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Tuesday 18 Sep 2018

मदद

(नब्बे के दशक के उत्तराद्र्ध में सोवियत संघ का आर्थिक व सामाजिक तानाबाना टूटने लगा था और अंतत: दशक के अंत तक दुनिया का पहला समाजवादी राष्ट्र अनेक गणतंत्रों में बिखर गया। लेकिन इसके पूर्व ही चीन की समाजवादी क्रांति के नायक माओ त्से-तुंङ  के निधन के तुरन्त बाद ही एशिया के पहले समाजवादी देश में हुआ कुओ-फेंङ  के शासन काल के दौरान पूँजीवादी प्रवृत्तियाँ ज़ोर पकडऩे लगीं थीं, यद्यपि कथित बाज़ार केन्द्रित समाजवादी अर्थव्यवस्था अभी विकासशील अवस्था में थी। प्रस्तुत कहानी तत्कालीन चीनी समाज में समाजवादी मूल्यों के क्षरण तथा पूँजीवादी प्रवृत्तियों के उदय की ओर संकेत मात्र करती है।  -अनु.)

काफी दबाव के बाद तेह शेङ, जो उसके द्वारा बनाई गयी बेहतरीन दीवारों के लिए जाना जाता था, ओल्ड सेविन्थ के चौक की दीवार तामीर करने के लिए तैयार हो गया। उसने अपने औजार उठाए, जेब में शराब की बोतल ठूँसी और चल पड़ा। बेहद बड़े लटकते कोट को एक हाथ से पकड़े हुए वह छप-छप करते हुए जा रहा था।

उसके वहाँ पहुँचने से पहले ही ओल्ड सेविन्थ शराब और मांस खरीदने शहर जा चुका था और घर पर कोई नहीं था। केवल फू कुई मिस्त्री ही गेट के सामने दीवार की नींव डाल रहा था। आधा काम वह पहले पूरा कर चुका था और अब तेह शेङ को बस दीवार ही बनानी बाक़ी थी। इसके बाद उसे पलस्तर करना था और टाइल्स लगानी थीं।

तेह शेङ और फू कुई एक-दूसरे के अच्छे साझेदार थे। तेह शेङ, जो साँवला और छोटे क़द का, मगर लंबी टाँगों और अस्त-व्यस्त बालों वाला था, रूखा इंसान दिखाई देता था। मगर जब वह दीवारों को तामीर कर रहा होता था तो उनके एक-एक छेद को बंद कर देता था। यहाँ तक कि तब भी, जब वे अखरोट से ज़्यादा बड़े नहीं होते थे, और उसके बाद सख़्त हाथों से उन्हें एकसार कर देता था। कोई भी उस पर काम में कोताही बरतने का इल्ज़ाम नहीं लगा सकता था। दूसरी ओर, फू कुई लंबा-तडंग़ा, मृदुभाषी और साफ़  रंग-रूप लिए हुए था। वह ख़ुशमिजाज़ था और लोगों के संग जल्द ही घुल मिल जाता था, ठीक हाथ में पकड़े उस तौलिये की मानिन्द, जिससे वह दीवार के किसी भी खुरदुरे पैबन्द को चिकना बनाने के काम में लेता था। पिछले दस से ज़्यादा बरसों से वह तेह शेङ के साथ काम करने से डरता रहा था, मगर उनका काम ही उन्हें साथ ला देता था। आखिर, एक मिस्त्री और दीवार तामीर करने वाला कैसे अलग-अलग रह सकते थे ?

फि़लहाल, फू कुई नींव डालता रहा। पीछे पड़े पत्थरों की ओर इशारा करते हुए उसने कहा-  अरे सुनो, मुझे कुछ पत्थर पकड़ा दो!

