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Friday 24 Nov 2017

हम लड़ लेंगे किसी और दिन

निसर्ग भट्ट
21 चित्रकूट सोसाइटी
ब्रह्म्ïा कुमारी मार्ग, आनंद सरोवर के पास, पाटन-384265
मो. 8460284736

हम लड़ लेंगे किसी और दिन
चलो आज खामोश हो जाते है,
उन शब्दों के सायों से निकल कर,
आज आँखों से ही बतियाते हैं।

हाँ, तुम को है फरियाद बहुत सी,
हमको भी खुल के रोना है,
पर रो लेंगे किसी और दिन,
आज हँसने का दिखावा ही करते हंै,
हम लड़ लेंगे किसी और दिन...

तुम्हारे हर आंसू का है कर्ज मुझ पर चढ़ा हुआ,
और मूल से ज्यादा ब्याज होता है बढ़ा हुआ,
पर थोड़ा लिहाज रिश्ते का करते हुए,
अब मूल की बात ही करते हैं,
हम लड़ लेंगे किसी और दिन...

हाँ,  तुम हो हम से बहुत खफा,
पर मैं भी हूं तुम से बहुत डरा,
पर नाराजगी भी इतनी क्या,
चलो कुछ गलतियों को भुलाते हंै,
हम लड़ लेंगे किसी और दिन...

चलो दो पल चैन से सोचते हंै,
हम क्यों मिले थे उस दिन,
कोई तो वजह रही होगी,
चलो उसी दिन को दोहराते हंै,
हम लड़ लेंगे किसी और दिन...

चलो अंजान परिंदे बन जाते हैं,
और दौड़ लगाते है बादलों पर,
फिर थक कर किसी बरगद की शाख पर,
एक नया आशियाना बनाते हैं,
हम लड़ लेंगे किसी और दिन...