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Wednesday 22 Nov 2017

रुपए की सेहत पर बुलेटिन

प्रमोद त्रिवेदी
मन्वन्तर, 205, सेठी नगर, उज्जैन (म.प्र.) 456010
दूरभाष- 0734-2516832
रुपए की सेहत पर बुलेटिन
(1)

अधिकृत बयान आया- ‘‘सेहत ठीक नहीं रुपए की।
रखी जा रही है नजर बराबर इसकी सेहत पर।
सुधरी नहीं तब भी सेहत, तमाम कोशिशों के बावजूद।’’
कहा गया- ‘‘फैलाई जा रही है अफवाहें,
की जा रही हैं कोशिशें अस्थिरता पैदा करने की।
पर हिम्मत रखें देशवासी।
रुपए की सेहत का असर कुछ तो पडऩा ही है।’’
‘‘दुनिया की सेहत ठीक नहीं है तो-
हम दुनिया से बाहर थोड़े ही हैं!
बिगड़ी आबो-हवा का असर रुपए पर भी पडऩा ही था।
क्या यह गर्व की बात नहीं है कि हमने अपनी मुद्रा को पहचान दी।
जानी जा रही अब यह अपनी पहचान के साथ?
क्यों कह रहे हैं आप इसे कमजोर?
मोटापा कम हुआ है इसका
और यह अच्छा लक्षण है।
दौड़ेगी हमारी मुद्रा और एक दिन सबको पीछे छोड़ देगी।

(2)

महामहिम ने आखिर स्वीकार कर लिया-
रुपया कमजोर हुआ
पर यह अस्थायी दौर है, गुर जाएगा।
रुपए की पस्त हालत से पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढऩा लाजिमी है
यहां रुपयों से मिलता है डीजल-पेट्रोल
पर हमें तो डॉलर में करना होता है चुकारा।
देश के विकास में सबको मिलकर उठाना होगा भार,
देनी होगी सबको कुर्बानी।
संकट पहले भी आए और हम पर से गुजर गए।
हिम्मत रखें
और करें हम पर भरोसा।’’
कहां सुन पाते हैं देशवासी
महामहिम की वाणी।
सुन प्रजा धन्य हुई।
और देश हुआ,
निहाल!
सरकार ने राहत की सांस ली

(3)

अन्तत: मान लिया गया- सब कुछ मरण-धर्मा है
हमारे मूल्य रुपए से तय नहीं होते।
रुपए का वजूद नहीं था तब थे हमारे अपने मूल्य।
देह के समाप्त होने भर से सब कुछ समाप्त नहीं हो जाता
कुछ है अवसर, जो सदा बना रहेगा।

जो बना रहेगा, वही बचाएगा।
वही हमारे लिए प्रेय और श्रेय।
हम हैं तो केवल रुपए की वजह से नहीं,
हैं जिन्दा तो अपने मूल्यों की वजह से...
चकित हैं दुनिया- कैसे उबर जाते हैं हम हर बार संकटों से
हमें पता है, कोई संकट स्थायी नहीं होता।
धीरज नहीं खोना चाहिए मुसीबत के दौर में।
अपनी परम्परा नहीं भूलना है।
हम  ही तो मानते हैं- ‘‘रुपया तो हाथ का मैल है।’’
मैल है तो मैल से मोह क्यों?