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Thursday 17 Oct 2019

एक क्रांतिकारी

अध्यापक गेब्रियल एंडरसन,  घूमते-घूमते स्कूल के बगीचे के किनारे आकर रुका, दुविधा में था कि क्या करे, बहुत दूर, करीब दो मील के फासले पर,  जंगल में पेड़ नीले रंग के फीते की तरह, साफ निर्मल बर्फ के विस्तार पर झूल रहे थे। वह एक चटकीला, चमकदार दिन था। हवा में हल्कापन और पारदर्शिता थी, जो अक्सर वसंत-ऋतु के शुरुआती दिनों में होती है। उस खुशनुमा मौसम में गैब्रिएल एंडरसन ने चहल-कदमी के इरादे से अपने कदम जंगल की ओर बढाए।

मेरे जीवन का एक और वसंत, उसने कहा, गहरी साँस लेते हुए और अपने चश्मे से आकाश को देखते हुए। एंडरसन के भीतर का भावुक कवि जागृत हो उठा। वह हाथों को अपने पीछे मोड़े, अपनी छड़ी झुलाते हुए चल रहा था।

वह थोड़ा आगे बढ़ा ही था कि उसका ध्यान बगीचे की रेलिंग के पार, सड़क पर सैनिकों और घोड़ों के एक समूह पर गया। उनकी एक जैसी पोशाकें बर्फ की धवलता के सामने धुंधली लग रही थी, लेकिन उनकी तलवारें और घोड़ों के आवरण प्रकाश को विक्षेप कर रहे थे। उनके झुके हुए घुड़सवारी पैर बर्फ पर बड़ी फूहड़ता से पड़ रहे थे। एंडरसन को आश्चर्य हुआ कि वे वहां क्या कर रहे थे। उनके वहां होने का प्रयोजन सहसा उसके मस्तिष्क में कौंध गया। वे किसी खतरनाक काम को अंजाम देने वाले थे, उसके विवेक से ज्यादा उसके सहज-ज्ञान ने उसे आगाह किया। कुछ असाधारण और भयंकर वहां घटित होने वाला था। और उसी सहज-ज्ञान ने उसे सचेत किया कि उसे स्वयं को सैनिकों से छिपा लेना चाहिए। वह जल्दी से बायीं ओर मुड़ा, अपने घुटनों के बल बैठ गया, और नरम, पिघलती, चटचटाती बर्फ पर खिसकते हुए सूखी घास के ढेर तक आ गया, जिसके पीछे से, गर्दन निकाल कर, वह देख सकता था कि सैनिक क्या कर रहे थे।

वे कुल बारह थे, उनमें एक गठीला युवा अफसर था, भूरे रंग की पोशाक में, कमर पर चांदी का बेल्ट बंधा हुआ। उसका चेहरा इतना लाल था कि एंडरसन ने वहीं दूर से उसकी त्वचा के उज्जवल रंग के विरुद्ध उभरी उसकी मुछों और भौहों की अनोखी सफेद-सी झलक पा ली थीष उसकी भारी आवाज के खंडित स्वर वहाँ साफ-साफ पहुँच रहे थे, जहाँ छिपा हुआ अध्यापक, ध्यान से सुन रहा था।

मुझे पता है कि मुझे क्या करना है? मुझे किसी की सलाह नहीं चाहिए, अफसर चिल्लाया। उसने अपने हाथ कमर पर रखे और हलचल मचाते सैनिकों की टोली में से किसी एक को तिरस्कारपूर्वक कहा, मैं तुम्हें दिखाऊंगा कि बागी कैसे हुआ जाता है, कमीने मुलजिम।

एंडरसन का दिल तेजी से धडकने लगा- हे भगवान। उसने सोचा क्या यह संभव है? उसका सिर बर्फ जैसा ठंडा हो गया, जैसे शीत लहर की चपेट में आ गया था।

अफसर, एक गंभीर, प्रतिरोधी, किन्तु सुस्पष्ट आवाज सैनिकों के बीच से आई, तुम्हें कोई अधिकार नहीं है- यह अदालत को तय करना है– तुम न्यायकर्ता नहीं हो – यह साफ साफ हत्या है, नहीं...खामोश! अफसर गरजा, उसकी आवाज क्रोध से रुंधी हुई थी, इवानोव,  तुम आगे बढ़ो।

