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Wednesday 22 Nov 2017

खोखली शुभकामनाएं

विजय राठौर
गट्टानी कन्या उ. मा. शाला के सामने अकलतरा, जांजगीर
मो. 9826115660

खोखली शुभकामनाएं
परोसी जा रही है
खाली सहानुभूतियां
किए जा रहे हैं
खोखली शुभकामनाओं का
आदान-प्रदान

बांटी जा रही
वादों की अधपकी रोटियां
नदी की तरह
मृत है बिना पानी के आदमी
उग आई  है
औपचारिक संबंधों की
नई फसल

बहुत ज्यादा व्यस्त हैं लोग
कि नहीं देख पा रहे हैं अपना ही गिरेबान
सड़ांध में नाक बंद कर निकल जाना
निरापद समझने लगे हैं लोग

कभी न कभी
किसी न किसी को
उठाना होगा पत्थर
ठहरे हुए पानी में
लहर उगाने के लिए

नींद और जाग में

नींद में सपने हैं
सपनों में रोशनी है
रोशनी में रोटी है
रोटी में है राम-राज
और राम-राज में है
भय मुक्त समाज
जाग में
पीड़ा है भूख है
बाजार का भय है
सुखों का क्षय है
अंधेरा आकाश है
आंखों में आंसू
और होंठों में प्यास है

और भी बुरे दिन

हम उस मोड़ पर खड़े हैं
जहां नहीं करते काम
हमारे ही दिशा सूचक यंत्र

हमारे ही बनाए अगुए
निकल जाते हैं टा-टा करते हमें
पांच साल बाद वापसी का
गंभीर वादा करते हुए
वे मिटाते जाते हैं सारी निशानियां
हमारे गंतव्य तक पहुंचने की

इस तरह वे हमें
आश्वस्त कर जाते हैं कि
अभी बुरी नहीं है तुम्हारी स्थिति
अभी तुम्हें करनी है प्रतीक्षा
और भी बुरे दिन की