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Wednesday 20 Jun 2018

वेंका अन्तोन चेखव

आठ साल का वेंका जुकोव, जो तीन महीने से जूते बनाने वाले एलियाखिन के यहाँ अपरेंटिस था, क्रिसमस की पिछली रात को नहीं सोया। उसने अपने मालिक की अलमारी से स्याही की शीशी और जंग लगी निब वाली कलम निकालने के लिए मालिक, मालकिन और घर के अन्य लोगों के सुबह जल्दी सर्विस के लिए चर्च जाने तक इन्तजार किया। फिर कागज़ की मुड़ी-तुड़ी शीट को अपने सामने फैलाकर, वह लिखने लगा।

पहला पत्र लिखने का फैसला लेने से पहले, उसने चोरी से दरवाजे की ओर और खिड़की की ओर देखा, कई बार उस मलिन तस्वीर पर निगाह डाली, जिसके दोनों तरफ  की ताकें जूते बनाने के फर्मों से अटी हुई थीं, और एक दर्द भरी आह भरी। कागज़ की शीट बेंच पर फैली हुई थी, और वो खुद उसके सामने घुटनों के बल बैठा हुआ था।

प्रिय दादाजी कोस्तांतिन मकारिच, उसने लिखा, मैं आपको एक पत्र लिख रहा हूँ। मैं आपको क्रिसमस की शुभकामनाएँ देता हूँ और आपके लिए भगवान् से सबसे अच्छी और पवित्र दुआएं मांगता हूँ। मेरे माता-पिता नहीं हैं, आप ही मेरे सब कुछ हैं।

वेंका ने खिड़की की तरफ  देखा, जिसमें उसकी मोमबत्ती की परछाई झलक रही थी और उसने अपने दादा कोस्तांतिन मकारिच को अपने सामने एकदम साफ-साफ चित्रित किया, जो मेसर्स जिवारेव के यहाँ चौकीदार थे। पैंसठ साल के, छोटा कद, पतले-दुबले, बेहद  जिंदादिल, हंसमुख, मुस्तैद इंसान और धुंधली आँखों वाले, दिनभर वे नौकरों के रसोईघर में सोये रहते या रसोईयों के साथ बेकार की बातों में उलझे रहते। रात को, वे भेड़ की खाल का लंबा कोट पहने, हाथ में लाठी लिए, उससे ठक-ठक करते हुए अपनी हद में चारों तरफ चक्कर लगाते रहते। उनके पीछे दोनों गर्दन लटका चलते, बूढ़ी कुतिया कश्तंका और कुत्ता वियुन, काला रंग, लम्बा शरीर और लोच मछली जैसा होने के कारण उसे यह नाम दिया गया था। वियुन असाधारण रूप से सभ्य और मित्रवत कुत्ता था अपने मालिक तथा अजनबी दोनों को दयाभाव से देखता था, लेकिन वह भरोसे लायक नहीं था। उसकी इस इज्जत और नम्रता के पीछे छुपी थी उसकी अत्यंत खोजी दुष्ट प्रवृत्ति, उससे बेहतर कोई नहीं जानता था कि कैसे चुपके से आकर पाँव पर काटा जाए, या गोश्त वाले कमरे में छुपकर जाया जाय, या मुजिक की मुर्गी को चुराया जाए। उन लोगों ने दो-एक बार उसकी पिछली टाँगे करीब-करीब तोड़ ही डाली थी और दो बार उसको लटका दिया था। हर सप्ताह उसे पीट-पीट कर अधमरा कर दिया जाता था, परन्तु वह हमेशा जल्दी ही ठीक हो जाता।

इस समय, निश्चित रूप से, वेंका के दादा दरवाजे पर खड़े होंगे। गाँव की चर्च की लाल चमकीली खिड़कियों को पलक झपकाते देखते हुए, अपने पैरों को ऊँचे बूट में धंसाते हुए, यार्ड में लोगों से हँसी-ठ_ा करते हुए, उनकी लाठी उनके बेल्ट से लटकी हुई होगी, वे ठण्ड को झप्पी दे रहे होंगे। बूढ़े आदमी की हल्की सूखी खांसी करते हुए, कभी-कभी किसी नौकरानी अथवा किसी रसोइए की चिकोटी काटते हुए।

क्या हम थोड़ी सी सुंघनी लें, वे पूछते हैं सुंघनी बॉक्स को औरतों की ओर बढ़ाते हुए, औरतें चुटकी भर सुंघनी लेती हैं और छींकती हैं। वे अति उत्साहित होते है, जोर से हँसते हैं, है और लगभग चिल्लाते हैं- इसे निकाल फेेंको, इससे तुम्हारी नाक जकड़ जायेगी। वे अपनी सुंघनी कुत्तों को भी देते हैं, कश्तंका छींकती है अपनी नाक झटकती है नाराज होकर चली जाती है। वियुन लिहाज के साथ सूंघने से मना कर देता है और अपनी पूंछ हिलाता है। मौसम बहुत खुशनुमा है, साफ और ठंडा, हवा का नामोनिशान नहीं, यह एक अँधेरी रात है, परन्तु सारा गाँव, इसकी सफेद छतें और चिमनी से उठती धुंए की लकीरें, पाले की चांदी से नहाए पेड़, बर्फ  के छोटे-छोटे टीले, आप इन सब को देख सकते हैं। आकाश में उजले, चमकदार तारे झिलमिला रहे हैं, आकाशगंगा इस कदर साफ-साफ है कि लगता है छुट्टियों के लिए इसे चमकाकर इस पर बर्फ मल दी है।