उसने घोड़े को एड़ लगाई और चला गया। गेब्रियल ने यंत्रवत् देखा घोड़े ने बहुत ही सावधानी से अपना रास्ता पकड़ लिया था, अपनी टांगों को सफाई से रखते हुए, किसी धीमे नृत्य के स्टेप्स की तरह। उसके कान ऊपर की ओर उठे हुए थे, किसी भी प्रकार की ध्वनि को पकडऩे के लिए चौकन्ने। सैनिकों में क्षण भर के लिए हड़बड़ी और उत्तेजना दिखी। फिर वे अलग-अलग दिशाओं में फैल गए, तीन काली पोशाक वाले व्यक्तियों को पीछे छोड़ते हुए, दो लम्बे कद के आदमी और एक बहुत छोटा और कमजोर। एंडरसन ने उस छोटे के सिर के बालों को देखा। वे बहुत सुनहले थे और उसने उसके उभरे हुए दोनों गुलाबी कानों को देखा।

अब वह पूरी तरह से समझ गया था कि क्या होने वाला था। परन्तु वह सब इतना असामान्य, इतना भयावह था, कि उसे लगा जैसे वह कोई सपना देख रहा था।

यहाँ सब कितना चमकीला, कितना सुंदर है – बर्फ, मैदान, जंगल,  आकाश। बासंती हवा से सब कुछ गमक रहा है। फिर भी लोगों को मारा जा रहा है, यह कैसे हो सकता है?  असंभव! उसके विचार भ्रमित हो गए। उसे उस व्यक्ति जैसा बोध हुआ जो अचानक पागल हो गया हो, जिसे लगता है वह जो देखता है, सुनता है, महसूस करता है, वह उनका आदी नहीं है, और उसके लिए वह सुनना, देखना और महसूस करना उचित नहीं है।

तीनों काली पोशाक वाले आदमी रेलिंग के सहारे एक दूसरे के पास खड़े थे,  दो बिलकुल पास-पास और छोटा वाला कुछ दूरी पर।

अफसर! उनमें से एक हताशा भरे स्वर में चिल्लाया - एंडरसन यह नहीं देख पाया कि उनमें से कौन था -भगवान हमें देखता है! अफसर!

आठ सैनिक घोड़ों से जल्दी जल्दी उतरे, उनकी महमेज और तलवारें बड़े ही भोंडे तरीके से  लटक रही थीं। निस्संदेह वे बहुत ही जल्दी में थे, जैसे वे किसी गलत काम को अंजाम दे रहे थे।

कुछ समय तक वहाँ सन्नाटा छाया रहा, जब तक सैनिक उन काली आकृतियों से कुछ फीट की दूरी पर उनके सामने बन्दूकें ताने पंक्तिबद्ध नहीं हो गए। ऐसा करते समय एक सैनिक की कैप नीचे गिर गई। उसने उसे उठाया और बिना बर्फ को झटकते हुए वापस सिर पर रख दी।

अफसर का कनछिदा घोड़ा अभी भी एक ही जगह पर नाच रहा था, और दूसरे घोड़े भी अपने कान ऊपर की ओर उठाए, चौकन्ने, काली पोशाक वाले आदमियों को देखते हुए अविचल खड़े थे, उनके लम्बे-लम्बे सिर एक तरफ झुके हुए थे।

कम से कम बच्चे को तो बख्श दो। अचानक एक और आवाज हवा को चीरती हुई निकली. एक बच्चे को क्यों मारते हो, लानत है तुम पर! बच्चे ने क्या किया है?          

इवानोव,  वही करो, जो मैंने तुम्हें करने के लिए कहा था, अफसर की गर्जना में दूसरी आवाजें डूब गयी। उसका चेहरा लाल फलालैन के कपड़े की तरह सुर्ख हो गया।

उसके बाद वहाँ जो दृश्य उत्पन्न हुआ वह अपनी भीषणता में बर्बर और घिनौना था। सुनहले  बाल और गुलाबी गाल वाली छोटी आकृति के मुंह से बालक के तीखे और महीन स्वर में एक जंगली चीख निकली। वह चकरा कर एक ओर झुक गया। तुरंत ही दो या तीन सैनिकों ने उसे जकड़ लिया। परन्तु बच्चा संघर्ष करने लगा, दो और सैनिक उस ओर भागे।

ओउ - ओउ - ओउ - ओउ! लड़का चिल्लाया। मुझे छोड़ दो, मुझे जाने दो! ओउ - ओउ!

