Monthly Magzine
Sunday 19 Aug 2018

क्षणिकाएं

1. सफेद लहू

 

आज फिर

किसी अपने ने

अपनत्व की

चढ़ा दी है बलि

और

अलग होने को है

नाखूनों से मांस

रगों में बहता लहू

फिर निकला है

सफेद।

 

2. संवेदनहीन

वे संवेदनहीन हैं

'पत्थरÓ दिल हैं

छिपी रहती हैं

उनकी माथे की शिकनें

तनी हुई

क्योंकि कठिन है

उनके लिए

सत्य कहना

सुनना वा सहना