ये पत्थर पिछली रात ओल्ड सेविन्थ द्वारा इक_ा किए गये थे। मुँह में तंबाकू का पाइप लगाए हुए तेह शेङ  ने उन्हें पकड़ाना शुरू किया। ऐसा करते हुए उसकी भौंहों में बल पड़ गये। उसने मुँह से पाइप खींचा और एक गाड़ी पर इसे ठकठकाने लगा। ज़बान पर आए शब्दों को निगलते हुए उसने नफरत से थूका और कुछ पत्थर एक ओर डाल दिये। फू कुई इस बीच अपने काम में जुटा रहा। अपने अनुभवी हाथों से उसने अलग-अलग आकारों के पत्थर वहाँ रखे, दरारों को सीमेंट से भरा और उसके बाद सतह को एकसार करते हुए थोड़ी-थोड़ी देर बाद तेह शेङ को संबोधित करने लगा- मुझे वो आयताकार पत्थर पकड़ा दो न!

वो चौकोर वाला।

मगर इस बार उसने पाया कि पत्थर उसे नहीं पकड़ाए जा रहे हैं। वह उठा तो देखा कि तेह शेङ पाइप से धुआँ उड़ाता उकड़ूँ बैठा है।

ये क्या धुआँ उड़ाने का वक़्त है? उसने पूछा।

जवाब में उसने पाइप ठकठकाया: 'पत्थर नहीं बचे हैं अब।

पीछे पड़े पत्थरों के ढेर की तरफ इशारा करते हुए फू कुई बोला, क्या तुमने उन्हें बच्चे पैदा करने के लिए वहाँ छोड़ दिया है?

तेह शेङ  पत्थरों पर बैठ जाने के लिए उछला। ये? इन्हें तुम काम में नहीं ले सकते।

क्यों नहीं?

ये पत्थर उत्पादन ब्रिगेड के हैं। ओल्ड सेविन्थ ने इन्हें हमारे खेतों की बाड़ से चुराया है।

ओह!  फू कुई बोला, क्या तुम इतने चुस्त हो कि खरगोश की तरह पहाड़ के पार भी सूँघ सकते हो? क्या तुम इन पत्थरों के मुँह से कहला सकते हो कि उनमें से कौन-कौन से खेतों की बाड़ से लाए गये हैं और कौन से नदी की तलहटी से?

पत्थर पर पाइप को ज़ोर से ठोकते हुए तेह शेङ  ने उसे घूरा।

अपनी आँखों का इस्तेमाल करो, भाई। यहाँ देखो!

सारे पत्थर एक तरफ़  से काले और दूसरी तरफ से सफेद थे। उन पर एक ओर मॉस(एक तरह की घास)उगी थी जबकि दूसरी तरफ़ मिट्टी चिपकी थी।

ओह हाँ। फू कुई ने आश्चर्य से आँखें झपकाईं। ताज़्ज़ुब नहीं कि लोग सही कहते हैं कि तुम चींटियों के पैरों के निशानों का भी पता लगा सकते हो!

अचानक चुप्पी छा गयी। उसे तोडऩे के वास्ते फू कुई ने तेह शेङ  से आराम करने और बैठ जाने के लिए कहा। बैठने की आदत न होने के कारण तेह शेङ  पेड़ के एक ठूँठ के सहारे टिक गया।

देखो, यह ओल्ड सेविन्थ की आज की हमेशा की तरह की दावत।

फू कुई ने मैदान से एक बोतल उठाई। आओ, तरोताज़ा होने के लिए इसे पिओ।

तेह शेङ ने जेब से अपनी बोतल निकाल ली। इसमें थोड़ी सी ख़ुद की तैयार की हुई तेंदू की शराब थी जिसे वह तरोताज़ा होने के लिए पास रखता था। उसने बोतल खोली, सिर पीछे झुकाया और घूँट भर लिया। उसका चेहरा फौरन ही लाल हो गया।

