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Wednesday 22 Nov 2017

पत्र

  • सितम्बर अंक में पूनम मिश्रा की कहानी कस्तूरी और पुष्पिता अवस्थी का उपन्यास अंश छिन्नमूल, इस अंक की उपलब्धि है।
  • November  2015   ( अंक194 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षरपर्व का अक्टूबर अंक अपने कलेवर में बहुत खूबियां समेटे हुए है। मणिपुर, इम्फाल की धधकती एवं शर्मिला चानू की धरती से आईं विजयलक्ष्मी जी की रचनाओं में समसामयिक विद्रूपताएं जिस अंदाज में उकेरी गई हैं
  • December  2015   ( अंक195 )
    By : सुसंस्कृति परिहार     View in Text Format    |     PDF Format
  • रचना वार्षिकी भीष्म साहनी विशेषांक का एक-एक पन्ना पढ़ गया, प्रस्तावना से लेकर उपसंहार तक।
  • December  2015   ( अंक195 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षरपर्व निरंतर मिल रहा है, आभार। सितम्बर अंक में चंद्रसेन विराट की कविता बहुत सुंदर है।
  • December  2015   ( अंक195 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • उसने कहा था कहानी मेरे दसवीं के सिलेबस में थी और इसके साथ ही प्रेमचन्द की कहानी नमक का दारोगा और फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ठेस भी और ये तीनो कहानियां मुझे अत्यन्त प्रिय थीं!
  • January  2016   ( अंक196 )
    By : नवनीत कुमार झा     View in Text Format    |     PDF Format
  • जुलाई अंक की प्रस्तावना में पाठक मंच द्वारा आयोजित इटार में हुए साहित्यिक सम्मेलन की रपट पढ़कर लगा कि काव्य मंच आज भी साहित्य से जनसाधारण को जोडऩे का सशक्त माध्यम है।
  • January  2016   ( अंक196 )
    By : शिवकुमार अर्चन     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व पत्रिका का कहानी विशेषांक बहुत उम्दा बन पड़ा है। इसलिए यादगार भी। अंक की कुछ कहानियां ही पढ़ पाया हूं।
  • January  2016   ( अंक196 )
    By : बजरंग बिहारी,     View in Text Format    |     PDF Format
  • अजित कुमार ने नागार्जुन के दोहे पर बड़ी कसरत नाहक की।
  • January  2016   ( अंक196 )
    By : शंकरमोहन झा     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व अक्टूबर-2015 अंक में आपकी प्रस्तावना के साथ बहता चला गया।
  • January  2016   ( अंक196 )
    By : केवल गोस्वामी     View in Text Format    |     PDF Format
  • सितंबर-15 का अक्षर पर्व मिला। प्रस्तावना में ललित जी ने भगवत रावत पर खूब मन से लिखा है।
  • January  2016   ( अंक196 )
    By : चन्द्रसेन विराट     View in Text Format    |     PDF Format