Monthly Magzine
Friday 24 Nov 2017

पठनीयता की चुनौती को स्वीकार करती कहानियां

रविशंकर सिंह
द्वारा- डॉ. आशुतोष सिंह
एम.पी. बाग, सी.के. रोड, आरा-802301 (बिहार)
मो. 09931495545
ओमप्रकाश मिश्र मूलत: एक कवि हैं, लेकिन अभिव्यक्ति के अन्य माध्यमों की तलाश में कभी-कभी वे कहानियां भी लिखते हैं। ‘सोलर प्लेट एवं अन्य कहानियां’ उनका पहला कहानी संग्रह है, लेकिन दूसरी किताब है। इसके पहले मामूली बात नहीं उनका कविता संग्रह 2013 में प्रकाशित हुआ था, जो चर्चित रहा था। समीक्ष्य संग्रह में कुल चौदह कहानियां हैं जो पिछले डेढ़ दशकों में लिखी गई हैं और समय-समय पर साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं।
इस किताब से गुजरते हुए बार-बार यह अहसास होता है कि ये कहानियां केवल एक कथाकार द्वारा नहीं रची गई हैं, बल्कि कवि-कथाकार द्वारा रची गई है। कहानियों में एक कवि दृष्टि है, लेकिन यह कवि दृष्टि कहानियों को बोझिल एवं अपठनीय नहीं बनाती बल्कि उसके अर्थ-गांभीर्य को विस्तारित करने में सहायक सिद्घ होती है। संग्रह की पहली कहानी है- प्यार मुझसे जो किया तुमने, यह आज की कैरियर के पीछे भागती दौड़ती युवा पीढ़ी को स्वर देने की कोशिश करती है। कहानी की नायिका शुभ्रा का यह कहना कि अभी मेरे पास प्यार-मुहब्बत करने का समय नहीं है। अभी तो मुझे पढऩा है, नौकरी पानी है। आज की युवा पीढ़ी की मानसिकता को समझने में सहायक सिद्घ होती है। यह कवि दृष्टि संग्रह की अन्य कहानियों जैसे- पारबतो, घड़ीसाज, टुनटुनिया एवं सूर्योदय में देखी जा सकती है, जहां कुछ व्यक्त और कुछ अव्यक्त के माध्यम से जीवन स्थितियों को प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है।
पारबतो वास्तव में ग्रामीण जीवन की कहानी है जहां पारबतो का पति बनवारी बेहतर जीवन का सपना संजोये शहर की ओर रुख करता है। इस क्रम में धीरे-धीरे वह गांव में कठिन संघर्षकर जीवन-यापन करती पत्नी पारबतो और अपने छोटे पुत्र को लगभग विस्मत कर देता है। पारबतो अपनी बिखरी जिन्दगी को संभालने की कोशिश करती है। इस कार्य में सहायक सिद्घ होता है उसका पड़ोसी छरभरन, जो पारबतो के पैसे से उसके लिए गाय खरीदता है और सुबह शाम गाय दुहने आता है। धीरे-धीरे दोनों के हृदय में कोमल भावनाएं पनपती हैं, लेकिन ये कोमल भावनाएं ऐसी नहीं है कि निष्कर्षवाद, कहानियों की तरह किसी निष्कर्ष पर पहुंचाती है, बल्कि पाठकों को स्वयं सोचने-समझने के लिए छोड़ देती है। घड़ी-साज, टुनटुनिया और सूर्योदय भी ऐसी कहानियां हैं, जहां कहानी एवं कविता की जुगलबंदी दिखाई पड़ती है, लेकिन कथारस कहीं से बाधित नहीं होता। ध्यान देने वाली बात यह है कि उपर्युक्त तीनों कहानियों के मुख्य पात्र बालक और वृद्घ हैं।  वृद्घ ग्राहक अपनी घड़ी बनवाने के लिए घड़ी साज को देता है। हफ्ता-दस दिन बीतने के बाद भी वह घड़ी लेने के लिए नहीं आता है। इस संदर्भ में वृद्घ ग्राहक के प्रति घड़ीसाज की सहानुभूति और उसकी तलाश में पॉश कॉलोनी का चक्कर लगाना, सचमुच मन को संवेदना से भर देता है। टुनटुनिया कहानी में बकरियां चराने वाले एक बच्चे और बूढ़े की कथा है, जिसमें पढ़ाई लिखाई की उम्र में चरवाही करने जाते बच्चों एवं उनकी विवशता का वर्णन है। सूर्योदय कहानी बताती है कि शहरों की आधुनिक शिक्षा पद्घति किस प्रकार बच्चों को प्रकृति को दूर करती जा रही है। क्लास में बच्चों से शिक्षक द्वारा हाथ नहीं उठाया जाना- आज की चकाचौंधपूर्ण शिक्षा पद्घति पर प्रश्नवाचक चिन्ह खड़ा करती है।
