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Saturday 18 Nov 2017

पत्र

अक्षरपर्व के यों तो सभी अंक अच्छे निकलते हैं, पर अप्रैल अंक की मायनों में बेहतर लगा। इसमें प्रस्तावना से लेकर उपसंहार तक कई चीजें पठनीय लगीं। डा.ब्रजकुमार पांडेय का आलेख वैज्ञानिक दृष्टि क्या होती है, विजय गुप्त का संस्मरण प्रो.बाबूलाल शुक्ल :आसमान छूता वृक्ष, तथा तरसेम गुजराल का पुन:पाठ, कृष्णवीर सिंह सिकरवार का फिल्मी दुनिया में प्रेमचंद का योगदान संबंधी लेख और महेन्द्र राजा जैन द्वारा लिखित प्रभाकर श्रोत्रिय की पुसतक की समीक्षा (अपने-अपने महाभारत), इनके अलावा मलयजी की कविताएं और अन्य रचनाएं पठनीय हैं।

रामनिहाल गुंजन, आरा, बिहार