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Friday 24 Nov 2017

संजीव के ‘आप यहां हैं’ कहानी संग्रह में चित्रित यौन शोषण


अनुकृष्णन एल.
महात्मा गांधी कॉलेज
तिरुवनन्तपुरम
मो. 9539773477
संजीव हिन्दी के सशक्त एवं प्रतिभासंपन्न साहित्यकार हंै। संजीव की रचनाओं के विषय यथार्थ जीवन में जूझनेवाले है, अनुभवों से परिपूर्ण हंै। इसलिए वह जीवन की निकटता की अनुभूति प्रदान करते हैं। मानव जीवन के सभी क्षेत्रों में उन्होंने कलम चलाई है। खासकर नारी शोषण पर। वे उन लोगों के लिए निरंतर लिखते रहें जिससे नारी वर्ग को संघर्ष करने की शक्ति और प्रेरणा मिलें।
संजीव की ‘आप यहां हैं’ कहानी संग्रह की तीन कहानियों में नारी शोषण का चित्रण हम देख सकते हैं, वह है जसीबहू, कठपुतली और आप यहां हैं।
जसी बहू
जसी बहू नीची जाति की  है जिसका पति कलकत्ता में रहता है। शुरू के सालों में छह महीने में आया जाया करता था। भुईली के पैदा होने के बाद यह अंतराल बढ़ता रहा। जसी बहू जवान और सुन्दर है। वह मर्द की तरह कांछ बांधे फावड़ा लेकर खेत में कड़ी मशक्कत करती है। घर में कोई पुरुष न होने के कारण गांव के ठाकुर ठकार ही नहीं अदने आदमी भी जसी बहू को हवस का शिकार बनाने की कोशिश करते रहते हैं।
जसी बहू के घर का आम पहली बार फला, मगर रात ही में साफ!  लौकी, कुम्हड़ा तक न बचते। सरसों फूल ही रही थी कि एक दिन देखा तो उखाड़ ली गई थी। ढूंढते-ढंूढते वह सिताई पंडित के बारे में गांव के प्रधान के पास शिकायत करती है। जसी बहू की निरंतर गिरती हुई साख से प्रोत्साहित होकर एक दिन सिताई पंडित अपने खेत में आम चुराती जसी बहू को पकडक़र अपने हवस का शिकार बनाता है। सिताई पंडित के पाप का फल जसी बहू के पेट में बढऩे लगता है और दूसरी ओर कुछ दिन के बाद उसका पति शहर से वापस आता है तो वह सिताई पंडित के बदला लेने के बजाय जसी बहू को घर से बाहर खदेड़ता है। उस दिन जसी बहू को पेट में दर्द शुरू होता है वह एक लडक़े को जन्म देती है। लाचार जसी दूसरी शादी करते हुए सिताई पंडित के यहां हलवाही पकड़ लेती है।
कठपुतली
कल्याणी को उसका पिता एक सेठ को दो ह•ाार रुपयों के लिए बेच देता है। सेठ की रखैल बनने के कारण गली के सभी लोग उससे घृणा करने लगते हैं। यहां तक कि वह अगर किसी का बच्चा गोद में उठाती हो तो झट से बच्चे की मां-बहन बच्चे को छीन लेती है।
एक दिन वो अपने माता-पिता से मिलने जाती है। उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता। घरवाले कहीं पड़ोसियों को पता न लगे, इसलिए अंधेरे में ही उसे सेठ के आदमी के हवाले कर देते हैं। इससे घरवालों से प्रेम का, उसका जो वहम था, वह भी टूट जाता है। एक दिन उसे सेठ की लडक़ी की शादी में बुलाया जाता है। वह सेठ की हवेली देखकर दंग रह जाती है। वह अंदर प्रवेश कर ही रही थी कि उसे