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Tuesday 21 Nov 2017

साहित्यिकी की मासिक गोष्ठी

कोलकाता। सुप्रसिद्ध लेखिका श्रीमती सुधा अरोड़ा के सानिध्य में कोलकाता की संस्था साहित्यिकी की मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्ष किरण सिपानी ने सुधा अरोड़ा का परिचय दिया। पर्यावरण प्रदूषण के प्रति चिंता प्रकट करते हुए सुधाजी ने  पर्यावरण प्रदूषण से बचने के कुई उपाय भी सुझाए। हर स्त्री अपने स्तर पर जागरूक होकर कुछ कदम उठाए जिससे यह धरती स्वच्छ और खूबसूरत  बनी रहे ,ऐसी उम्मीद भी उन्होंने जाहिर की।

सुधा जी ने पर्यावरण, स्त्री और  सामाजिक मुद्दों पर रचित अपनी कई गंभीर और भावप्रवण कविताओं का पाठ किया, जैसे- ताकि बची रहे यह धरती, कम से कम एक दरवाजा खुला रहे, यहीं कहीं था मेरा घर, राखी बाँधकर लौटती हुई बहन, अकेली औरत का रोना, अकेली औरत का हंसना, रहोगी तुम वही, लीव मी अलोन आदि। सुधा जी ने स्त्री संघर्ष विषयक प्रश्नों पर अपने विचार रखते हुए कहा कि अभी भी स्त्री को अपनी आजादी के लिए लंबी लड़ाई लडऩी है। ऊपर ऊपर बहुत कुछ बदला है पर अभी भी समाज स्त्री मुक्ति के प्रति सहज और उदार नहीं हुआ है। इस साहित्यिक परिसंवाद में किरण सिपानी, गीता दुबे, सुषमा हंस, आशा जयसवाल, रेवा जाजोदिया, वाणीश्री बाजोरिया, रेणु गौरिसरिया, माया गरानी, मीना चतुर्वेदी, पूनम आदि ने अंश ग्रहण किया।

सचिव , साहित्यिकी