उसकी हवा को चीरती हुई दर्दनाक तीखी आवाज़ निकली जैसे कत्ल होते हुए सूअर के बच्चे की चीख। अचानक वह चुप हो गया। शायद किसी ने उस पर आघात किया था। अप्रत्याशित और दमनकारी चुप्पी पसर गयी। लड़के को आगे धकेला जा रहा था। फिर वहाँ गगनभेदी धमाका हुआ। एंडरसन बुरी तरह कांपता हुआ पीछे लौटने लगा। उसने साफ-साफ, मगर अनिश्चितता से, जैसे वह कोई सपना देख रहा हो, दो काली आकृतियों को गिरते हुए देखा, फीकी पीली चिंगारियों को कौंधते हुए और साफ और चमकीले आसमान में हलके धुएं को ऊपर उठते हुए देखा। उसने सैनिकों को, लाशों पर नजर डाले बगैर, तुरंत ही घोड़ों पर चढ़ते हुए देखा। उसने उन्हें कीचड़ से भरी सड़क पर सरपट भागते देखा, उनके शस्त्र झनझनाते रहे थे, उनके घोड़ों की टाप को खटखटा रही थी।

उसने यह सब देखा, सड़क के बीचोंबीच खड़े हुए, नहीं जानते हुए कि वह कब और क्यों घास के ढेर को फांद आया था। वह मौत सा जर्द था। उसका चेहरा पसीने से तर था, उसका सारा शरीर काँप रहा था। एक शारीरिक विषाद उसे भयंकर पीड़ा और यातना दे रहा था। इस समय वह अपनी अनुभूति की प्रकृति को पहचान नहीं पा रहा था। यह सब एक व्याधि की चरम स्थिति के समान था, हालांकि बहुत ही घृणास्पद और भयावह।

सैनिकों के मोड़ के उस पार, जंगल की ओर अदृश्य हो जाने के बाद, लोग भागते हुए उस स्थान पर पहुंचे। शव सड़क के किनारे, रेलिंग की दूसरी ओर पड़े थे, जहाँ बर्फ शीशे-सी साफ, भुरभुरी और विशुद्ध थी और उज्जवल आकाश में चमक-दमक रही थी। वहाँ कुल तीन लाशें थीं, दो आदमी और एक लड़का। लड़का अपनी लम्बी कोमल गर्दन के साथ बर्फ पर पड़ा हुआ था। लड़के के पास वाले आदमी का चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था। वह औंधे मुंह रक्त के पूल में गिरा था। तीसरा एक विशालकाय मोटा आदमी था, काली और घनी दाढ़ी और मजबूत मांसल बाहें। वह  अपने विशाल शरीर को पूरी तरह फैलाए हुए पड़ा था, उसकी बाहें खून से सने हुए बर्फ के विशाल क्षेत्र पर विस्तारित थी।

काली पोशाकों वाले तीनों व्यक्तियों की लाशें, जिन्हें गोली मारी गयी थी, सफेद उज्ज्वल बर्फ पर पड़ी थीं, निस्तब्ध; संकरी सड़क पर कोने में, लोगों की भीड़ से घिरी हुई। दूर से कोई भी उनकी निस्तब्धता में जो आतंक था, उसे नहीं जान सकता था। 

उस रात गेब्रियल एंडरसन ने स्कूल-हाउस के अपने छोटे कमरे में हमेशा की तरह कविताएँ नहीं लिखीं। वह खिड़की पर खड़ा था और धुंधले नीले आकाश में चन्द्रमा के निस्तेज गोले को देख रहा था और विचारमग्न था, परन्तु उसके विचार उलझे हुए, अस्पष्ट, और भारी थे, मानो बादल का एक टुकड़ा उसके मस्तिष्क में उतर आया था।

उसने मलिन चांदनी में अस्पष्ट रूप से रेखांकित उस काली रेलिंग, उन पेड़-पौधों और वीरान बगीचे को देखा। उसे ऐसा प्रतीत हुआ कि उसने उन्हें देखा – उन तीन व्यक्तियों को, जिन्हें गोली मार दी गयी थी, दो व्यस्क और एक लड़का। वे वहाँ अब सड़क के किनारे पड़े हुए थे, खाली, निशब्द मैदान में, दूर बहुत दूर निस्तेज चन्द्रमा को अपनी मृत आँखों से देखते हुए जैसे वह देख रहा था अपनी सजीव आँखों से।

