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Tuesday 21 Nov 2017

नोटों का खुला अधिवेशन

नोटों के खुले अधिवेशन में मुख्य अतिथि की तलाश में बेचारा एक सौ का नोट भटकता रहा, मोची जी के पास गया तो मोची जी ने कह दिया - अभी जूता चप्पल की रिपेयरिंग में व्यस्त हूं फिर जूते चप्पल के व्यवसाय संबंधी काम से चीन जाना है। सीधा मना कर दिया। फिर बेचारा एक सौ का नोट मौनी बाबा के पास मुख्य अतिथि बनने का निवेदन लेकर पहुंचा, मौनी बाबा ने अपने को बचाते हुए चप्पू की मम्मी की तरफ इशारा कर दिया। चप्पू की मम्मी ने मजबूरी बता दी कि बेटी को मच्छड़ ने घायल कर दिया है इसलिए अभी मच्छड़ को पकडऩे में व्यस्त हैं। खैर, मोची जी की बात जायज भी है जूते - चप्पल रिपेयरिंग का काम जरुरी है और सीधी सी बात है यदि जूता काटने लगे तो उसे बदल देना चाहिए।

           तो बिना मुख्य अतिथि के और पांच सौ के पुराने लुंझपुंझ नोट की अध्यक्षता में अधिवेशन शुरू हुआ। संचालन का जिम्मा एक सौ के के नोट को दिया गया। इस तरफ एक हजार और पांच सौ के रिजेक्टेड नोट बैठे थे, सामने तरफ नये कड़क वाले पीछे तुड़े-मुड़े धूल छाप। बाजू की लाइन में सब नये नये नयी सीरीज के पांच सौ के,  उनके बाजू में एक सौ वाले कुछ करकराते और कुछ सट्टे के नंबर वाले नोट। फिर पचास की लाइन में बेसुध पड़े, बीस के लाल-लाल फिर दस वाले पांच वाले और आखिरी में एक के बिल्कुल नये चमचम।

अधिवेशन जैसे ही शुरू हुआ पीछे से नारेबाजी की आवाज

     डालर तेरी तुर्रमबाजी

      नहीं चलेगी नहीं चलेगी

      तुम सब देख लो

      हम सब एक हैं

अधिवेशन का संचालन कर रहे सौ के नोट ने सभी नोटों से शान्ति बनाए रखने कहा। अधिवेशन में देश के आर्थिक विकास, जीडीपी और नोटबंदी के कारण परेशानियों पर चिंता व्यक्त की गई और नोटों के साथ हो रहे अन्याय और बेइज्जती तथा  राजनीतिक षडयंत्र की निंदा की गई। सभी जाति के नोटों ने खड़े होकर कुबेर से प्रार्थना की कि देश के नीति निर्माताओं नेताओं को सद्बुद्धि दो ताकि बेचारी कराहती जनता के वेदनामय स्वरों को राहत मिल सके।

         अधिवेशन का संचालन करते हुए एक सौ के नोट ने बताया कि रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघु राम ने नोटबंदी के पहले चेतावनी दे दी थी कि पर्याप्त तैयारी के अभाव में नोटबंदी से आमजन की परेशानियां बढ़ सकती है, आर्थिक विकास और जीडीपी को पिटने का मौका मिल सकता है पर ये राजनीति के आशाराम और राम रहीम जैसे बाबाओं की जिद से हमारे बड़े भाई एक हजार और पांच सौ के नोटों को रद्दी घोषित कर दिया गया। अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती और विकास दर में कमी के लिए इनके लोगों ने कंपनियों को दोषी करार दिया। दाढ़ी वालों ने दावा किया था कि नोटबंदी से कालाधन, नक्सलवाद, आतंकवाद और नकली करेंसी पर लगाम लगेगी, लगाम क्या लगी इस बहाने जिनके पास कालाधन था रातोंरात सफेद बन गया। बाबा लोगों का खेल कौन समझेगा हरिद्वार वाले मंजन बाबा की जि़द थी कि एक हजार और पांच सौ के नोट बंद कर दिये जावें, पता नहीं उनको हमारे बड़े भाइयों से क्यों नफरत हो गई थी।

