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Tuesday 21 Nov 2017

रोबट तान्यूशा

अ.सालोमातोव
अनुवाद- हेमचन्द्र पाँडे
वाई—81, हौज खास
नई दिल्ली—110016
वह घरेलू रोबो (अर्थात् रोबट) निकला एक छोटी बच्ची। जो भी हो, वह ऐसा ही सोच रहा था, और जब रोबटयान्त्रिकी नामक दुकान में उसे बेचा गया तो उसने अपने नए स्वामियों से कहा कि उसका नाम तान्यूशा रखा जाए जो लड़कियों वाला नाम है। सेर्गेइ पेत्रोविच और गालीना इवानोव्ना को इस नाम पर आपत्ति नहीं हुई और उनका दस साल का बेटा पेत्या भी इस नाम के खिलाफ़ नहीं था। रोबट को वास्तव में ही उसके नाम के अनुरूप बनाने के लिए गालीना इवानोव्ना ने एक पुराना पर्दा लेकर उससे तान्यूशा के लिए स्कर्ट और मुकुट सिल दिए। नवदीक्षित तान्यूशा ने धातु से बने अपने चौकोर सिर को इस मुकुट पर सजा लिया। पर सब लोग इस बात से कुछ अचम्भित थे कि तान्यूशा पुरुष स्वर में बोलती थी और मजबूत-से-मजबूत नारियलों को वह अपने यान्त्रिक हाथों से आसानी से फोड़ देती थी। शीघ्र ही सब लोग इसके अभ्यस्त हो गए थे।
है तो लडक़ी ही। गालीना इवानोव्ना ने कन्धे बिचका कर कहा जब परिवार एक साथ बैठा हुआ था।
तब सेर्गेइ पेत्रोविच ने पत्नी का समर्थन करते हुए कहा- मेरे विचार में तो इसका नाम चाहे थैलानुमा बाघ रख लो, चाहे मिस्र का पिरामिड चेओप्स रख लो, जरूरी तो यह है कि यह अपना काम ठीक से करता रहे, अरे नहीं, ठीक से करती रहे।
अब पेत्या की कहने की बारी थी -बच्ची तो बहुत अच्छी है। आप लोगों ने तो बहुत पहले से मेरे लिए बहन लाने का वादा कर रखा था। अब आ तो गई है, लोहे की ही सही।
सेर्गेइ पेत्रोविच सोच में पड़ गए और वह कहने लगे- मुझे शक है कि कहीं एक महीने बाद तान्यूशा की इच्छा लडक़ा बनने की न हो जाए। तब तो इसे कोई नया नाम देना पड़ेगा। और उसके एक महीने बाद हमारे रोबट के पगले दिमाग को क्या पता यह सूझने लगे कि वह फॉक्स-टेरियर कुत्ता है। फिर से इसे किसी नए नाम का अभ्यस्त होना पड़ेगा। रोबट को टॉमी जैसा नाम तो नहीं दिया जा सकता।
गालीना इवानोव्ना ने अपने पति को बीच में ही रोक कर कहा- ऐसा सोचो भी मत। लडक़ी है तो लडक़ी ही रहेगा। नहीं तो दो-दो पुरुषों से निबटना मेरे लिए मुश्किल हो जाएगा। चाहे किसी के साथ भी इसे रोने-झगडऩे दो, औरतों जैसी बातें करने दो।
तान्यूशा ने बहुत जल्द ही सब को यह दिखा दिया कि उसमें पुरुषों के जैसे लक्षणों की अपेक्षा महिलाओं के लक्षण काफ़ी अधिक हैं-गृहस्थी के कामों में वह कुशल थी, वह अक्सर शीशे के सामने खड़ी हो कर गालीना इवानोव्ना के श्रृंगार -साधनों और टोपियों को पहन कर देखती रहती थी। पेत्या की माँ इस सबकी अनदेखी कर देती थी, तब भी जब उनकी लिपस्टिक और नकली बरौनियाँ तक गायब हो गई थीं। एक बार तो सेर्गेइ पेत्रोविच का धैर्य ही जवाब दे गया। हुआ यह कि सवेरे के समय उन्हें पता चला कि उनके यूडीकोलोन की शीशी लगभग पूरी खाली पड़ी है जो उन्होंने दो ही दिन पहले खरीदी थी। सेर्गेइ पेत्रोविच सीधे तान्यूशा के पास गए किन्तु तीन मीटर पहले ही उन्होंने अपनी नाक को उँगलियों से बन्द कर तान्यूशा से पूछा- क्या तुमने अपने ऊपर सारी शीशी ही उँड़ेल डाली है क्या?
तान्यूशा ने नाराजगी के साथ उत्तर दिया दिया- सारी शीशी नहीं उँड़ेली। अभी उसमें कुछ बाकी है।
पेत्या के पापा ने मन-ही-मन आश्चर्य व्यक्त किया कि ये क्या बात कि उन्हें फिर से ऐसा अजीब रोबट मिला है। उनका मतलब अव्तान्दील नामक एक दूसरे रोबट से था जो तीन साल पहले उन्हें दुकान में जाकर वापस करना पड़ा था। अव्तान्दील को धारवाले हथियारों को शौक था। सब्जी काटने वाले चाकुओं को लटका कर वह पूरे अपार्टमेंट में घूमा करता था और उन चाकुओं को घुमाते हुए अपनी धमकी भरी सूरत से गालीना इवानोव्ना को डराता चलता था। सेर्गेइ पेत्रोविच झल्ला कर सोचने लगे- हम क्यों नहीं एक साधारण-सा घरेलू रोबट खरीद लें जो समझदार और आज्ञाकारी भी हो? अन्तत: सेर्गेइ पेत्रोविच ने तान्यूशा की ओर मुखातिब हो कर कहा- ठीक है, यह बात याद रख लो कि आइन्दा फिर कभी तुम्हें अपने ऊपर यूडीकोलोन उँड़ेलने की इच्छा करे तो मेरे पास आ कर पूछ जरूर लेना। समझ आई बात?