मुझे घर में तैयार की गयी शराब की आदत है, उसने कहा।

बड़े जि़द्दी किस्म के इंसान हो तुम! हम यहाँ दीवार बनाने के लिए बैठे हैं, न कि शराब की भीख माँगने के लिए। फू कुई ने बोतल को तिरछा किया और झागदार शराब का एक और घूँट भर लिया।

तेह शेङ ने फुफकारते हुए उसे तिरस्कार की निगाह से देखा। एक क्षण के बाद वह रुखाई दिखाते हुए बोला- अगर यह सब सिर्फ़  शराब के लिए ही होता, तो मैं तब भी यहाँ नहीं आता, भले ही उसने मुझे लाने के लिए आठ लोगों द्वारा ढोई जाने वाली पालकी ही क्यों न भेजी होती।

बेशक हम यहाँ शराब के लिए नहीं आए हैं। तेह शेङ की सख़्त निगाहों का सामना करते फू कुई ने हाथ के पिछवाड़े से अपना मुँह पौंछा। ठीक है, कारीगरों को तो हमेशा से ही याद किया जाता रहा है। पड़ौसियों को एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए।

क्या ओल्ड सेविन्थ को वाकई मदद की ज़रूरत है? आश्चर्य करते हुए तेह शेङ ने ओल्ड सेविन्थ के आवासीय क्वार्टर पर निगाह डाली- टाइल की छत और ईंटों की दीवारों से बना घर जिसमें चार कमरे थे। उसके सामने सूअरबाड़ा, भेड़ों के रहने की जगह, पाखाना और लकड़ी का बना शेड थे। बाक़ी चौक में लहसुन बोई गयी थी। इसके बाहर उसकी निजी ज़मीन थी, जो पिछले बरस आलू की फसल कटने के बाद से परती पड़ी थी।

फिलहाल ओल्ड सेविन्थ इस दीवार को क्यों बनवाना चाहता है? तेह शेङ ने पूछा।

उसने इतने ज़्यादा चूजों और बत्तखों को पैदा कर लिया है कि अब उसे अपनी निजी ज़मीन पर हो रही फसल को उनसे बर्बाद होने से बचाने के लिए एक दीवार की ज़रूरत है।

हम्म्म, तेह-शेङ  सोचने लगा- यह ज़मीन तो कभी ब्रिगेड के खेतों में से एक हुआ करती थी। ओल्ड सेविन्थ ने सोचा कि क्यों न उसे अपनी निजी ज़मीन के साथ ही मिला लिया जाए। और जब ब्रिगेड ने मना कर दिया तो उसने अपने चूजों को फसल बर्बाद करने के लिए यहाँ छोड़ दिया। आखिरकार ब्रिगेड उसकी बात मान गया। अब वह चाहता है कि उसकी अपनी फसल की अच्छी तरह से देखभाल की जाए।

ओल्ड सेविन्थ हड़पने वाला है! वह गुर्राया, जो कुछ भी सामूहिक भूमि से हड़पा जा सकता है, वह हड़प लेता है।

ठीक है तुम्हारी बात, फू कुई सहमत होते हुए बोला, मगर कोई बात नहीं। कारीगर के रूप में हमारा काम सिर्फ़  दीवार तामीर करना है। यहाँ तक कि अगर हमें इसका पैसा नहीं भी दिया जाता है, तो भी बढिय़ा खाना तो मिलेगा ही।

'तुम्हारा मतलब है कि हमें चालाक बन जाना चाहिए, न कि कारीगर! नफऱत से तेह शेङ ने कहा।

बोतल से घूँट निगलते हुए फू कुई का चेहरा लाल हो गया।

तेह शेङ खड़ा हो गया। उसने लकड़ी के तख्तों को जगह पर जमाया, उनके बीच सीमेंट भरा और उसे पीट कर एकसार करने लगा।  फू कुई ने अभी पाइप जलाया ही था, मगर कुछ ही कश लेने के बाद उसने उसे बुझा दिया। वह घर के कोने में लगे ढेर से कुछ पत्थर उठा लाया और फिर से नींव भरने लगा।'तुम हमेशा ही हड़बड़ी में रहते हो, उसने शिकायत की, जब तक मैं पाइप ख़त्म न कर लूँ, तब तक इंतज़ार मत करो।

