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Friday 24 Nov 2017

हाट बची न पैंठ

ओमीश परुथी
463,सैक्टर-14
सोनीपत  (हरियाणा)
मो.9813203955


न हाट बची
न बाट बची
माल की आंत में
पैंठ धंसी
नुक्कड़ की बनिये की दुकान
बाजारवाद ने आन ग्रसी
दुकानदार का मुख म्लान
न चेहरे पर खुशी, न होठों पर मुस्कान।
स्टोर में, माल में-
न कुशलक्षेम, न दुआ सलाम
बैठने को न खाट, न बेंच
न पानी, न हुक्के का इंतजाम
ग्राहक की गोद में बालक हेतु
न टॉफी न बताशा
न गाल पे थपकी
आज के दौर में
ये बातें कब की?

वक्त़ का बदलाव है यह
या व्यापार की गहरी चाल है
गांव शहर जिधर देखो
फैला बाजार ही बाजार है
छद्म विदेशी हथियार है यह
या पैसे की पिपासा का प्रसार है
आम आदमी ठगा-ठगा
बाजार के कहर से बेजार है
दो पल पहले था खरीदार जो
अब बिकने को लाचार है

शख्स शख्स नहीं रहा
वस्तु है, माल है, चीज है
माथे पर टंगे प्राइस टैग
सेल सबको अजीज है

बोली लगाना, बोली लगवाना
खेल को माल बनाना
वही है बाजार की रवायत
यही इस मौसम की तासीर है
बाजारवाद के बाजार में फिसला
ईमान, धर्म, अकीदा, विश्वास
अस्मिता , अपंग, इज्जत नाचीज़ है।