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Sunday 21 Oct 2018

पत्र

अप्रैल अंक की कविताएं गज़़लों पर भारी हैं। तथापि दरवेश भारतीजी की गज़़लें गौरतलब व काबिलेतारीफ हैं। समकालीन हिन्दी कविता के सशक्त हस्ताक्षर अरुण कमल पर विवेक शा का शोध आलेख प्रशंसनीय है। उन्होंने सत्य ही लिखा है कि अरुण कमल आज के क्रूर, अमानवीय परिदृश्य में विलीन होती जा रही मनुष्यता की खोज में प्रयासरत हैं।

प्रो.भगवानदास जैन, अहमदाबाद