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Monday 23 Sep 2019

मैं लौट आऊँगा

मरकर भी नहीं मरुंगा,

जिन्दा रहूँगा मैं ,

तुम्हारी यादों में।

सूरज की किरणों के संग,

मैं धरा पर उतर आऊँगा,

तुम मुझे फूलों की मुस्कान में देखना।

मैं ओस बनकर,

मोतियों में ढल जाऊंगा,

रातों में।

पत्तियों की सरसराहटों में,

अजाने कदमों की आहटों में,

चिडिय़ों की चहचहाटों में,

तुम मुझे सुनना,

मैं प्रकृति के गीत गाऊँगा।