किसी दिन वह समय आयेगा, उसने सोचा, जब लोगों द्वारा लोगों की हत्या करना एक निरी  असम्भवता होगी। वह समय आयेगा जब उन अफसरों और सैनिकों को भी, जिन्होंने इन तीन व्यक्तियों को मारा है, उन्होंने जो किया है उसका अहसास होगा, और उन्हें समझ में आयेगा कि जिस उद्देश्य के लिए उन्होंने उन्हें मारा वह जितना उनके लिए – अफसरों और सैनिकों के लिए -  आवश्यक, महत्वपूर्ण और बहुमूल्य है, उतना ही उनके लिए भी जिन्हें उन्होंने मारा था।

हाँ,  उसने जोर से और दृढ़तापूर्वक कहा, उसकी आँखें नम थीं, वह समय आयेगा। वे समझ जायेंगे। और चन्द्रमा के निस्तेज गोले को उसकी आँखों की नमी ने धुंधला कर मिटा दिया।

उन तीन हताहत व्यक्तियों के प्रति उठे दया-भाव ने उसके हृदय को द्रवित कर दिया था, जिनकी आँखें चन्द्रमा को निहार रही थी, उदास और अंधी। उसके भीतर यकायक उठी क्रोघ की अनुभूति ने एक तीखे चाकू की तरह उसे चीर दिया और उस पर हावी हो गई।

लेकिन गैब्रिएल एंडर्सन ने अपने हृदय को शांत किया और धीरे-से फुसफुसाया,  वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं। और इस पुरानी उक्ति ने उसे अपने क्रोध और आक्रोश को दबाने की ताकत दी।

(2)

वह दिन भी उतना ही चमकीला और उज्जवल था, परन्तु बसंत ऋतु अपने यौवन पर थी। गीली मिट्टी में बसंत की गंध थी। जगह-जगह खुली पिघलती बर्फ के नीचे से साफ ठंडा पानी बह  रहा था। वृक्षों की शाखाएं मुलायम और लचीली थी। जनपद के चारों और मीलों तक स्वच्छ साफ नीला आकाश फैला हुआ था.

लेकिन बसंत-ऋतु के दिवस की उज्ज्वलता और प्रसन्नता उस गाँव में नहीं थी। वे कहीं गाँव के बाहर थी, वहाँ जहाँ लोग नहीं थे – मैदानों में, जंगलों में और पहाड़ों पर। इधर गाँव में हवा दमघोंटू, भारी और भयावह थी, एक दु:स्वप्न जैसी।

गेब्रियल एंडरसन सड़क पर सांवले, उदास, अन्यमनस्क लोगों की भीड़ के पास खड़ा था और अपनी गर्दन उठा कर सात किसानों को कोड़े मारने की सजा की तैयारियों को देख रहा था।

वे पिघलती बर्फ पर खड़े थे, और स्वयं गेब्रियल एंडरसन को यकीन नहीं हो रहा था कि वे वही लोग थे जिन्हें वह भलीभांति जानता पहचानता था। जो उनके साथ अभी होने वाला था, जो शर्मनाक, भयावह,  अनुच्छेद्य  कृत्य उनके साथ घटित होने वाला था, वह उन्हें दुनिया के बाकी लोगों से अलग कर रहा था, इसलिए वे वैसा महसूस नहीं कर पा रहे थे, जैसा गेब्रियल एंडरसन महसूस कर रहा था, ठीक उसी तरह वह वैसा महसूस नहीं कर पा रहा था, जैसा वे सातों  महसूस कर रहे थे। उन्हें चारों ओर से सैनिकों ने घेर रखा था, आत्मविश्वास से भरे, और आकर्षक ढंग से अच्छी कद-काठी के घोड़ो पर चढ़े हुए, जो लम्बे-लम्बे सिरों को हिनहिना रहे  रहे थे, और अपने चेहरों को धीरे-धीरे एक कोने से दूसरे कोने तक घुमा रहे थे, तिरस्कारपूर्वक उसकी ओर देखते हुए, गेब्रियल एंडरसन की ओर, जो जल्दी ही इस आतंक को देखेगा,  इस अपमान को, और कुछ नहीं कर पायेगा, कुछ भी करने का साहस नहीं जुटा पायेगा। ऐसा गेब्रियल एंडरसन को लगा; और एक ठंडेपन, एक असहनीय शर्मिंदगी के अहसास ने उसे जकड़ लिया था, जब बर्फ के दो क्लैंपों के बीच से वह सब कुछ देख रहा था, बिना हिले-डुले, बिना रोये अथवा बिना कराहे हुए।

