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Thursday 23 Nov 2017

अन्य की रचनायें

  • पत्रिका नियमित प्राप्त हो रही है। अक्टूबर अंक में प्रो.बिपन चंद्रा को याद करते हुए आपने जो लिखा ,वह ज़रूरी था।
  • February  2015   ( अंक185 )
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  • लोक संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को संस्पर्शित करता हुआ उत्सव अंक नसीब हुआ। प्रस्तावना में तकरीबन वे सारे मुद्दे उठाए गए हैं,
  • February  2015   ( अंक185 )
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  • अक्षर पर्व का दिसम्बर अंक प्राप्त हुआ। यह अंक बेहतर लगा। प्रस्तावना के साथ-साथ इस अंक में प्रकाशित अन्य रचनाएं और लेख जो खासतौर पर पठनीय हैं
  • February  2015   ( अंक185 )
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  • मनुष्य : एक किताब
  • March  2015   ( अंक186 )
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  • रंगकर्मी सफदर हाशमी के शहादत दिवस पर काव्य गोष्ठी
  • March  2015   ( अंक186 )
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  • कैसा होता है हिन्दू?़
  • March  2015   ( अंक186 )
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  • शोक समाचार
  • March  2015   ( अंक186 )
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  • अक्षरपर्व दिसम्बर अंक की प्रस्तावना में आपने श्री बद्रीनारायण रचित पुस्तक के हवाले से लीडर आफ दलित्स : कांशीराम जी के सामाजिक व राजनीतिक व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को बखूबी उजागर किया है।
  • March  2015   ( अंक186 )
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  • \'अक्षर पर्वÓ के उत्सव अंक के अवलोकन का अवसर देने के लिए धन्यवाद । वर्ष में एक अंक सांस्कृतिक विरासत में प्राप्त उत्सवों को समर्पित करने की योजना वास्तव में सराहनीय है। उत्सव हमारे जीवन में प्राणवायु का संचार करते हैं।
  • March  2015   ( अंक186 )
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  • अक्षरपर्व का जनवरी अंक मिला। एक दिन में पूरा अंक पढ़ गया। इस बार श्री ललित सुरजन जी प्रस्तावना भी नए ढंग की है।
  • March  2015   ( अंक186 )
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