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Tuesday 21 Nov 2017

सीखें, जानें, जुड़े, जोड़ें और निडरता से खड़े हों लेखक -विनीत तिवारी

संस्कृति समाचार

12 मार्च 2017 को इंदौर में प्रगतिशील लेखक संघ, इंदौर इकाई द्वारा एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रलेसं के प्रांतीय महासचिव, कवि एवं सामाजिक कार्यकर्ता विनीत तिवारी ने हाल ही में मध्य प्रदेश प्रलेसं के 11 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल के साथ शहीद लेखकों डॉ नरेंद्र दाभोलकर, कॉ गोविन्द पानसरे और एम एम कलबुर्गी के गृह नगरों क्रमश: सतारा, कोल्हापुर और धारवाड़ की अपनी यात्रा के संस्मरण सुनाए। इस यात्रा का उद्देश्य लेखकों की शहादत के प्रति अपना सम्मान प्रकट करना, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करना एवं शहीद लेखकों के परिजनों के प्रति एकजुटता जताना तथा इस संकल्प का प्रसार करना था कि तर्कशीलता और विचारों की अभिव्यक्ति की आजादी का संघर्ष जारी रहेगा। लेखकों के प्रतिनिधिमंडल में मप्र प्रलेसं के अध्यक्ष और प्रगतिशील वसुधा पत्रिका के संपादक श्री राजेन्द्र शर्मा (कवि) तथा महासचिव श्री विनीत तिवारी (कवि-नाटककार और डाक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता) के साथ अध्यक्ष मंडल के सदस्य सर्व श्री हरिओम राजोरिया (कवि-नाटककार), प्रान्तीय सचिव मंडल सदस्य और वरिष्ठ कवि श्री बाबूलाल दाहिया, श्री शिवशंकर मिश्र सरस, तरुण गुहा नियोगी, सुश्री सुसंस्कृति परिहार, वरिष्ठ लेखक और पत्रकार श्री हरनाम सिंह, कहानीकार श्री दिनेश भट्ट, नाट्य निर्देशिका और अभिनेत्री सुश्री सीमा राजोरिया, तथा समय के साखी पत्रिका की संपादक और कवयित्री सुश्री आरती शामिल थे। इस यात्रा के वर्णन के बाद विनीत ने इस बात से अपने वक्तव्य का उपसंहार किया कि आज हर स्वतंत्र सोचने विचारने वाले व्यक्ति के लिए एकजुटता, संलग्नता और संघर्ष जरूरी हैं। इस यात्रा के संस्मरणों के प्रकाशन को जल्द ही परिणति दी जायेगी एवं फासीवाद के खिलाफ निडर लेखन करनेवाले इन तीनों लेखकों की विचार पुस्तकों को हिंदी में भी अधिकाधिक पाठकों तक पहुंचाया जाएगा। ध्यान रहे, लेखकों के लिए देशाटन आवश्यक इसीलिए बताया गया है ताकि लेखक के अनुभव का दायरा बढ़े। हमने इस यात्रा को सोद्देश्य बनाया और अन्य भाषा-भाषी समाज से सीखा-जाना, उनसे जुड़े, उन्हें जोड़ा और जहाँ जरूरत हो वहां खड़े होने की निडरता लेकर लौटे। इस यात्रा के दौरान प्रत्येक दिन हमारे सत्तर साला साथियों ने भी युवाओं के उत्साह और सक्रियता का परिचय दिया। हमने इस यात्रा में बहसें की, योजनाएं बनायीं, वास्तविक अमल की रुपरेखा तैयार की और सभी साथियों को यह भी काफी ऊर्जा देने वाला और एक दूसरे को समृद्ध करने वाला अनुभव लगा। हमारे समूह में तीन महिला साथी भी थीं। उनकी सक्रिय भागीदारी पूरी यात्रा में रही।
अंत में विनीत तिवारी ने हाल ही में गिरफ्तार किये गए पत्रकार - संपादक दीपक असीम के मामले से लोगों को अवगत करवाया कि किस तरह ओशो के एक लेख के पुनर्मुद्रण पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गयी। ये समाज में विरोधी विचार के प्रति कम होती सहनशीलता की प्रवृत्ति को दर्शाता है। इसके लिए हमें निर्भय होकर जनता से अपने विचार साझा करने होंगे और तर्कशील स्वस्थ बहस का वातावरण बनाना होगा।
बैठक में अन्य लोगों ने भी विचार व्यक्त किये। उपस्थित लोगों में ब्रजेश कानूनगो, अभय नेमा, सुलभा लागू, डॉ. कामना शर्मा, शशिभूषण, तौफीक, प्रशांत, रामासरे पाण्डे, अजय लागू, आदि प्रमुख थे।
प्रस्तुति- शशिभूषण