उन्होंने पहले किसान को पकड़ा, गेब्रियल एंडरसन ने उसके चेहरे के अपरिचित, घिघियाते, निराश भाव को देखा। उसके होंठ खुले, लेकिन कोई आवाज सुनाई नहीं दी, उसकी आँखें अस्थिर थीं। उनमें एक अजीब सी चमक थी, जैसी एक पागल व्यक्ति की आंखों में होती है. यह साफ था कि अब उसका मस्तिष्क, जो हो रहा था उसे समझ नहीं पा रहा था।

और इतना भयानक था वह चेहरा, एक साथ दृढ़-निश्चय और उन्माद को समेटे हुए, कि एंडरसन ने राहत की सांस ली, जब उन्होंने उसका चेहरा नीचे बर्फ पर झुका दिया और, उन आग उगलती आँखों के बजाय, उसने उसकी चमचमाती नंगी पीठ देखी – एक बेहूदा, शर्मनाक, भयावह दृश्य।

एक विशालकाय, लाल चेहरे वाला सैनिक, जिसने लाल रंग की कैप पहनी हुई थी, उसके पास आया, प्रकटरूप से खुश होते हुए उसके शरीर पर नजर डाली, और फिर स्पष्ट आवाज में चिल्लाया-

अच्छा! ईश्वर के आशीर्वाद से अब शुरू करो!

एंडरसन, कदाचित किसी को नहीं देख रहा था, न सैनिकों को, न आकाश को, न घोड़ों अथवा भीड़ को। उसे ठंडेपन, आतंक अथवा शर्मिंदगी, किसी की भी अनुभूति नहीं हो रही थी। वह हवा में तैरती कोड़े की सरसराहट को अथवा दर्द और विषाद की मर्मान्तक चीख को भी नहीं सुन रहा था। वह केवल उस आदमी के शरीर की नंगी पीठ को कोड़े की मार से सूजते हुए, उस पर बनती-उभरती सफेद और बैंगनी धारियों को देख रहा था। अहिस्ता-आहिस्ता उस नंगी पीठ ने मानव शरीर के रूप को खो दिया। खून रिस रहा था और फुहार छूट रही थी, और खून की धाराएं धवल, पिघलती बर्फ पर आकर ठहर रहीं थी।

एक अजीब सी दहशत ने गेब्रियल एंडरसन की आत्मा को गिरफ्त में लिया जैसे ही उसने उस क्षण के बारे में सोचा जब वह आदमी खड़ा होगा और उन सभी लोगों का सामना करेगा जिन्होंने उसके शरीर को सबके सामने नंगा होते हुए और एक खूनी गूदे में बदलते हुए देखा था। उसने अपनी आँखें बंद कर ली। जब उसने आँखें खोली, उसने चार सैनिकों को यूनिफार्म में और लाल कैप में देखा, वे दूसरे आदमी को बलपूर्वक नीचे बर्फ पर झुका रहे थे, उसकी पीठ को उसी शर्मनाक ढंग से, भयानकता से और बेतुके रूप से नंगा किया गया. - एक दुखांत दृश्य।

फिर तीसरा आया, चौथा, और इस तरह आखिर तक..

और गेब्रियल एंडरसन गीली पिघलती बर्फ पर खड़ा था, अपनी गर्दन ऊपर उठाए, कांपते और हकलाते हुए, हालांकि वह एक शब्द भी नहीं बोल पाया। चिपचिपा- गीला पसीना उसके शरीर से बह रहा था। एक शर्मिंदगी का एहसास उसके पूरे अस्तित्व में व्याप्त हो गया था। यह एक अपमानजनक अनुभूति थी, वहाँ से चुपके से बचकर निकल आना, ताकि वे उसे नहीं पकड़ सकेें, बर्फ पर नहीं गिरा सकेें, उसे नंगा नहीं कर सकें – उसे, गेब्रियल एंडरसन को।

