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Wednesday 17 Jan 2018

पत्र

महोदय !  अक्षरपर्व का मई अंक मेरे सामने है। अंक के पहले पृष्ठ से पढना शुरु किया और प्रस्तावना पर ही अटक गई। प्रस्तावना के बहाने कुमार विनोद के गजल संग्रह से परिचय कराया। गजल में नए प्रयोग मन को छू गए। जमाना मेल का है और तुम खत पर ही अटके हो,पढकर इन नए प्रतिमानो के लिए अक्षर पर्व के माध्यम से कुमार विनोद को बहुत बहुत बधाई।                 

सुधा गोयल,बुलन्दशहर