संग्रह की कुछ कहानियों में यथार्थ के प्रति लेखक की गहरी दृष्टि दिखाई पड़ती  है। पता नहीं क्यों ऐसी कहानियों में रचनाकार की कवि दृष्टि अपेक्षाकृत क्षीण हुई है। और कथाकार की यथार्थपरक दृष्टि ज्यादा प्रभावी हुई है। ऐसी कहानियों में अंतहीन अंधेरा, त्योहार का दिन, सोलर प्लेट, तस्वीरों के साये में, हरेराम सर आदि प्रमुख हैं। कहानी अंतहीन अंधेरा में स्वर्णजाति के एक युवक की कहानी है जो बदले की भावना से एक हिंसक संगठन से जुड़ जाता है, फिर उस संगठन से मोहभंग, समाज में वापस न लौटने की विवशता अपने कार्यों की व्यर्थता कहानी को विस्तृत आयाम प्रदान करती है। यह आज के विभिन्न हिंसक संगठनों एवं उग्रवादी संगठनों से जुड़े अनेक युवाओं की पीड़ा को स्वर देती है। कहानी संकेत करती है कि एक बार गलत रास्ता पकड़ लेने पर उससे मुक्त होना बड़ा मुश्किल होता है। त्योहार के दिन में एक बेरोजगार युवक का जिक्र है जो अब तक नौकरी न मिलने की लज्जा और ग्लानि के कारण पर्व-त्योहार के दिन अपने गांव नहीं जाना चाहता। तस्वीरों के साये में तथाकथित शिक्षण संस्थानों में होने वाले यौन उत्पीडऩ की घटना को रेखांकित करती है। तो हरेराम सर प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने वाले संवेदनशील शिक्षकों के शोषण को बताती है। शीर्षक कहानी सोलर प्लेट दर्शाती है कि आज अधिकांश गांवों में चिकित्सा सुविधा किस तरह नदारद है। गांवों में मोबाइल टॉवर गड़ गए हैं, हरेक हाथ में मोबाइल सेट है, लेकिन योग्य चिकित्सक के अभाव में लोग झोला छाप डॉक्टरों से इलाज कराने के लिए विवश हैं। इस प्रक्रिया वे मौत के मुंह में जा रहे हैं। गांव के लोग सही इलाज के बगैर जिन्दगी दांव पर लगाए बैठे हैं। संग्रह की एक कहानी अब्बास मियां इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि यह समय के साथ पिछड़ते एक शिल्पकार के बहाने परंपरागत पेशों से दूर होते जा रहे कारीगरों की व्यथा को संवेदनशील तरीके से प्रकट करती है। एक जमाने में गांव के सबसे सम्मानित और व्यस्त रहने वाले दर्जी अब्बास मियां अब बेकार और दीनहीन हो गए हैं। कोई उनके पास कपड़े सिलवाने नहीं जाता है। सब नजदीक के बाजार में कपड़े सिलवाने जाते हैं। जहां नये फैशन के कपड़े सिले जाते हैं। पुस्तक की अंतिम दो कहानियां बूड़े आदमी ने जो कुछ कहा और  एक था चिड़ा-एक थी चिड़ी शिल्पगत नवीनता के कारण ध्यान आकृष्ट करती है। पहली कहानी में जहां फैंटेसी के माध्यम से यथार्थ को प्रकट करने की कोशिश की गई है तो दूसरी कहानी में लोककथात्मक शैली के माध्यम से समकालीन ग्रामीण यथार्थ को परत दर परत खोला गया है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इस संग्रह की अधिकांश कहानियां रोचक एवं पठनीय है, जो सुधि पाठकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। कहानियों की भाषा में प्रवाह है। प्रभावकारी संवाद योजना है। पाठकों को एक कवि की कहानियों को पढ़ते समय नये आस्वाद का अनुभव होगा, ऐसी आशा है।