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Friday 17 Nov 2017

बाजार ने एक नई औरत को जन्म दिया

 

दमोह। भूमंडलीकरण से प्रकट हुए बाजार ने एक नई औरत को तो जन्म दे दिया पर नये मर्द को जन्म नहीं दे पाया। आज की नारी में जहां दादी-नानी सिरे से गायब है वहीं पुरुष में दादा -नाना आज भी मौजूद हैं। उक्त विचार मप्र प्रगतिशील लेखक संघ की स्थानीय इकाई द्वारा सद्भावना विद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में बाजार व्यवस्था के बीच नारी विषय पर बोलते हुए अध्यक्ष सुसंस्कृति परिहार ने व्यक्त किए। डा.रामकुमार तिवारी  ने  माना कि बाजार ने तो हमारी धार्मिक आस्थायें,परस्पर सहभागिता और परम्पराओं को चुपके से तोड़ा जिसका कहीं विरोध नहीं हुआ। एडवोकेट महेन्द्र श्रीवास्तव का कहना था स्त्री के सौन्दर्य  के पैमाने से लेकर पोशाक, बाल और चाल ढाल भी  बाजार ने निर्धारित कर दिये। मनोरमा खरे ने दो टूक कहा बाजार ने स्त्री को घर से बाहर निकालकर शोषण को बढ़ाया है। बाहर आई स्त्री ने घर वापस जाने की बजाय खामोशी से सभी प्रकार के शोषण को स्वीकार लिया। नवोदित रचनाकार खुशबू ताम्रकार ने  कहा आज स्त्री उपभोग की वस्तु बन गई है और बाजार के झांसे में उलझकर तिहरी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही है बाजार स्त्री का भरपूर शोषण कर रहा है। कार्यक्रम के दूसरे चरण में बाजारवाद से प्रभावित रचनायें पढ़ी गर्इं। महेन्द्र श्रीवास्तव ने देह व्यापार की बढ़ती बाजार वृत्ति पर तंज किया। लघु कथाकार ओजेन्द्र तिवारी ने मर्यादाओं पर बाजार के कुठाराघात विषयक लघु रचना पढ़ी। पी एस परिहार ने बदलते बाजार पर स्त्री के नजरिये को उभारा। कर लिया अगर मजबूरन समझौता तो तमाम विद्रूपतायें लिए खड़ा बाजार है विषयक गभीर समकालीन कविता का वाचन डा.नरेन्द्र गुरु ने किया। रचनाकार चंदा नेमा और बबीता चौबे ने स्त्री शोषण और बाजारवादी रवैये पर तीखे प्रहार किए। पढ़ी रचनाओं पर गफूर  तायर ने कहा घर के सामानों से लेकर हमारे विचार, यहाँ तक कि हमारी भावनाओं को बाजार अजगर की तरह लील रहा है। स्त्री का भोलापन और बच्चे की मासूमियत भी इसके शिकंजे में है। इससे सावधान रहना होगा। कार्यक्रम समापन बेला में छग में 20 महिलाओं के साथ हुए बलात्कार के खिलाफ संघर्षरत बेला भाटिया को दी जा रही धमकियों की निंदा करते हुए उनकी भारत सरकार से सुरक्षा की मांग की गई।                      कार्यक्रम में मोहसिन खान, दीपक मिश्रा, सोनल सरवरिया, पूजा सोनी, शिवानी चौरसिया, कृष्ण कुमार चौबे, चन्द्रकांता खरे, प्रशांत सिंह, आशीष यादव,रूपाली खरे, पंकज तिवारी, निशांत गर्ग, भानुप्रताप सिंह, आशीष सोनी, रामू प्यासी, पंकज खरे एवं बाबू यादव आदि उपस्थित रहे।