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Friday 17 Aug 2018

गज़ल

                          1.

सर  झुकाने की कला,  किसने कहा, आसान है

सर  उठाने  की कला,  किसने कहा, आसान है

 

पेट की ख़ातिर  जमूरे ने जो  सीखी रात-दिन

नाच-गाने  की कला,  किसने कहा, आसान है

 

हँस रहे  बुद्ध की छोड़ो,  बात अपनी तुम करो

मुस्कुराने  की कला,  किसने कहा,  आसान है

 

याद में  जि़ंदा  बनी  रहती हैं  सारी तल्खिय़ाँ

भूल  जाने की कला,  किसने कहा,  आसान है

 

राह  चलते  लोग  भी  आए  हुए हैं  बज़्म में

कुछ सुनाने की कला,  किसने कहा, आसान है

 

दोस्तों  को  आज़माने  तुम चले तो हो, सुनो

आज़माने  की कला,  किसने कहा,  आसान है

 

आदमी  बनकर  ही  रहने में  हज़ारों मुश्किलेें

मोक्ष पाने  की कला,  किसने कहा,  आसान है

                 2.

बर्फ़  हो जाना  किसी  तपते  हुए  एहसास का

क्या करूँ मैं  ख़ुद से ही  उठते हुए विश्वास का

 

आँधियों से लड़ के गिरते पेड़ को मेरा सलाम

मैं कहाँ क़ायल हुआ हूँ,  सर झुकाती घास का

 

घर मेरे अक्सर लगा रहता है चिडिय़ों का हुजूम

है  मेरा उनसे कोई  रिश्ता बहुत  ही पास का

नाउमीदी है बड़ी शातिर कि आ ही जाएगी

एक हम रोशन किए बैठे हैं दीपक आस का

 

देखकर ये आसमाँ को भी बड़ी हैरत हुई

पढ़ कहाँ पाया समन्दर ज़र्द चेहरा प्यास का

                 

                         3.

 हिरण सोने के  सबकी  आँख में हरदम मचलते हैं

ये हसरत के घने जंगल हैं,  जिनमें हम भटकते हैं

 

अजब-सी एक बेचैनी लिए हरदम निगाहों में

सड़क पर भीड़ में तनहा हज़ारों जिस्म चलते हैं

 

नजऱ बाज़ार की  ऐसी मेरे घर को लगी यारो

यहाँ ख़्वाहिश के क़तरे अब समन्दर बन उछलते हैं

 

हुई हर आँख पत्थर की, न हँसती है, न रोती है

नजऱ के सामने यूँ तो कई मंजऱ बदलते हैं

 

कहें क्या दोष  किसका है, फज़ा में ही खऱाबी है

शहर में चींटियों के पर जऱा जल्दी निकलते हैं                                                        

                      

                            4.

छोड़  बातें  खुदकुशी  की, जि़न्दगी की बात कर

तीरगी में जो  छिपी,  उस रोशनी की बात कर

 

जो हमारे  दरमियाँ थे,  खुश्क सब दरिया हुए

आँंख में थोड़ी बची जो, उस नमी की बात कर

 

हर कोई सजने-सँवरने में  लगा है, दोस्तो

कैसे कह दूँ आइने  से, सादगी की बात कर

 

सागरों  के क़द्रदाँ  मिल जाएँगे  हर मोड़ पर

है अगर हिम्मत, किसी सूखी नदी की बात कर