रोका जाता है, जिससे वह अपमानित होती है। जिसकी परिणति सेठ से खींचातानी में होती है। अंतत: सेठ उसकी शादी मूर्तिकार शंभुपाल से करा देता है। शंभुपाल मूर्तियां और कठपुतलियां बनाता है। शंभुपाल के डरपोक होने के कारण वहां भी सेठ जाता रहता है। शंभुपाल सेठ के सामने भीगी बिल्ली बना रहता है और उसके जाने के बाद कल्याणी से घृणा करता है। अंत में सेठ और शंभुपाल से बचने के लिए कल्याणी आत्महत्या करती है।
आप यहां हैं
मिस्टर वर्मा का तबादला नेपाल के उर्वर सीमांत के आंचलिक प्रदेश में होता है। तबादला होते ही उनके घर के लोग नारा•ा हो जाते  हैं। लेकिन वर्मा उन्हें समझाते हैं। वहां आने पर हिंदिया नामक एक आदिवासी नारी उनके घर में काम करने के लिए आती है। ईमानदारी से बराबर अपने काम में लगी रहती है।
 वर्मा एक दोगले चरित्र वाला आदमी है। वह रेडियो पर प्रसारण होने वाली ‘आप यहां हंै’, इस वार्ता में पहाड़ों को अपने पुत्र के समान मानता है लेकिन बर्ताव बिल्कुल इसके विरुद्घ करता है। वर्मा एक दिन मौका पाकर हिंदिया पर बलात्कार करता है उसी वक्त बंगले पर आदिवासियों का जुलूस पहुंचता है। हिंदिया वहां से भागकर अपने बच्चे को उठाकर जुलूस में शामिल हो जाती है। मिसेज वर्मा उल्टे हिंदिया पर चोरी का अभियोग दर्ज करती हैं। इससे हिंदिया पहाड़ी इलाके में भाग जाती है।
एक दिन मिस्टर वर्मा अपने परिवार के साथ पिकनिक पर जाते हैं। पिकनिक से लौटने वाले मार्ग में हिंदिया का घर पड़ता है। वहां उनकी भेंट हिंदिया के पिता से होती है, वह क्रोध में आकर उन्हें अपने घर की जांच करने को कहता है। तब तक गांव वाले उन्हें घेर लेते हैं। हिंदिया के बाप के हस्तक्षेप के कारण वर्मा परिवार बच जाता है।
भारतीय समाज में प्राचीन काल से पुरुष प्रधान संस्कृति है। पुरुष की तुलना में आज  भी नारी को दोयम स्थान दिया जाता है। आज शिक्षा का प्रचार एवं प्रचार होने के कारण नारी पढ़ लिखकर अपने अधिकारों के लिए जागृत हो रही है। पुरुष के कंधे से कंधा लगाकर हर क्षेत्र में अपनी क्षमता सिद्घ कर रही है। लेकिन यह प्रमाण अल्प है। प्राचीनकाल की तरह आज भी नारी को एक भोग्य वस्तु के रूप में देखा जाता है। गुलाम की तरह उसके साथ बर्ताव किया जाता है। डॉ. बलवंत साधु जाधव के विचार हैं कि ‘‘भारतीय समाज में वर्णव्यवस्था में शक्ति और धन के आधार पर सवर्णों को इज्जत, सम्मान, प्रतिष्ठा का अधिकारी बताया है। ग्रामों में तो दलित युवतियां इनके पंजों में फंसकर उनके विलास की सामग्री बनती हंै।’’1 दलित नारियों को अपनी हवस का शिकार बनाते हुए उनका यौन शोषण करते हैं, इसी तरह शारीरिक और मानसिक शोषण का चित्रण संजीव के इस कहानी संग्रह में व्यापक रूप में हुआ है।