सैनिकों ने इक_ा होकर घेरा बना लिया था, घोड़े हिनहिना रहे थे, कोड़ा हवा में सनसना रहा था, और नंगी, अपमानित मानव देह सूज गयी थी, उधेड़ दी गयी थी, खून के साथ बह रही थी, और सांप की तरह कुंचित हो रही थी. उस दिन बसंत की साफ हवा के झोंकों के साथ गालियों की, जंगली चीखों की वृष्टि गाँव भर में हो रही थीं।

एंडरसन ने टाउन हॉल की सीढिय़ों पर फिर पाँच आदमियों के चेहरे देखे, उन आदमियों के चेहरे जो अपनी शर्मिंदगी झेल चुके थे। उसने तुरंत अपनी नजरें वहां से हटा ली। यह सब देखने के बाद आदमी को मर जाना चाहिए, उसके सोचा।

(3)

वहाँ वे कुल सत्रह थे, पंद्रह सैनिक, एक सहायक कप्तान और एक युवा दाढ़ी-मुंडा अफसर। अफसर आग के सामने विचारों में खोया, लपटों को देख रहा था। सैनिक वैगन में बंदूकों की मरम्मत करने में व्यस्त थे..

उनकी भूरी आकृतियाँ बर्फ से पिघलते मैदान में चुपचाप इधर-उधर चल-फिर रही थी, और कभी-कभार धधकती आग के पास पड़े सुलगते ल_ों के टुकड़ों से अचानक ठोकर खाकर गिर पड़ती थीं।

गेब्रियल एंडरसन, ओवरकोट पहने और पीठ के पीछे छड़ी लटकाए उनके पास गया। सहायक कप्तान, एक मोटा व्यक्ति, जिसके मूंछे थी, ऊपर की ओर उछला, आग से हट कर आगे आया, और उसको अर्थपूर्ण नजऱों से देखा।

कौन हो तुम? तुम क्या चाहते हो?, उसने पूछा। वह उत्तेजित था। उसके लहजे से साफ था कि सैनिक उस जनपद के हर व्यक्ति से डरते थे, जिनके माध्यम से वे मौत, विनाश और अत्याचार का ताण्डव कर रहे थे।

अफसर, उसने कहा, यहाँ एक आदमी है, जिसे मैं नहीं जानता हूँ.

उस अफसर ने बिना कुछ बोले एंडरसन की ओर गौर से देखा।

अफसर, एंडरसन की धीमी आवाज में तनाव था, मेरा नाम मिचेलसन है। मैं एक व्यापारी हूँ, और गाँव में व्यापार के लिए जा रहा हूँ। मुझे डर है कि गलती से मुझे कोई और न समझ लिया जाय – तुम जानते हो।

फिर तुम यहाँ क्या करने आये हो? अफसर ने गुस्से से कहा और चला गया.

एक व्यापारी, एक सैनिक ने उपहासपूर्ण लहजे में कहा, इसकी तलाशी लेनी पड़ेगी, अच्छी तरह से, ताकि वह रात को आवारागर्दी नहीं करता फिरे. जबड़े पर एक जोरदार घूंसे की जरुरत है इसे।

अफसर, यह एक संदेहास्पद व्यक्ति है, सहायक कप्तान के कहा। क्या तुमको नहीं लगता कि उसे गिरफ्तार करना ही ठीक रहेगा, क्या?

नहीं, ऐसा मत करो.. उसने शिथिलता से जवाब दिया, मैं इन लोगों से तंग आ चुका हूँ, लानत है इन पर."

गेब्रियल एंडरसन नि:शब्द वहाँ खड़ा रहा। आग की रौशनी में उसकी आँखें विचित्र प्रकार से चमक रही थीं। रात को, मैदान में उन सैनिकों के बीच, उसकी नाटी, दृढ़, और साफ-सुथरी आकृति, विचित्र लग रही थी, उसका ओवरकोट और छड़ी और चश्मा आग की रोशनी में चमक रहे थे।

सैनिकों ने उसे छोड़ दिया और चले गए। गेब्रियल एंडरसन कुछ देर वहीं खड़ा रहा। फिर वह मुड़ा और चल दिया, और तुरंत ही अंधेरे में ओझल हो गया।