तेह शेङ ने अपनी रुई के अस्तर लगी जाकेट उतारी और बाँहें ऊपर चढ़ा लीं, और फिर बीस कैटीज़ ़(वजऩ का एक माप) के वजऩ वाली मिस्तर से सीमेंट एकसार करने लगा। हर झटके के साथ उसके हट्टे-कट्टे कंधे फूल उठते। उसे देखते हुए फू कुई को उसकी ताक़त से ईष्र्या होने लगी और उसने इस तरीके से उसे सराहा जैसे कि उसके आगे वह एकदम पराजित हो चुका हो। इस बात पर वह उसकी तारीफ़  करने ही वाला था कि तेह शेङ ने अचानक काम करना बंद कर दिया, मिस्तर ज़मीन पर फेंक दिया और नीचे उतर आया। हाथ पीछे बाँधे हुए पहले उसने ओल्ड सेविन्थ के चौक और फिर उसकी निजी ज़मीन का चक्कर लगाया। यह सब हो चुकने के बाद वह नीचे बैठ कर एक टूटी हुई टाइल से ज़मीन पर कुछ हिसाब लगाने लगा। फिर, अचानक ही उछल कर मिस्तर की हुई दीवार की ओर दौड़ा और कंधे से धक्का मार कर उसे गिरा दिया। दीवार ढह गयी।

नींव को उखाड़ दो! फू कुई पर चिल्लाते हुए वह घूमा।

क्यों? पागल हो गये हो क्या?

नहीं, यह तो तुम ही हो जिसके दिमाग़ में गोबर भरा है। तेह शेङ ने जवाब दिया। तुमने कहाँ नींव रखी है? निजी ज़मीन का एक-तिहाई हिस्सा तो तुमने अंदर ले लिया है।

ओल्ड सेविन्थ ने ही इस जगह की निशानदेही की है। आखिर यह उसी की तो ज़मीन है।

उसकी? गुस्से से तेह शेङ  उत्तेजित हो गया। निजी ज़मीन ब्रिगेड की संपत्ति है। उसे इसे जोतने का तो हक़ है, लेकिन वह इसका मालिक नहीं है। अगर दीवार बनाई जाती है तो अंदर की सारी ज़मीन उसी की मानी जाएगी।

किसी तरह के पचड़े में न पड़ते हुए फू कुई डरपोक की मानिन्द चल दिया और बैठते हुए बोला- ठीक है, मगर तुम मुझ पर क्यों नाराज़ हो रहे हो?

मैं अब जान गया हूँ कि क्यों उसने मुझ पर अपनी निजी ज़मीन पर तामीरी करने पर ज़ोर दिया था।

तुमने उसे ठीक ही परखा है। मगर, मैं तुमसे एक बात कहना चाहूंगा।

क्या?

मेरा खय़ाल है कि मैं तुमसे कह ही दूँ, लेकिन मुझे डर है कि कहीं तुम भड़क न उठो।

बताओ तो सही।

वायदा करो कि तुम अपना आपा खो नहीं दोगे?

भगवान के वास्ते बताओ तो सही, क्या बात है?