वेंका आह भरता है, स्याही में कलम डुबोता है और लिखना जारी रखता है।

पिछली रात मेरी पिटाई हुई, मालिक मुझे बालों से खींच कर यार्ड में लाया और मुझे जूता बनाने वाली रकाब से पीटा, क्योंकि उसके बच्चे को पालने में झुलाते-झुलाते बदकिस्मती से मुझे नींद आ गई थी और इसी हफ्ते मालकिन ने मुझे हेरिंग (एक प्रकार की मछली) साफ करने को कहा और मैंने इसकी शुरुआत पूंछ से की, इसलिए उसने हेरिंग को उठाकर, उसका थूथन मेरे मुंह पर दे मारा। घर के नौकर मुझे परेशान करते हैं, वोदका लेने के लिए बाहर दुकान पर भेजते हैं, मुझ से मालिक के कुकुम्बर चोरी करवाते हैं और मालिक जो भी उसके हाथ आये, उससे पीटता है। खाने के लिए कुछ नहीं। सुबह ब्रेड और डिनर के लिए दलिया और ब्रेड। चाय और गोबी का सूप तो मालिक और मालकिन दोनों मिलकर गटक जाते हैं। वे मुझे बरसाती में सुलाते हैं और जब उनका बच्चा रोता है, मैं बिलकुल नहीं सो पाता, क्योंकि तब मुझे झूला झुलाना होता है। प्यारे दादाजी, भगवान् के वास्ते मुझे यहाँ से ले चलो, हमारे गाँव,  मैं और ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पाउँगा। मैं आपके आगे सिर झुकाता हूँ, मैं भगवान् से हमेशा-हमेशा प्रार्थना करूँगा, मुझे यहाँ से ले चलो, मैं मर जाऊँगा।

वेंका के मुंह के कोने नीचे की ओर हो गए, उसने अपनी गंदी मु_ी से अपनी आँखों को रगड़ा, और सिसक-सिसक कर रो पड़ा।

मैं आपके लिए तम्बाकू रगड़ कर तैयार करूंगा, उसका लिखना जारी रहा, मैं आपके लिए भगवान् से प्रार्थना करूंगा और अगर कुछ गलत हो जाए तो आप मुझे भूरे बकरे की तरह बेंत से मारना और अगर आपको वास्तव में लगता है कि मैं कोई काम नहीं ढूंढ पाउँगा, तो मैं मैनेजर से कहूंगा, भगवान् के लिए मुझे बूट साफ करने दे या इसके बजाय मैं फेदया के पास गड़ेरियों के मातहत काम कर लूंगा। प्यारे दादाजी, अब मैं और अधिक सहन नहीं कर सकता हूँ। ऐसी हालात में मैं मर जाऊंगा। मैं हमारे गाँव भाग जाना चाहता था, पर मेरे पास बूट नहीं हैं और मुझे पाले से डर लगता है। जब मैं बड़ा हो जाऊंगा तो आपका पूरा खयाल रखूंगा, कोई भी आपको चोट नहीं पहुंचाएगा और जब आप मरोगे, मैं आपकी आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना करूंगा, जिस तरह मैं अपनी माँ पेलागुएया के लिए करता हूँ।

मास्को बहुत बड़ा शहर है। यहाँ पर सज्जनों के बड़े-बड़े मकान हैं, बहुत सारे घोड़े हैं, भेड़ें नहीं हैं और यहाँ के कुत्ते शातिर नहीं हैं। यहाँ बच्चे क्रिसमस पर स्टार लेकर बाहर नहीं निकलते। किसी को भी गायक-मण्डली के साथ गाने की इजाजत नहीं है और एक बार मैंने दूकान की खिड़की में देखा, एक कतार में  हुक और मछलियाँ पकडऩे के डंडे, सभी बेचने के लिए और सभी तरह की मछलियों के लिए। बाप रे! सब कुछ इतना आसान। और वहाँ एक ऐसा हुक भी था जो शीट फिश जैसी एक पौंड की मछली को भी पकड़ सकता था और वहाँ दुकानों पर बंदूकें हैं। मेरे मालिक की बन्दूक जैसी। और मुझे यकीन है कि एक बन्दूक की कीमत 100 रूबल होगी। और मीट की दुकान पर वुडकॉक, तीतर और खरगोश का मांस है, परन्तु उन्हें किसने मारा या वे यहाँ कहां से आये, दुकानदार नहीं बताएगा।