रात बीतने वाली थी। हवा सर्द हो गई थी, और झाडिय़ों के शीर्ष अँधेरे में स्वयं को और अच्छी तरह से निरुपित कर रहे थे। एंडरसन फिर से मिलिट्री पोस्ट पर गया। इस बार गुप्त रूप से, नीचे झुका हुआ, दबे पाँव, वह झाडिय़ों की आड़ में आगे बढ़ रहा था। उसके पीछे लोग चुपचाप और सावधानी से चल रहे थे, झाडिय़ों को झुकाते हुए, परछाइयों की तरह शांत। गेब्रियल के पास ही, उसकी दायीं ओर, एक लम्बे कद का आदमी चल रहा था, उसके हाथ में रिवाल्वर था।

पहाड़ी पर एक सैनिक की आकृति अपने आप को विचित्र तरीके से रेखांकित करती दिखी, अप्रत्याशित रूप से, वहाँ नहीं जहाँ वे तलाश कर रहे थे। बुझती हुई आग की चमक वहाँ हल्का सा प्रकाश फैला रही थी। गेब्रियल एंडरसन ने उस सैनिक को पहचान लिया। वह वही था जिसने उसकी तलाशी लेने का सुझाव दिया था। एंडरसन के हृदय में किसी तरह की हलचल नहीं थी। उसका चेहरा भावशून्य और अविचलित था, उस व्यक्ति की तरह जो नींद में हो. वहाँ, आग के चारों ओर सभी सैनिक आराम से सो रहे थे, सहायक कप्तान को छोड़कर, वह अपना सिर अपने घुटनों पर झुकाए बैठा हुआ था।

एंडरसन के दायें वाले लम्बे कद के आदमी ने रिवाल्वर ऊपर उठाया और ट्रिगर दबा दिया। एक क्षणिक चकाचौंध चमक, एक कानफोडू आवाज।

एंडरसन ने गार्ड को अपने हाथों को ऊपर उठाते हुए और फिर जमीन पर बैठ कर अपनी छाती को दबाते हुए देखा,  सभी दिशाओं से रह-रह कर चटचटाती चिंगारियाँ की चमक कौंध रही थी जो मिलकर एक फटी-सी गूंज पैदा कर रही थी। सहायक कमांडर कूदा और सीधा आग में गिर गया। भूरे सैनिकों की आकृतियाँ सभी दिशाओं में बढ़ रही थीं, प्रेतछायाओं की तरह, अपने हाथों को ऊपर उठाए, काली जमीन पर गिरती-पड़ती और छटपटाती हुईं। युवा अफसर भागता हुआ एंडरसन के पास से गुजरा, अपने हाथों को लहराते हुए, किसी डरे हुए अनोखे पक्षी की तरह। एंडरसन ने, जैसे कि वह कुछ और ही सोच रहा था, अपनी बेंत उठाई। अपनी पूरी ताकत के साथ उसने अफसर के माथे पर वार किया, प्रत्येक प्रहार के साथ एक मंद, बेसुरी आवाज निकल रही थी। अफसर घेरे में चक्कर खाते हुए एक झाड़ी से टकराया, और दूसरे वार के बाद नीचे बैठ गया, अपने सिर को अपने दोनों हाथों से ढंकते हुए, जैसे बच्चे करते हैं। कोई भागता हुआ आया और रिवाल्वर से गोली चला दी, लगा जैसे गोली एंडरसन के अपने हाथ से चली थी। अफसर धीरे-धीरे अपने में धंसता हुआ ढेर हो गया था, और बड़ी मुश्किल से सांस ले रहा था, सिर आगे जमीन तक झुका हुआ। उसकी टाँगे कुछ क्षणों तक हरकत में रहीं, फिर वह धीरे-धीरे कुंचित हो गया। 

गोली चलना बंद हो गयी थी। काली पोशाक में सफेद चेहरे, अँधेरे में भूतहा धूसर लग रहे थे, वे सैनिकों के मृत शरीरों के पास आये और उनके हथियार और गोला बारूद लेकर चले गए।

एंडरसन ने यह सब एक उदासीन और सचेत निगाह से देखा। जब सब समाप्त हो गया, वह  ऊपर गया, सहायक कप्तान की जली हुई टांगों को पकड़ा, और उसके शरीर को आग से बाहर निकालने की कोशिश की, परन्तु उसके लिए वह बहुत भारी था, और उसे वहीं छोड़ दिया।

(4)

