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Monday 20 Nov 2017

यायावरों का स्वप्नलोक स्कॉट्लैंड

स्कॉटलैंड का सफर मेरी गत दिनों जून में लन्दन की बीस दिन की लम्बी यात्रा का ही हिस्सा था। इन बीस दिनों में हमने चार दिन स्कॉटलैंड के लिए बचा कर यानी रिजर्व रखे थे। मेरे बेटे-बहू ने मेरी पसन्द के मुताबिक मेरा स्कॉटलैंड टूर पहले ही बुक करा रखा था। गत 26 जून 2017 को लन्दन के वेम्बले स्टेडियम से प्रात: आठ बजे स्टार गोल्ड टूर कम्पनी की बस में हम बोर्ड हो गये जिसमें लगभग पचास यात्री थे। संयोग यह था कि इसमें सभी यात्री भारतीय थे। इन सारे भारतीयों में कुछ तो स्थानीय नागरिक थे जो भारत से यहाँ आकर बस गये हैं और कुछ हम जैसे थे जो अपने बेटे-बहू या अपने रिश्तेदारों से मिलने इंग्लैण्ड आये हुए थे। इसमें कुछ हनीमून जोड़े और बच्चे भी शामिल थे जिससे स्कॉटलैंड का सफर और भी खुशनुमा एवं सुहाना हो गया। हमारे कोच कैप्टन थे मिस्टर नील और गाइड थीं श्रीमती श्रुति(30) जो भरतीय मूल की ब्रिटेन नागरिक थीं। मजा तब आया जब हमारी गाइड श्रुति ने अपना परिचय देते हुए कहा कि मैं और कैप्टन मिस्टर नील आपके इस टूर में अभिभावक हैं यानी मम्मी-डैड।  यह सुनते ही कोच के यात्रियों में ठहाके की गूँज देर तक छायी रही क्योकि कोच में आठ साल के बच्चे से लेकर पचहत्तर साल तक के स्त्री-पुरुष थे। इसके बाद फिर श्रुति ने कहा कि आप लोग हमारे कमांड में रहेंगे। हमारी बात मानेगे और हम आप सबकी हर वाजिब जरूरत पूरी करेंगे। अनुशासन में रहना ग्रुप टुअर की पहली और बुनियादी शर्त होती है। कम समय में अधिक साइट देख सकते हैं और अनावश्यक तनाव से बच जाते हैं। फिर भी न चाहते हुए भी बहुत कुछ अवांछित हो ही जाता है। जैसे एड्नबरा में हमारे कुछ साथी एडनबरा की गलियों में भटक गये। गाइड और कोच की बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। एक भी टूरिस्ट मिस हो जाय तो जान की आफत। श्रुति का हम सब के माँम-डैड कहना जिम्मेदारी के लिहाज से बिल्कुल वाजिब था। उसने अपने इस फर्ज को निभाया भी बखूबी। हम सब यात्रियों के खाने-पीने से लेकर घुमाने तक की उसकी फिक्र होती थी। डिनर हम सबके बाद ही वह खाती थी। रास्ते में जब भी मैंने श्रुति को गुड मॉर्निंग माम कह पुकारा तो उसने बेहिचक गुड मॉर्निंग माई चाइल्ड कह कर ही जबाब दिया। बड़ी खुशमिजाज और प्यारी थी श्रुति। इन चारों दिन हम लोग ग्लास्गो के गोल्डेन जुबिली कांफ्रेंस होटल में ठहरे थे जो क्लाइड नदी के किनारे पर तमाम आधुनिक सुविधाओं के साथ हमारी सेवा में था।