दाढ़ी वालों के लाख दावों के बावजूद रिजर्व बैंक की सालाना रिपोर्ट ने नोटबंदी पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। अध्यक्ष की अनुमति से रिजेक्टेड रद्दी घोषित नोटों को बोलने का मौका दिया गया। एक हजार और पांच सौ वाले रद्दी घोषित नोटों के प्रतिनिधि ने रोते हुए कहा - इन लोगों को ऐसा नहीं करना था हमारी तो लुद्दी सुटवा दी,  हमें कहीं का नहीं छोड़ा, अर्श से फर्श में फेंक दिया। आंसू पोंछते हुए बोला - नोटबंदी के जितने फायदे बाबा लोगों ने गिनाए है उतने तो जड़ी बूटी का हकीम भी नहीं गिनाता, नोटबंदी के चक्कर में बड़ी बड़ी राजनैतिक पार्टियों को कंगाल बना दिया गया। ये दावा करते हैं कि नोटबंदी करके 1000 और 500 के 99 प्रतिशत नोट बैंक को वापस आ गए, सरासर झूठ बोल रहे हैं पूछ लो 500 वाले रद्दी नोट से...... नोटबंदी ने हमारा ये हाल कर दिया कि हनुमान जी और सांईबाबा ने भी हमें लेने से इंकार कर दिया है। समय समय की बात है पहले लोग पैसा के पीछे भागते रहे नोटबंदी में लोग पैसे से पीछा छुड़ाने के लिए भाग रहे हैं। जिन धन्ना सेठों ने गंगा में चवन्नी नहीं डाली थी अब वे बोरा भर नोट रोज बहा रहे हैं। शादी में जूता चुराई के रेट बढ़ गये। सटोरिये सुस्त हो गए, जुआ फड़ में कफ्र्यू जैसी हालत बन गई। मुर्दे कफऩ और लकड़ी को तरस गए। पर जे भी सही है कि देह व्यापार और मुजरे के धन्धे की चांदी हो गई यहां दस और बीस की गड्डी दस हजार से ज्यादा में बिकी।

ऐन वक्त पर हमने भी नखरे पेल दिए बैंक वाले हमारे केसिट में जबरदस्ती नये रंगीन 500 वाले भरने लगे तो हम फैल गये.... वाह केसिट हमाये लाने बनाए गए जे काहे घुसन लगे बाप को केसिट है का? सिस्टम से मिलकर हमने षड्यंत्र रचाया पूरे देश के एटीएम की ऐसी-तैसी करा दई..... सब एटीएम रूक गये पूरा देश लाईन में..... लाईन के बहाने वल्र्ड रिकॉर्ड बन गए, पर हां सौ वाले की पूछ परख बढ़ गई जलवे हो गए।  सौ के जलवे सुनके 2000 वाले को खुजली हुई, माईक छीन कर बोला - भैया, जीडीपी तो देश की नाक होती है जीडीपी गिरी तो नाक कटी और जीडीपी बढ़ी तो नाक ऊंची हुई पर डढिय़ल लोगों ने नाक फुलाफुला के ऐसे भाषण दिए कि बिलखती जनता की नाक में दम कर दी। बीस दस पांच वाले मुंह लटकाए चुपचाप सुन रहे थे पर एक के नये नोट ने हुड़दंग मचा के माईक छीन लिया कहने लगा - हम बेचारे हैं दलित हैं कोई हमें पूछता नहीं भला हो नोटबंदी का.... बड़े बड़े अमीर हमारे भिखारियों से छोटे नोटों की भीख मांगने आए। यार एक क्या हुआ तमाशा हो गया चाहे जब बंद कर देते हैं चाहे तब फिर चालू कर देते हैं, इनको ये नहीं मालूम कि गरीबी में जेब में रखा एक रूपया अमीरी का एहसास करा देता है। तभी तैश में आकर 2000 वाले ने फिर माईक पकड़ लिया बोला - हम भी परेशान हैं, हमें नये नये रंगों के साथ सजावट के साथ ऐसा उतारा कि बाजार में हमें सब शक की निगाह से देखने लगे, लोगों ने मजाक उड़ाया कि हम चमत्कारी हैं, रंग बदलते हैं और न जाने क्या क्या..... और तो और  500 वाले की ऐसी दुर्गति की 100 वाले अपने आंचल में छुपाए रहते हैं।  अध्यक्ष की आसंदी से बोलते हुए 500 के रद्दी नोट ने रोते हुए उद्बोधन में कहा कि हम लोग नहीं चाहते थे कि देश की जीडीपी इतनी गिर जाए पर क्या करते इन लोगों ने हमें एवं हमारे बड़े भैया को अचानक कचरा बना दिया। हम दोनों के कचरा बनते ही देश में पैसे की किल्लत हो गई, खेत खाद और सिंचाई को तरस गए, तीज त्योहार बाजार मिमियाने लगे। शादी विवाह की रस्में चूक गई, दूल्हे बैंकों की लाईनों में लगे रहे और दुल्हन को कोई और भगा ले गया। लाईन में मरीज तडफ़ तडफ़ मर गए, पूरा देश लम्बी लाईन में तब्दील हो गया। नोटबंदी ने अर्थव्यवस्था की नसबंदी कर दी। आर्थिक विकास धार-धार रोने लगा। नेता चिल्लाते रहे नोटबंदी से नया विकास पैदा होगा, तब सच्चे दिन आएंगे पर बीच में ये रिजर्व बैंक की रिपोर्ट ने सब धोकर रख दिया। नेताओं ने अपना विकास पैदा करके घरेलू विकास कर लिया जनता को बिलखते आंसू देकर........

अचानक लाईट बंद कर दी गई,  भगदड़ मच गई.... और पुलिस..... आ.... गई.....