सही कहूँ तो मैं उस वक़्त यहाँ था जब ओल्ड सेविन्थ ने इस जगह की निशानदेही की थी। उसने मुझसे कहा था कि वह ज़मीन के इस हिस्से को चारों तरफ़ से बंद कर रहा है ताकि इसे वह बीस-तीस साल अपने पास रख सके, क्योंकि ब्रिगेड कम्यून के किसी सदस्य के चौक की ज़मीन नहीं ले सकती। इस तरह, वह यहाँ जो चाहे उगा सकेगा। उसने मुझसे किसी को भी इसके बारे में कुछ भी कहने से मना किया है।

तेह शेङ गुस्से से काँपने लगा। यह नहीं चलेगा, फैसलाकुन अंदाज़ में वह बोला, यह पूँजीवादी तरीका है ! यह सामूहिक हितों के खि़लाफ है।

फू कुई ने चारों तरफ़  निगाह दौड़ा कर देखा कि कहीं आसपास कोई है तो नहीं। फिर बोला- मुझे यही डर था कि तुम ज़रूर भड़क उठोगे, और यही हुआ!

मैं इसमें क्या कर सकता हूँ? अगर हर कोई तुम्हारे जैसा हो जाए, तो समाजवाद तो नहीं बचेगा। तेह शेङ उस खंभे को लात मारने के लिए कूदा जिसे फू कुई ने नींव की निशानदेही के लिए धागे से बाँधा हुआ था। उसने ज़ोर से उसे ठोकर मारी, मगर खंभा टूट नहीं पाया। कई बार उसने इसे ठोकर मारी, मगर खंभे का कुछ भी नहीं बिगड़ा। गुस्से में पागल होकर उसने एक बड़ा सा पत्थर उठाया और खंभे के तीन टुकड़े कर दिए। फिर, अपनी लंबूतरी टाँगों से उसने नींव को ठोकर मारी। इससे फू कुई बेहद उत्तेजित हो गया। वह चिल्लाया: 'तुमने मुझसे मेरी शराब छीन ली!

तुमसे शराब छीन ली? तेह शेङ गरजा, अरे, मैंने तो ब्रिगेड का भला ही किया है!

उसे रोकने में नाकाम होने पर फू कुई उठ कर चल दिया और ख़ुशामद करता हुआ बोला- दोस्त मेरे, मैं जानता हूँ कि ओल्ड सेविन्थ ग़लत काम कर रहा है, मगर वह हमारे लिए शराब और मांस खरीदने गया हुआ है। हम उसे कैसे निराश कर सकते हैं? हम तो उसकी मदद करने ही आए थे।

मदद करने? सबसे पहले तो हमें उसे साफ़  ढंग से सोचने में मदद करनी चाहिए! कम्यून के सदस्यों की हैसियत से कैसे हम नाकारा बन खड़े देखते रह सकते हैं जबकि कोई कम्यून की जड़ खोदने पर ही तुला हो। तेह शेङ ने फू कुई की ओर एक गैंती उछाल दी।

जल्द ही वे दीवार उठाने के लिए एक नया आसार खोद चुके थे। फू कुई ने दोबारा नींव रखी जबकि तेह शेङ ने दोबारा सीमेंट जमाई। वह अपनी सारी ताक़त भर इच्छाशक्ति के साथ एकसार करने में लगा रहा। और जैसे ही थकान घेरती, कुछ घूँट पीने के लिए वह अपनी बोतल निकाल लेता।

फू कुई, जो अभी भी उदासी में डूबा था, बुदबुदाया: ओल्ड सेविन्थ के लौटने पर मैं उससे क्या कहूँगा ? वह ज़रुर मुझ पर चिल्लाएगा।

फि़क्र मत करो भाई! तेह-शेङ  ने अपना मिस्तर नीचे रखा। हम समूह के नेता को सब कुछ बता देंगे और कहेंगे कि इस मसले पर बात करने के लिए शाम को ही एक मीटिंग बुलाए। कम्यून के सदस्य ही तय करेंगे कि कौन ग़लती पर है। यदि ग़लती ओल्ड सेविन्थ की है, तो उसे ख़ुद की आलोचना करनी चाहिए। और यदि ग़लती तुम्हारी है, तो तुम्हें अपनी आलोचना करनी होगी। यह सुन कर फू कुई भौंचक्का रह गया जैसे कि मिस्तर उसके दिल पर आ गिरा हो।