समाज की अधिकांश महिलाओं का दोहन और शोषण हो रहा है। नारी शोषण का भयावह रूप उनके शारीरिक शोषण में देखा जा सकता है। संजीव कीकहानी में जसी बहू जैसे स्त्री पात्र के यथार्थ को सामने रखकर शारीरिक शोषण की बात उठाई है।
जसी बहू कहानी में जसी नौकरी ढूंढने के लिए गांव से दूर चला जाता है। गांव में उसकी पत्नी जसी बहू अकेली रहती है। स्वाभिमानी होने के कारण वहां के पुरुषों को उसका व्यक्तित्व चुनौतीपूर्ण महसूस होता है। ‘‘सिताई पंडित ने आम की तरह निचोड़ डाला उसके गर्व को’’2 शिकारी जैसे शिकार की खोज में रहते हैं बिल्कुल उसी प्रकार था जसी बहू पर हुआ अत्याचार। जसी जब वापस गांव आता है तब जसी बहू अपने ऊपर हुए अत्याचार का बखान करती है। तब वह बिना जाने समझे ही उसे मारता पीटता है और घर से निकाल लेता है। यहां जसी बहू घर और बाहर दोनों जगह पीडि़त दिखाई देती है।
कहते  हैं ‘पिता रक्षति कौमारे, भ्राता रक्षति यौवने। रक्षति स्थविरे पुत्र, न स्त्री स्वातंत्यमहति’’।3 यानी कुमारी अवस्था में नारी की रक्षा पिता करेंगे, यौवन में पति और बुढ़ापे में पुत्र। नारी स्वतंत्रता के योग्य नहीं है। हां! यह सही है नारी को स्वतंत्रता नहीं मिलती है। इसका भयानक रूप समकालीन युग में हम देख सकते हैं। नारी शोषण करने वालों में उसके पिता, पति, भाई, मित्र और अन्य रिश्तेदार भी हैं। जिन लोगों से नारी रक्षा चाहती है उससे वह बलात्कार का शिकार हो जाती है।
यहां कल्याणी की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है, बच्चों की रक्षा करने वाले पिता ही उसे एक सेठ को दो हजार के लिए बेचता है। सेठ की रखैल बन जाने के बाद सब लोग उससे घृणा करते है। अगर वह अपने माता-पिता को मिलने भी जाती तो लोग कहते, ‘‘कहां गई?... अरे जाएगी कहां?... एक जगह तो जाना है, ‘पेट गिराने ... देखा नहीं, कैसी उदास रहती थी इन दिनों। छी! छी!!’’4 सेठ उसकी शादी मूर्तिकार शंभुपाल से कराता है। वह सोचती थी कि शादी के बाद सेठ बच जाएगी लेकिन डरपोक पति के कारण उसके सामने जो बचने का मार्ग था वो भी बंद हो गया। सेठ का आना-जाना फिर से शुरू हो गया। अंत में वह जिन्दगी से हार जाती है और खुद कठपुतली बनकर सेठ का कर्जा चुकाते चुकाते आत्महत्या करती है। उसने जिन्दगी को आगे बढ़ाना चाहा लेकिन किस्मत ने उसे एक कठपुतली बना दिया। शोषण नारी को जीवनभर लगने वाला ऐसा रोग है जो पूरे जीवन को अभिशप्त कर देता है। स्त्री चाहे लाख सफाइयां दे, कितनी ही कोशिश कर ले, लेकिन इस कलंक से मुक्त नहीं हो पाती। इससे भी अधिक करुणा का विषय तो यह है कि इस अमानवीय कृत्य के लिए सजा देने के बजाय बलात्कृता स्त्री को जिन्दगी भर ताने देने में, उसे अपमानित करने में सुख का अनुभव समाज करता है।। शोषण का शिकार  बनी स्त्री समाज की सहानुभूति का पात्र होने के बजाय, समाज की घृणा और मनोरंजन का पात्र हो जाती है और अंतत: या तो अपना मानसिक संतुलन खो बैठती है या फिर अपना जीवन ही समाप्त कर लेती है। यहां कल्याणी भी घृणा की पात्र बन गई थी और जीवन से हारकर अपनी जिन्दगी खुद समाप्त कर देती है।
