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Thursday 19 Apr 2018

पत्र

  • अक्षर पर्व अक्टूबर-2015 अंक में आपकी प्रस्तावना के साथ बहता चला गया।
  • January  2016   ( अंक196 )
    By : केवल गोस्वामी     View in Text Format    |     PDF Format
  • सितंबर-15 का अक्षर पर्व मिला। प्रस्तावना में ललित जी ने भगवत रावत पर खूब मन से लिखा है।
  • January  2016   ( अंक196 )
    By : चन्द्रसेन विराट     View in Text Format    |     PDF Format
  • अगस्त अंक मिला। इस अंक में प्रस्तावना के तहत \'स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी कविता : दशा और दिशाÓ के संबंध में ललित सुरजन ने ठीक ही कहा है
  • January  2016   ( अंक196 )
    By : जितेन्द्र धीर     View in Text Format    |     PDF Format
  • आलोचनाकर्म अंक अक्तूबर 2015
  • February  2016   ( अंक197 )
    By : हरदर्शन सहगल,     View in Text Format    |     PDF Format
  • बहुत समय से मेरी यह तमन्ना थी की कोई तो मेरी इस बात से इत्तेफाक करे कि हिन्दी-उर्दू के नाम पर गज़़ल को न घसीटा जाय वो अब आपका सम्पादकीय पढ़कर पूरी हुई।
  • February  2016   ( अंक197 )
    By : के पी सक्सेना दूसरे     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व कहानी विशेषांक के दोनों अंक संग्रहणीय हैं। पहला अंक तो बहुत ही जानदार है। भीष्म साहनी की वीरो ने बंटवारे के दर्द का यादगार अक्स एक बार फिर चस्पां कर दिया। कालावधि के यथार्थ का जीवन्त और सहज सम्प्रेषण।
  • February  2016   ( अंक197 )
    By : कामेश्वर पांडेय     View in Text Format    |     PDF Format
  • जनवरी अंक में ललित सुरजन जी की प्रस्तावना हमेशा की तरह ही बेहतरीन है ! हिन्दी कविता में गज़़ल विधा आज एक स्थापित और विशिष्ट विधा है !
  • February  2016   ( अंक197 )
    By : नवनीत कुमार झा, हरिहरपुर     View in Text Format    |     PDF Format
  • किसी पत्रिका का पढऩा तभी सार्थक लगता है जब उसमें प्रकाशित कोई रचना या लेख मन को छू ले और वह देर तक गूंजता रहे।
  • February  2016   ( अंक197 )
    By : डॉ. गंगा प्रसाद बरसैंया     View in Text Format    |     PDF Format
  • जुलाई अंक की चारों कहानियां, विशेषकर \'जिदÓ बहुत पठनीय है, \'जिदÓ में कथाकार वीरा चतुर्वेदी ने एक बहुत ही सामान्य विषय को यूनिवर्सल अपील के क्लासिकल स्तर तक उठा दिया है,
  • February  2016   ( अंक197 )
    By : पूरनचंद बाली \'नमन\',     View in Text Format    |     PDF Format
  • भीष्म साहनी एक यथार्थवादी रचनाकार हैं।
  • February  2016   ( अंक197 )
    By : उत्तिमा केशरी     View in Text Format    |     PDF Format