीर्षक दो सुसमृद्ध व संग्रहणीय अंक अपने पाठकों तक पहुंचाना निश्चय ही ‘अक्षर पर्व’ की अपनी उल्लेखनीय पहचान बन गई है। एतदर्थ अंक की संपादिका सर्वमित्रा जी
  • October  2016   ( अंक205 )
    By : भगवान दास जैन     View in Text Format    |     PDF Format