              स्कॉटलैंड यू के यानी यूनाटेड किंगडम का एक प्रान्त है। यद्यपि स्कॉटलैंड का अपना संविधान, अपनी संसद, अपना राष्ट्रीय और शाही ध्वज और अपनी मुद्रा यानी करेंसी भी है। सोचता हूँ भारत में यदि किसी राज्य को इतनी आजादी मिल जाय तो वह आये दिन केंद्र सरकार से मुठभेड़ करे, वैसे भारत में केंद्र और राज्यों के बीच टकराहटें अभी भी कम नहीं हैं खास कर उन राज्यों में जिनकी सरकारें केंद्र सरकार की पार्टी से भिन्न हैं। स्कॉटलैंड को लेकर मन में कई तरह के कौतूहल थे। वहाँ के स्थापत्य सौन्दर्य, नैसर्गिक सौन्दर्य, वहाँ की स्मार्ट पुलिस, वहाँ के बहादुर सैनिक जो इंग्लैण्ड के शाही मुकुट की सुरक्षा में सदैव तत्पर रहते हैं, इसके अलावा वहां के पहाड़ी इलाकों की घाटियों के मनोरम दृश्य, गोल्फ  के मैदान। इस देश में पचास से अधिक गोल्फ  के मैदान हैं जो पहाड़ी क्षेत्रों में होने के कारण ऊंचे-नीचे भी होते हैं। यह देश दुनिया को गोल्फ  खिलाता भी है और सिखाता भी है। कोच की खिड़कियों से झांकते हुए लगता था जैसे पूरा स्कॉटलैण्ड हरी चूनर ओढ़े कोई नववधू हो जो हमारे स्वागत के लिए अपने पास बुला रही है। हरे-भरे लान और फूलों से लदे ढलानदार सुन्दर घर, हैट लगाये रंगीन परिधानों में उछलते-कूदते बच्चे, भेड़ों और गायों से भरे चारागाह और चेहरों पर मुस्कान लिए लम्बे-तगड़े, गोरे-चिट्टे यहाँ के नगरिक बता रहे थे कि हम स्कॉटलैंड में हैं। स्कॉटिश नागरिकों की एक खास बात मुझे बहुत पसंद आयी कि वे अपरिचितों से भी परिचितों की तरह मिलते हैं और अभिवादन करते हैं। पहले मुझे यह कुछ अजीब लगा जब सुबह की सैर में लोगों को हेलो और नमस्कार करते देखा पर बाद में हम उनसे घुलमिल गये और वे अपने लगने लगे। गैरों को अपना बना लेने का यह स्कॉटिश आचरण मुझे बहुत मोहक लगा। दुनिया में नफरत को मात देने का इससे नायाब कोई और तरीका नहीं हो सकता। स्कॉट्लैंड के पूर्वी आयशर इलाके में एक पटना गाँव भी है जो भारतीयों के लिए विशेष कौतुहल का विषय होना स्वाभाविक है। इसकी स्थापना सन 1802 में विलियम फुलरटन ने की थी अपने कारखाने के मजदूरों को रहने के लिए घर उपलब्ध कराने के लिहाज से। विलियम साहब ईस्ट इंडिया कम्पनी में काम करने भारत आये थे और उन्होंने बिहार का पटना शहर देखा था। उसी की याद में यह पटना गाँव उन्होंने बसाया जहाँ आज सेंट जेवियर प्राइमरी स्कूल और दून एकेडमी है। यहाँ दून नदी बहती है। यह ठंडा इलाका है जहाँ अधिकतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रहता है। भारतीयों के लिए स्कॉटलैंड का पटना देखना अनूठा आकर्षण है।

