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Tuesday 17 Oct 2017

जीत

जीत भी

कभी-कभी

एक अदद आदमी की,

दूसरे आदमी पर

युग जीतने के समान

इतिहास के पन्नों पर स्वयं जुड़ जाती है,

जब कोई जस्टिन गैटलीन

जीतकर भी किसी उसेन बोल्ट के हारे कदमों पर झुक जाता है

तब मानो 9.92 सेकेन्ड में

पूरी दुनिया सौ मीटर में मापी जाती है और एकाएक

सेवन माइल समुद्री तट की सुनहरी

गर्मी और सुहावनी हो जाती है

तब जल्दी से पूरी धरती किसी गेंद की तरह उछल कर किसी खूंखार महाशक्ति के हाथों से निकल कर किसी निर्दोष बच्चे के पास सुरक्षित जमा हो जाती है

देश-दुनिया

अमेरिका जमेका

कोरिया जापान

सारे के सारे

एक खूबसूरत लकीर में

समाने लगते हैं

अगर किसी ने

अब भी नहीं देखी

है जस्टिन गैटलीन की वह जीत की छवि

तो अभी ही देखे

लन्दन विश्व एथलेटिकस प्रतियोगिता के उस दृश्य को जहाँ विजेता

झुक कर और बड़ा विजेता बन चुका है

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 दिशा

 कवि

हवाई मुर्ग से

सुविधा की दिशाओं को

पता लगाने को छोड़कर

बढ़ते हुए मिहिरकुलों को रोककर

संभाल सको तो संभाल लो

ढिमलाएँ हुए शब्दों को

पथराएँ हुए अर्थों को तो

बड़ी मेहरबानी होगी तुम्हारी

कि सारे के सारे स्वर

कातर होकर कब से रहे हैं तुम्हें पुकार ।

कवि

द्वंद्व भरे इस कपटकाल में

जब मुड़ोगे सही व्यंजनाओं की ओर तो

तुम्हें सबसे पहले अपना ही कोई

बनकर मिहिरकुल रोकेगा

और फाड़कर तुम्हारे पहचानपत्र को

पानी को पानी से धोने जैसा सैकड़ों

तथाकथित शुद्ध कर्मसमझाएगा ।

कवि

इस मरणकाल में

संभाल सको अपने अक्षरों को तो

आने वाली पीढिय़ों की

भाषा भी बच पाएगी

तो बोलो क्या कहते हो

लड़ोगे शब्दों के हत्यारों से

भरकर जीवन में काव्यराग

या जियोगे

घिसे-पिटे मुहावरे की तरह

किसी बड़ी

ड्योढ़ी के सामने ।

  **** 

 

उसके लिए लिखना तुम्हारा नाम

उसके लिए लिखना

तुम्हारा नाम

फैलाना स्याही नहीं है

बल्कि तलाशना हवा से जल के तरल निशान हैं।

उसके लिए लिखना

तुम्हारा नाम

खींचना आड़ी-तिरछी

लकीरें भी नहीं है

जो पच जाय किसी दस्तावेज़ की खुराक बन 

यहाँ-वहाँ ।

उसके लिए लिखना तुम्हारा नाम

फटी हुई आत्मा को

जीवन की सुई से सीने का ही उपकर्म है ।

जो देह की कहानी खत्म होने के बाद भी

रिश्तों को जोडऩे के लिए औरत रूपी जीवन गोंद के रूप में याद

की जाएगी कभी । 

उसके लिए

लिखना तुम्हारा नाम

वैसे  ही है जैसे

काँटों के लिए खाना कसम सुगंधित फूलों का ।

लिखना उसका नाम अभी इतना ही है कि

वह

धरती पर बची

अमृत की आखिरी बूँद है

जिसे तुम अपने बोध में स्त्री समझ पाते हो ।