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Monday 20 Nov 2017

पत्र

  • प्रस्तावना में ललितजी साइकिल के बहाने पुराने ज़माने में ले गए।
  • May  2016   ( अंक200 )
    By : दिलीप गुप्ते     View in Text Format    |     PDF Format
  • ‘अक्षर पर्व’ फरवरी 2016 का अंक भी पिछले अंकों की तरह रचनात्मक एवं ज्ञानात्मक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।
  • May  2016   ( अंक200 )
    By : -डॉ. (श्रीमती) मृदुला शुक्ल,     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व का फरवरी-16 अंक मिला। उसके हर अंक में कुछ न कुछ ऐसा अवश्य होता है जो पत्र लिखने को बाध्य करता है।
  • May  2016   ( अंक200 )
    By : गंगा प्रसाद बरसैया     View in Text Format    |     PDF Format
  • अप्रैल-16 अंक में कई रचनाएं और आलेख ध्यान आकर्षित करने वाले हैं।
  • June  2016   ( अंक201 )
    By : डॉ. गंगा प्रसाद बरसैंया     View in Text Format    |     PDF Format
  • फरवरी अंक में प्रस्तावना में ललित जी ने हिंदी के मानक शब्दकोशों के बारे में अपना चिंतन और चिंता व्यक्त की है।
  • June  2016   ( अंक201 )
    By : प्रो.भगवानदास जैन,     View in Text Format    |     PDF Format
  • कहानी विशेषांकों के दोनों भागों की जितनी प्रशंसा की जाए कम है।
  • June  2016   ( अंक201 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • ‘अक्षर पर्व’ का पूर्णांक 199 (अप्रैल 2016) यथा समय मिला।
  • July  2016   ( अंक202 )
    By : प्रो.भगवानदास जैन,     View in Text Format    |     PDF Format
  • अप्रैल अंक आद्यान्त पढ़ा। प्रस्तावना बेहद पसंद आई। फिल्मों पर ललित सुरजन के विचारों से अभिभूत हुए बिना नहीं रहा जा सकता।
  • July  2016   ( अंक202 )
    By : पत्र     View in Text Format    |     PDF Format
  • मई 2016 का अक्षर पर्व मिला। हमेशा की तरह मैं प्रस्तावना से पढऩा शुरू करता हूं, क्योंकि उसमें कुछ खास होता है ऐसा जो सोच को जगा देता है।
  • July  2016   ( अंक202 )
    By : पत्र     View in Text Format    |     PDF Format
  • नौकरी के क्रम में लंबे समय तक बाहर रहा, लौटा तो अक्षरपर्व के कई अंक एक साथ मिले।
  • July  2016   ( अंक202 )
    By : पत्र     View in Text Format    |     PDF Format