            एडनबर्ग (एडनबरा) की पथरीली ढलानदार गलियों में लाल रंग के शाही कपड़ों में बैगपाइपर बजाते सिपाही स्कॉटलैंड की पहचान हैं। मफलर(स्कार्फ) में लिपटीं और हैट लगाये या ऊनी कैप पहने स्कॉटिश लड़कियों का सौन्दर्य और भी निखर कर दिखता था। लगता था जैसे स्कॉटलैंड की धरती पर परीलोक उतर आया हो। लन्दन से स्कॉटलैंड यानी उसके ग्लास्गो शहर पहुँचने में लगभग छ: सात घंटे लगे। बीच में टी ब्रेक और लंच ब्रेक भी लिया और साइट सीन देखे। ग्लास्गो से थोड़ा पहले स्कॉटलैंड के देहाती इलाके ग्रेट्ना ग्रीन देखने गये। यह एक गाँव हैं, छोटा सा गाँव। यहाँ आज भी किसानों के पुराने जमाने के खेती-किसानी के औजार देखने को मिलते हैं। दुनिया भर के पर्यटकों का हुजूम देख कर अहसास हुआ कि ग्रेट्ना ग्रीन सच में ग्लोबल विलेज बन गया है। हर एक चेहरे पर खुशी और मस्ती की रौनक पूरे माहौल को बेफिक्र और मस्ताना बना रही थी। रंगीन पोशाक में बैगपाइपर बजाते पुलिस के सिपाही हमें स्काटलैंड में होने का एहसास दिला रहे थे। ठंडा मौसम था तो लोग कॉफी, बिअर का लुत्फ लेते हुए धूप सेंक रहे थे। इस गाँव ग्रेट्ना ग्रीन में दो सौ साल से भी पुरानी एक लोहार (ब्लेकस्मिथ) की दुकान है। सन 1754 में स्थापित फेमस ब्लेकस्मिथ शॉप। पर अब यह एक आधुनिक दूकान में तब्दील हो गयी जहाँ मुसाफिर सौविनिअर तथा अपनी मनपसन्द चीजें खरीदते हैं। यहाँ लोग अपनी शादी की सालगिरह मानने भी आते हैं। इसे प्रेम का घर (होम ऑफ लव) भी कहते हैं। यहाँ की एक मिठाई भी बहुत लोकप्रिय है जिसे लोग खरीद कर अपने घरों को ले जाते हैं। कुछ लोग यहाँ शादी करने आते हैं। कहा जाता है कि यहाँ ढाई सौ साल पुराने शादी का रिकार्ड उपलब्ध है।

स्कॉटलैंड यू के का उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र है। ग्लास्गो इसका सबसे बड़ा औद्योगिक शहर है। एडनबर्ग (एडनबरा) इसकी राजधानी है और इसके दो ध्वज हैं एक राष्ट्रीय और एक शाही। यहाँ  संसदीय लोकतंत्र है जहाँ राजा राज्य का मुखिया होता है। स्कॉटलैंड की अपनी करेंसी है स्कॉटिश पौंड, जिसका मूल्य ब्रिटिश पौंड के बराबर ही होता है। स्कॉटलैंड की सीमा दक्षिण में इंग्लैण्ड से सटी है और पूरब में उत्तरी सागर और दक्षिण-पश्चिम में नॉर्थ चैनल और आयरिश सागर है। स्कॉटलैंड में 790 से अधिक द्वीप हैं। इसका उत्तरी भाग पहाड़ी है जिसकी चोटियों की लम्बाई 900 मीटर से लेकर 1200 मीटर तक है। दक्षिणी भाग पठार है और मध्य भाग में घाटियाँ हैं। स्कॉटलैंड नदियों, झीलों, पहाड़ों, समुद्र, नहरों और पुलों का देश है, यहाँ मुख्य व्यवसाय पशुपालन है। नदियों और समुद्र के किनारे की भूमि में खेती होती है जिसमें गेहूं, जई, जौ, आलू और फलों का उत्पादन होता है। स्कॉटलैंड डेरी उत्पादन और मांस के निर्यात में दुनिया के शीर्ष देशों में हैं।

       स्कॉटलैंड खूबसूरत किलों का देश है। ऐसा देश जिसे इतिहास बहादुर योध्दाओं बैगपाइपर बजाने वाले संगीतज्ञों और स्कर्ट पहनने वाले पुरुषों के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा भी बहुत कुछ है स्कॉट्लैंड के पास। यहाँ के सैंडी बीच बेहद खूबसूरत और शान्त हैं। सच कहूँ तो पूरा स्कॉट्लैंड एक खूबसूरत लैंडस्केप है। रोबर्ट बर्न जैसे प्रसिध्द कवि और वाल्टर स्कॉट जैसे ऐतिहासिक उपन्यासकार जिस देश में पैदा हुए हों वह कितना महान होगा हम कल्पना कर सकते हैं। लन्दन से स्कॉटलैंड के ये अजनबी रास्ते, कैसे भूल पायेंगे एक खुशनुमा सफर के सुहाने रास्ते।