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Friday 24 Nov 2017

पत्र

  • अक्षर पर्व अगस्त-2015 अंक देखकर महान शास्त्रीय गायक भीमसेन जोशी के गाए हुए गीत की पंक्ति- \'\'मिले सुर मेरा तुम्हारा फिर सुर बने हमाराÓÓ याद आ गई, जो राष्ट्रीय एकता हेतु भारत सरकार द्वारा बनाए एक विज्ञापन में थी।
  • March  2016   ( अंक193 )
    By : कुशेश्वर     View in Text Format    |     PDF Format
  • एक लंबे अर्से के बाद अक्षरपर्व पढऩे मिला। ये पहले भी ओजपूर्ण था और आज भी प्रभावशाली लगा। सितंबर अंक पढ़ा, रचनाएं सभी अच्छी लगीं।
  • November  2015   ( अंक194 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • एक लंबे अर्से के बाद अक्षरपर्व पढऩे मिला। ये पहले भी ओजपूर्ण था और आज भी प्रभावशाली लगा। सितंबर अंक पढ़ा, रचनाएं सभी अच्छी लगीं।
  • November  2015   ( अंक194 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • जुलाई का अक्षरपर्व डाक विभाग की अव्यवस्था से मुझ तक नहींपहुंचा, न पढ़ पाने की महरूमिय-मायूसी बन दिल-दिमाग पर छाई रही।
  • November  2015   ( अंक194 )
    By : गफूर तायर     View in Text Format    |     PDF Format
  • जुलाई का अक्षरपर्व डाक विभाग की अव्यवस्था से मुझ तक नहींपहुंचा, न पढ़ पाने की महरूमिय-मायूसी बन दिल-दिमाग पर छाई रही।
  • November  2015   ( अंक194 )
    By : गफूर तायर     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षरपर्व का सितम्बर अंक पढ़ा, आत्मिक आभार। पत्रिका अपने आरंभिक काल से आज तक अपनी सारस्वत पहचान को बनाए रखने में कामयाब है।
  • November  2015   ( अंक194 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षरपर्व का सितम्बर अंक पढ़ा, आत्मिक आभार। पत्रिका अपने आरंभिक काल से आज तक अपनी सारस्वत पहचान को बनाए रखने में कामयाब है।
  • November  2015   ( अंक194 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षरपर्व निरंतर स्तरीय रचनाओं के साथ निकल रहा है, यह देखकर प्रसन्नता होती है। सितम्बर अंक में ललितजी ने प्रस्तावना के बहाने कवि भगवत रावत को याद किया, यह देखकर अच्छा लगा।
  • November  2015   ( अंक194 )
    By : रामनिहाल गुंजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षरपर्व निरंतर स्तरीय रचनाओं के साथ निकल रहा है, यह देखकर प्रसन्नता होती है। सितम्बर अंक में ललितजी ने प्रस्तावना के बहाने कवि भगवत रावत को याद किया, यह देखकर अच्छा लगा।
  • November  2015   ( अंक194 )
    By : रामनिहाल गुंजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षर पर्व का अक्टूबर अंक मिला। पत्रिका की निरंतर प्रगति तथा बदला कलेवर देखकर आश्वस्ति हुई।
  • November  2015   ( अंक194 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format