Monthly Magzine
Friday 24 Nov 2017

पुरस्कार अर्पण समारोह

संस्कृति समाचार
15 अप्रैल, 2017 को नई दिल्ली के गांधी शान्ति प्रतिष्ठान में युवा कवि प्रांजल धर के संयोजन में पुरस्कार अर्पण समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर वर्ष 2016-17 के लिए आठ युवा रचनाकारों को सम्मानित किया गया। रवीन्द्र कालिया स्मृति पुरस्कार (कथा या कथेतर गद्य के लिए) वर्ष 2016 के लिए कबीर संजय को और वर्ष 2017 के लिए मनोज कुमार पाण्डेय को; पंकज सिंह स्मृति पुरस्कार (कविता के लिए) वर्ष 2016 के लिए अशोक कुमार पाण्डेय को और वर्ष 2017 के लिए मृत्युंजय प्रभाकर को; श्याम धर स्मृति पुरस्कार (पत्रकारिता या सामाजिक कार्य के लिए) वर्ष 2016 के लिए आकांक्षा पारे को और वर्ष 2017 के लिए पूजा सिंह को; सीताराम शास्त्री स्मृति पुरस्कार (आलोचना के लिए) वर्ष 2016 के लिए सर्वेश सिंह को और वर्ष 2017 के लिए कमलेश वर्मा को प्रदान किया गया। ये पुरस्कार इन रचनाकारों को कार्यक्रम के अध्यक्ष सुप्रसिद्ध आलोचक-चिन्तक मैनेजर पाण्डेय और सुप्रसिद्ध वरिष्ठ कथाकार श्रीमती ममता कालिया के हाथों प्रदान किए गए। पुरस्कारस्वरूप इन आठों रचनाकारों में से प्रत्येक को तीन हजार एक सौ रुपये की नगद राशि और प्रशस्ति पत्र भेंट किए गए। उल्लेखनीय है कि साहित्य की विभिन्न विधाओं में प्रत्येक वर्ष चार पुरस्कार घोषित किए जाते हैं।
इन पुरस्कारों के लिए बनाए गए निर्णायक मण्डल में तीन सदस्य शामिल हैं- सर्वश्री विजय राय (सम्पादक  ‘लमही’), कथाकार अखिलेश (सम्पादक- ‘तद्भव’) और कवि-आलोचक जितेन्द्र श्रीवास्तव। इस समारोह में ये तीनों सदस्य उपस्थित थे और अखिलेश ने निर्णायक मण्डल की तरफ से इन पुरस्कारों की निर्णय प्रक्रिया से जुड़ा अपना वक्तव्य दिया। पुरस्कृत रचनाकारों की प्रशस्तियों का वाचन किया गया और पुरस्कृत रचनाकारों ने अपने-अपने वक्तव्यों में अपनी रचना-प्रक्रिया से जुड़ी चीजें साझा कीं। ममता कालिया ने कहा कि यह युवा रचनाशीलता का उत्साहवद्र्धन है और जब महिला पत्रकारों को पुरस्कार मिलते हैं तो इससे पत्रकारिता का भी भला होता है और समाज में महिलाओं का भी भला होता है। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. मैनेजर पाण्डेय ने रचनाकारों का उत्साहवद्र्धन किया और कुछ बेहतरीन सुझाव भी दिये ताकि आगामी वर्षो में इस कार्यक्रम को और अधिक व्यवस्थित बनाया जा सके।
इस पुरस्कार अर्पण समारोह में अनेक विख्यात साहित्यकार, कवि, आलोचक, मीडियाकर्मी, लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता, विचारक और साहित्यप्रेमी मौजूद थे।
प्रस्तुुति- प्रांजल धर