जब स्त्री अपनी पहचान बनाना चाहती है, आत्म सम्मान के साथ जीना चाहती है तब पुरुष सत्ता उसका शोषण और शारीरिक शोषण करती है. हिंदिया अपने परिवार के आर्थिक अभाव के कारण सरकारी अधिकारी मिस्टर वर्मा के घर नौकरानी का काम करती है। हर दिन अपने गांव से स्टेशन आकर वहां से पैदल आधा घंटा चलकर वर्मा के यहां आती है। वह ईमानदार है और बराबर काम में लगी रहती है। घर में काम करते समय मिसेज वर्मा को जब हिंदिया बाघ-भालू के बारे में बताती है तब मिसेज वर्मा  उससे पूछती हैं कि आदमी और भालू में से कौन ज्यादा खतरनाक है? हिंदिया उन्हें अनुभवों के आधार पर कहती है, ‘‘साफ कपड़ा पहन के, हंस-हंस के बोलने वाला मनुष्य से कौन जानवर ज्यादा खतरनाक है मेमसाब?’’5 आदमी के बारे में उनका ख्याल सही निकला। एक दिन मिस्टर वर्मा मौका पाकर हिंदिया पर बलात्कार करता है। आज का अधिकारी और अफसर विकास के नाम पर आम आदमी का सहायता करने के बदले में उनका शोषण करने में व्यस्त है।
इन तीनों कहानियों द्वारा यह स्पष्ट होता है कि नारी बाहर और घर कहीं सुरक्षित नहीं है। मानसिकता, घर-समाज, पारिवारिक और सामाािजक संबंधों में आया तनाव, इन सब के कारण ही शारीरिक शोषण होता है। इस मानसिकता से मुक्त किए बिना स्त्री को यौन शोषण से मुक्त कराना असंभव है।
भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा है कि ‘‘कीर्ति श्रीवाक्र्य ननारीणा स्मृति मेघा धृति : क्षम’’6 यानी स्त्रियों में कीर्ति, सम्पत्ति, वाणी कृति, घृति और क्षमता है। इन्हीं गुणों के विकास से पृथ्वी सुन्दर बनेगी। कहना गलत नहीं होगा कि दुर्भाग्यवश इन्हीं गुणों के कारण उसके साथ बार-बार छल होता रहता है। इसलिए नारी  को जागृत रहना चाहिए, अन्याय-अत्याचार के खिलाफ आवा उठाकर अपनी रक्षा खुद करनी चाहिए।
संदर्भ ग्रंथ सूची
1. संजीव के व्यक्तित्व कृतित्व - डॉ. लोंढै151
2. संजीव की कथा यात्रा : पहला पड़ाव संजीव    125
3. स्त्री सशक्तिकरण के विविध आयाम डॉ. प्रशभ देवशर्मा    102
4. संजीव की कथा यात्रा : पहला पड़ाव संजीव    115
5. कथाकार संजीव     गिरीश काशिद    107
6. निर्मल वर्मा के साहित्य में नारी    डॉ. ठाकुर विजय सिंह    64
सहायक ग्रंथ सूची
1. नारी : एक विवेचन धर्मपाल
2. भारतीय नारी संघर्ष और मुक्ति    वृंदा करात
3.     हमारी औरत    मनीषा
4. हिन्दी साहित्य में नारी संवेदना    डॉ. एन.जी. दौडगौडर
5. भविष्य का स्त्री विमर्श    ममता कालिया
6. स्त्री विमर्श : भारतीय परिप्रेक्ष्य    डॉ. के.एम. मालती
7. नारी शोषण आईने और आयाम    आशाराणी वोहरा
8. स्त्री विमर्श का लोक पक्ष    अनामिका
9. सामाजिक यथार्थ और कथाकार संजीव     डॉ. शहाजहान मठोर ठ्ठ