प्यारे दादाजी जब मालिक क्रिसमस ट्री दें, आप सुनहरा अखरोट लेना और मेरे हरे बक्से में छिपा देना। इसके लिए आप उस युवती, ओल्गा इग्नातियेवना से पूछ लेना, कहना यह वेंका के लिए है।

वेंका रह-रह कर रोता-सुबकता रहा और उसने वापस खिड़की पर नजरें गड़ार्इं। उसे याद आया, उसके दादाजी क्रिसमस ट्री के लिए हमेशा जंगल जाते थे और वे अपने पोते को साथ लेते थे। कितने अच्छे दिन थे! जब बर्फ के छोटे क्रिस्टल चटचटाते थे, दादा भी चटचटाते थे, जब दोनों चटचटाते थे, तब वेंका भी चटचटाता था। क्रिसमस ट्री काटने से पहले दादा सिगार पीते। एक बड़ी चुटकी सुंघनी लेते और बर्फ  से अकड़े  छोटे से वेंका का मजाक उड़ाते। देवदार के छोटे पेड़, पाले से ढंके हुए, सहमे खड़े रहते, इंतजार करते हुए कि उनमें से पहले कौन दम तोड़ेगा। अचानक कहीं से एक खरगोश उछलकर बर्फ  के ढेर पर छलांग लगाता। उसके दादाए चिल्लाये बिना नहीं रह सकते थे।                            

पकड़ो इसे, पकड़ो! आह, छोटी पूंछ वाला शैतान!

जब पेड़ टूट कर गिर जाता, उसके दादा उसे खींचते हुए मालिक के मकान पर ले आते और वहाँ वे उसे सजाने के लिए टूट पड़ते। युवती ओल्गा इग्नातियेवना, वेंका की अजीज दोस्त इस समय सबसे ज्यादा व्यस्त रहती। जब छोटे वेंका की माँ पेलागुएया भी जिंदा थी और वह इस मकान में नौकरानी थी, ओल्गा इग्नातियेवना उसे ढेर सारी मीठी कैंडी दिया करती थी। और जब कुछ नहीं करना होता, तब उसे एक से सौ तक लिखना, गिनना सिखाती और यहाँ तक कि क्वाड्रिल नाच भी। जब पेलागुएया मर गयी, उन्होंने अनाथ वेंका को रसोईघर में उसके दादा के पास रख दिया और रसोईघर से उसे जूते बनाने वाले एलियाखिन के पास मास्को भेज दिया।

जल्दी आओ, प्यारे दादाजी, वेंका का लिखना जारी रहा, मैं आपसे बिनती करता हूँ, क्राइस्ट के खातिर मुझे यहाँ से ले चलो। गरीब अनाथ पर दया करो, यहाँ वे मुझे मारते-पीटते हैं। मैं बहुत भूखा हूँ और इतना दुखी हूँ कि मैं आपको बता नहीं सकता हूँ। मैं हर समय रोता रहता हूँ। अभी पिछले दिनों मालिक ने लास्ट (जूते बनाने का फरमा) से मेरे माथे पर मारा, मैं जमीन पर गिर पड़ा और बस अभी-अभी ठीक हुआ हूँ। मैं अभागा हूँ, मेरी जिंदगी किसी कुत्ते से भी बदतर है। एलीओना, एक आँख वाले टेगोर और कोचवान को मेरी शुभकामनाएँ और मेरे माउथ ऑर्गन को किसी को हाथ मत लगाने देना। मैं, आपका पोता, इवान जुकोव। मेरे प्यारे दादाजी, जरूर आना।

वेंका ने कागज़ की शीट को दो बार तह किया और उसे लिफाफे में डाला, जिसे उसने पिछली रात ही एक कोपेक में खरीदा था। उसने कुछ सोचा, कलम को स्याही में डुबोया और पता  लिखा-

मेरा गाँव, मेरे दादा को.. उसने अपना सिर खुजलाया, दुबारा सोचा और जोड़ा- कोस्तांतिन  मकारिच। खुश हुआ कि किसी ने उसके लिखते समय दखल नहीं दिया। उसने सिर पर टोपी रखी और भेड़ की खाल वाला कोट पहने बिना ही, आस्तीन वाली कमीज में ही गली की ओर भाग गया।

मुर्गा बेचने वाले की दूकान से पिछली रात ही उसने मालूम कर लिया था। उसने बताया कि चि_ियों को पोस्टबॉक्स में डाला जाता है और वहाँ से उन्हें डाक घोड़ागाड़ी से शराबी डाकियों और घंटियों की आवाज से जगह-जगह पहुँचाया जाता है। वेंका नजदीक के पोस्टबॉक्स की ओर भागा और अपनी बेहद कीमती चि_ी को उसमें डाल दिया।

एक घंटे के बाद, आशा की थपकियों से उसे गहरी नींद आ गई थी। उसने अपने सपनों में एक अंगीठी देखी। अंगीठी के पास ही उसके दादा बैठे थे। टाँगे नीचे लटकाए हुए, नंगे पैर और रसोइयों को चि_ी पढ़कर सुना रहे थे और वियुन अपनी पूंछ हिलाता, अंगीठी के पास घूम रहा था।