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Sunday 17 Nov 2019

देश दर देश

प्रसिद्ध लेखिका उर्मिला जैन की हालिया प्रकाशित पुस्तक देश दर देश में उनकी विदेश यात्राओं के रोचक वृत्तांतों को संग्रहित किया गया है। यूं तो सभी यात्राएं बड़ी रोचक-रोमांचक हुआ करती हैं, उन्हें शब्दों में ढालना प्राय: मुश्किल काम हुआ करता है और गैर लेखक के लिए तो लगभग असंभव। किन्तु यात्राएं यदि किसी लेखक की हों तो कमोबेश उसे शब्दों के माध्यम से स्मरण का सहज संयोग प्राप्त हो जाता है। ऐसी ही कुछ यात्राएं हैं जो उर्मिला जैन द्वारा की गयीं और उन्हें उन्होंने संस्मरण रूप में प्रस्तुत किया। इसका लाभ यह हुआ कि इस पुस्तक के पाठक उन स्थलों से रूबरू हो सके जहां जाना या जिन्हें देखना उनके लिए संभव नहीं था, और जिन्होंने उन स्थलों की यात्राएं की भी हैं तो उन्हें अपनी यात्राओं को स्मरण करने का अच्छा और सुखद अनुभव हो सका।

उर्मिला जैन ने लगभग विश्व भ्रमण किया है और कहीं-कहीं तो वे कई बार गई हैं। यही कारण है कि उनके यात्रा वृत्तांतों में दुनिया की जगहों का एक तुलनात्मक अनुभव भी प्राप्त होता है। चूंकि उर्मिला जैन एक लेखिका हैं, इसलिए उनके यात्रा वृत्तांतों में लेखकीय कौशल भी दिखना लाजिमी है। भाषा और शिल्प के स्तर पर भी एक खूबसूरत अभिव्यक्ति दिखती है और इतिहास, भूगोल तथा समाजशास्त्र का भी दर्शन होता है। इन यात्रा वृत्तांतों में केवल स्थानों के सौन्दर्य का चित्रण न हो कर उन स्थानों के इतिहास और उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि और महत्व का भी पता चलता है। उर्मिला जैन ने आल्प्स पर्वत पर स्थित पिज ग्लोरिया रेस्तरां में अपने अनुभवों का जैसा रोचक वर्णन किया है वह अद्भुत है। प्रकृति के एक अनुपम उपहार नार्वे के सम्बन्ध में लिखा गया वृत्तान्त बेहद दिलचस्प है। नार्वे के सम्बन्ध में वे कहती हैं कि इस देश में भ्रमण आँखों के लिए एक उत्सव था। आधी रात के सूरज वाला देश बिन बिगाड़ी प्रकृति वाला है, इसलिए यहाँ की दृश्यावलियाँ विस्मयकारी हैं।

वर्षा की विशुद्ध ओढऩी ओढ़े स्विट्जरलैंड के एक शहर सेंट मोरिज के नयनाभिराम, मोहक और मुग्ध करने वाले स्थलों का वर्णन उन्होंने बड़े इत्मीनान और मनोयोग से किया है। छोटे से देश आस्ट्रिया का आकर्षक वर्णन दिल को छू लेने वाला है। उन्होंने वहां के छोटे-छोटे अनोखे गाँवों, सूर्य किरणों से ढंके मैदानों, बर्फ  से ढंकी चोटियों, ऐतिहासिक स्थलों और कई गिरिजाघरों का बहुत रोचक वर्णन किया है। इन वृत्तांतों में एथेंस की यात्रा का वर्णन बहुत ही दिलचस्प है। ओलंपिया जैसी प्राचीन स्थली के साथ ही वहां के समुद्री तटों का वर्णन भी बहुत ही रोचक है। वहां के नाटकीय दृश्यों, मुग्धकारी इतिहास और ग्राम्य जीवन की सरिता जैसे समुद्रतटीय जीवन की जीवन्तता को उन्होंने बखूबी रेखांकित किया है।

पग-पग पर रचे बसे कला, संस्कृति, सौन्दर्य और रोमांच के शहर वेनिस के रोमांच को उन्होंने शब्दों में इस तरह ढाला है कि समूचा दृश्य सामने साकार हो उठाता है।

जर्मनी के स्टेन अ राइन की यात्रा का वर्णन भी काबिले तारीफ है।  इस जगह की तुलना उन्होंने परीलोक से की है। वहां के संग्रहालयों, रमणीय स्थलों का वर्णन देखते बनता है। वहां की पदयात्रा का वर्णन उन्होंने बहुत कायदे से किया है। वहां के रोमांच का भरपूर लुत्फ उठाया है। लेखिका के अनुसार वैसे तो यूरोप के कई शहरों के चौक या हृदय-स्थल को देखने, घूमने का मौका अक्सर मिलता ही है, पर ब्रसेल्स का द ग्रांड पैलेस सबसे अलग लगा, मानो एक भव्य रंगमंच है। आवागमन के साधन भी इस शहर में बेजोड़ हैं। थोड़ी-थोड़ी देर पर चलने वाले ट्राम, बस अथवा मेट्रो में चले जाएं, जो न तो गंदे होते हैं और न ही भीड़-भाड़ वाले, बस, यात्रा कूपन ले लें, फिर शहर के किसी भी कोने में असीमित बार आएं-जाएं, वहां के लोग भी खुशमिजाज और मिलनसार लगे।

पुस्तक में प्राग, लुगानो, पुर्तगाल, लन्दन, पेरिस, पोलेंड, अन्तारिका, मिस्र, तनजानिया, वेनेज्युएला, कनाडा, लास वेगास, सेनफ्रांसिस्को, न्यूयार्क, सिंगापुर आदि स्थानों की यात्रा का विवरण और अनुभवों का अभिव्यक्तिकरण इतने रोचक ढंग से किया गया है कि पाठक को स्वत: यात्रा का सुख मिलता है। कुल मिला कर देश दर देश लेखिका की यात्राओं का ऐसा दस्तावेज है जो किसी भी पाठक में भ्रमण के प्रति कुतूहल और आकांक्षा पैदा कर सकता है। यह एक तरह से किसी यात्रा की पृष्ठभूमि के लिए रूपरेखा भी साबित हो सकता है और कुछ नहीं तो एक काल्पनिक यात्रा का सुख तो किसी को भी दे ही सकता है, क्योंकि लेखिका पाठक को यात्रा वृत्तांत बताते-बताते, यात्रा के संस्मरण सुनाते-सुनाते लगभग सहयात्री बना लेती हैं। फिर पाठक उनके अनुभवों से खुद को जोड़ता चला जाता है।

संस्मरणात्मक शैली में उर्मिला जैन द्वारा लिखा यात्रावृत्तांत देश दर देश अपनी शैली में बेजोड़ है और हिंदी में लिखे गए यात्रा वृत्तांत, साहित्य में कुछ नया जोड़ता है, क्योंकि इसमें कुछ ऐसे देशों और जगहों के विवरण भी हैं जो हिंदी साहित्य के लिए संभवत: नवीनतनम हैं।