एंडरसन टाउन हॉल की सीढिय़ों पर अविचल बैठा हुआ था और सोच रहा था। उसने सोचा कि किस प्रकार उसने, अपने चश्मे, बेंत, ओवरकोट और कविताओं से युक्त गेब्रियल एंडरसन ने,   झूठ बोला था और पंद्रह आदमियों को धोखा दिया था। उसने सोचा वह भयावह था, लेकिन उसके हृदय में किसी प्रकार का दयाभाव, शर्म अथवा पछतावा नहीं था। अगर उसे छोड़ दिया जाता है, तो, वह जानता था कि वह, गेब्रियल एंडरसन, अपने चश्मे, कविताओं से युक्त, सीधा जाएगा और फिर वही करेगा। उसने स्वयं का परीक्षण करना चाहा, यह देखने के लिए कि उसके भीतर क्या चल रहा है। परन्तु उसके विचार भारी और भ्रमित थे। किसी कारणवश उसके लिए उन तीन आदमियों के बारे में विचार करना बहुत ही दर्दनाक था, जो बर्फ पर पड़े हुए, दूर बहुत दूर निस्तेज चन्द्रमा को अपनी मृत, अंधी आँखों से देख रहे थे, बजाय उस मारे हुए अफसर के, जिसके सिर पर उसने दो कठोर, घृणास्पद वार किये थे। अपनी मृत्यु के बारे में उसने नहीं सोचा। उसे ऐसा लगा कि वह सभी से बहुत, बहुत पहले छुटकारा पा चुका था। कोई वस्तु थी जो मर चुकी थी, बाहर निकल चुकी थी और उसे रिक्त कर चुकी थी, और उसके बारे में उसे सोचना भी नहीं चाहिए।

और जब उन्होंने उसे कंधे से पकड़ा और वह खड़ा हुआ, और जब वे तुरंत उसे बगीचे में से होते हुए ले गए, जहाँ कर्मकल्लों ने अपने निर्जल सिर ऊपर उठा रखे थे, वह किसी एक विचार को भी सूत्रबद्ध नहीं कर पाया..

उसे सड़क की ओर ले जाया गया, और रेलिंग पर रखा गया, उसकी पीठ को एक लोहे की बार से टिका कर उसने अपने चश्मे को ठीक किया, हाथों को अपने पीछे रखा, और वह वहाँ खड़ा था, अपने साफ-सुथरे, गठीले शरीर के साथ, उसका माथा हल्का सा एक तरफ झुका हुआ।

आखिरी क्षण में, उसने अपने सामने निगाह डाली और अपने माथे, छाती और पेट पर सधी हुई, राइफल की नलियों को, और भय से पीले चेहरों पर कांपते होठों को देखा. उसने साफ-साफ देखा किस प्रकार एक नली जो जिसके निशाने पर उसकी ललाट थी यकायक गिर गयी थी।

कोई एक विचित्र और अचिंतनीय बात, कि जो अब इस संसार से ताल्लुक नहीं रखती है, जो अब सांसारिक नहीं है, एंडरसन के मस्तिष्क में कौंधी। उसने अपने नाटे शरीर की पूरी ऊँचाई तक स्वयं को सीधा किया, और अपने सिर को सरल-सहज गर्व के साथ पीछे की ओर धकेल दिया। एक विचित्र अव्यक्त निर्मलता, सामथ्र्य और गर्व के भाव ने उसकी आत्मा को भर दिया, और प्रत्येक वस्तु - सूर्य और आकाश और लोग और मैदान और मृत्यु – उसे निरर्थक, सुदूर और व्यर्थ लगी।

गोलियाँ उसकी छाती में, बायीं आँख में और पेट में लगीं, उसके साफ कोट को तलाशती निकल गयी,  जिसके बटन ऊपर तक करीने से लगे हुए थे। उसके चश्मे के टुकड़े-टुकड़े हो गए। उसके मुंह से एक चीख निकली, उसने एक गोल चक्कर लगाया और गिर गया। उसका चेहरा लोहे की बार की ओर था, उसकी बची हुई एक आँख पूरी खुली हुई थी। उसने अपने फैले हाथों से जमीन को खरोंचा, जैसे अपने आप को सहारा दे रहा हो।

वह अफसर, जो हरा पड़ गया था, उसकी ओर भागा, और निर्ममता से रिवाल्वर उसकी गर्दन पर रखकर दो गोलियाँ दागी. एंडरसन जमीन पर विस्तारित हो गया

सैनिक वहाँ से तुरंत चले गए. लेकिन एंडरसन जमीन पर सपाट पड़ा रहा. उसके बाएं हाथ की तर्जनी करीब दस सेकंड तक फड़कती रही।