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Thursday 23 Nov 2017

पत्र

  • कहानी विशेषांक के रूप में उत्सव अंक से पाठकों के घर-परिवार में जैसे आनंदोत्सव आ गया। सैकड़ों कहानियों में से अपने वक्त की तासीर व तस्वीर से रू-ब-रू कराने में सक्षम कहानियों का चयन करना निस्संदेह दुरूह कार्य है जिसे आपने सफलता की बुलंदी तक पहुंचा दिया है।
  • March  2016   ( अंक198 )
    By : प्रो.भगवानदास जैन,     View in Text Format    |     PDF Format
  • उत्सव अंक संग्रहणीय है। ललित जी की सिद्धहस्त लेखनी में प्रस्तावना पत्रिका का संपूर्ण सार है।
  • March  2016   ( अंक198 )
    By : डा. विकास कुमार,     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षरपर्व जुलाई अंक में मानवाधिकार और प्रेमचंद शीर्षक आलेख को पुष्ट विश्लेषण से भरपूर पाया।
  • March  2016   ( अंक198 )
    By : गिरीशचंद्र चौधरी     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व का उत्सव अंक प्राप्त हुआ। अंक की सभी 20 कहानियां हिन्दी साहित्य के श्रेष्ठ रचनाकारों की हैं।
  • March  2016   ( अंक198 )
    By : राजेन्द्र सिंह गहलौत     View in Text Format    |     PDF Format
  • आदरणीय सुरजन जी,अक्षर पर्व के फरवरी अंक में आपकी प्रस्तावना पढ़ कर यह प्रतिक्रिया लिखना आवश्यक समझा।
  • April  2016   ( अंक199 )
    By : महेन्द्र राजा जैन     View in Text Format    |     PDF Format
  • आदरणीय सुरजन जी,अक्षर पर्व के फरवरी अंक में आपकी प्रस्तावना पढ़ कर यह प्रतिक्रिया लिखना आवश्यक समझा।
  • April  2016   ( अंक199 )
    By : महेंद्र राजा जैन     View in Text Format    |     PDF Format
  • मैं महेन्द्र राजा जैन का आभारी हूं कि उन्होंने प्रस्तावना पर इतने विस्तारपूर्वक टिप्पणी की। इस संबंध में मेरा निवेदन निम्नानुसार है-
  • April  2016   ( अंक199 )
    By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • फरवरी अंक में आपने शब्दकोश पर ध्यान केन्द्रित किया है।
  • May  2016   ( अंक200 )
    By : गफूर तायर     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व के कुछ अंकों के कुछ अंश पढ़े हैं। बड़ी उपयोगी पत्रिका है।
  • May  2016   ( अंक200 )
    By : अशोक भाटिया     View in Text Format    |     PDF Format
  • अनुपम मिश्र के वक्तव्य ( जीवन का अर्थ : अर्थमय जीवन ) को देखा तो सहज ही ये इच्छा हुई
  • May  2016   ( अंक200 )
    By : नवनीत कुमार झा, हरिहरपुर     View in Text Format    |     PDF Format