आप कैसे बदतमीज हैं!’’ तान्यूशा ने अपनी मोटी आवाज में कहा।
यह घटना जल्दी ही भुला दी गई। जीवन सामान्य ढंग से चल पड़ा था। परन्तु एक बार सेर्गेइ पेत्रोविच ने देखा कि तान्यूशा सिर लटकाए हुए है। उन्होंने तान्यूशा से पूछा- क्या हुआ है, तान्यूशा?’ उस दिन सेर्गेइ पेत्रोविच अच्छे मूड में थे। उन्होंने निश्चय किया कि आज वह रोबट की ओर ध्यान जरूर देंगे।
तान्यूशा ने उदास स्वर में उत्तर दिया-  मैं किसके साथ बात करूँ? तुम इंसान रोबट की सूक्ष्म आत्मा को समझ ही नहीं सकते हो। तुम लोग क्रूर और स्वार्थी होते हो। मैं इसीलिए उदास हूँ। मैं अकेलापन महसूस कर रही हूँ।
सेर्गेइ पेत्रोविच और गालीना इवानोव्ना ने फैसला किया कि अगली बार छुट्टियों में वह कुछ लोगों को घर पर बुलाएँगे। टेलीफ़ोन पर बात करते समय पेत्या के पिता ने टेलीफ़ोन के चोंगे पर हथेली रखी हुई थी ताकि तान्यूशा कुछ सुन ना ले। उन्होंने दबे स्वर में अपने ऑफि़स के एक साथी से निवेदन किया —
निकोलाइ निकोलायेविच, क्या आप अपने रोबट बोर्या को लेकर हमारे घर आने की कृपा करेंगे? हमारी तान्यूशा को अच्छा लगेगा कि उसके साथ बात करने वाला कोई आया है। बेचारी उदास रहती है, अकेलेपन के कारण उसकी हालत बहुत खराब हो गई है। जरा सोचो कि कभी कोई किताब पढऩे लगती है और कभी थियेटरों के चक्कर लगाने को चल पड़ती है।
बोर्या बहुत ही शर्मीला किन्तु शालीन रोबट निकला। जब उसका परिचय तान्यूशा से करवाया गया तो तब बहुत देर तक तो वह खड़े-खड़े अपने पांवों को ही बदलता रहा और फिर अचानक ही उसने तान्यूशा की धातु की उंगलियों को चूम लिया। सब लोग हक्के-बक्के रह गए। जब दोनों रोबट पेत्या के कमरे में अकेले चले गए तब सेर्गेइ पेत्रोविच ने अपने ऑफि़स के साथी से कहा- मैंने पहले कभी किसी रोबट को दूसरे रोबट का चुम्बन लेते हुए नहीं देखा है।
बाद में जब मेहमान वापस जाने को हो रहे थे तब पता चला कि तान्यूशा और बोर्या घर में हैं ही नहीं। पहले तो सबने यही सोचा कि रोबट बाहर घूमने को निकल गए होंगे। सब लोग नीचे उतर कर उन्हें ढूँढने को अहाते में गए। परन्तु वहाँ रोबट नहीं मिले। रोबटों की खोज का प्रयास रात बारह बजे तक चलता रहा। फिर निकोलाइ निकोलायेविच और उनकी पत्नी ने सेर्गेइ पेत्रोविच और गालीना इवानोव्ना से कहा कि यदि बोर्या मिल जाए तो कल सवेरे तक वे उसे अपने पास रख लें। सवेरे आ कर वे उसे वापस ले जाएँगे। ऐसा कह कर निकोलाइ निकोलायेविच सपत्नीक अपने घर लौट गए।
तान्यूशा और बोर्या की खोज पूरे दो हफ्तों तक जारी रही परन्तु कोई नतीजा नहीं निकला। पेत्या तो तान्यूशा के बगैर बहुत ही बोर हो रहा था। उसे तान्यूशा से बहुत लगाव हो गया था। हर रोज शाम को वह उसे ढूंढने घर से निकल जाता था और बहुत देर तक इस आशा के साथ सडक़ों में भटकता रहता था कि कहीं मोड़ से तान्यूशा निकल कर आएगी और कहेगी- लो, मैं आ गई। परन्तु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। आखिरकार उनके स्वामियों ने यही समझा कि रोबटों को या तो किसी ने चुरा लिया होगा या उनके साथ कोई ऐसी-वैसी घटना घट गई होगी जिसके बाद उन्हें कबाड़घर को भेज दिया गया होगा।
छह महीने बाद सेर्गेइ पेत्रोविच और गालीना इवानोव्ना ने एक दूसरा घरेलू रोबट खरीद लिया। यह रोबट ठीक वैसा था जैसा कि पेत्या के पापा चाहते भी थे, काम भी करे और अजीब-अजीब हरकतें ना करे। उसका नाम रखा गया-सेन्या। यह नाम लोहे के बने उस आज्ञाकारी सेवक के स्वभाव से मेल खाता था। जहाँ तक तान्यूशा की बात है, उसका जिक्र न करने की ही कोशिश की जाती थी ताकि किसी का मूड खराब न हो जाए।
जब पतझड़ का मौसम पूरे जोरों पर था, तब तान्यूशा और बोर्या सेर्पूख़ोव शहर के बाहरी इलाके में ओका नदी के तट पर पाए गए। दोनों एक बड़ी चट्टान पर बैठे हुए थे। बन्द पड़ चुके फ़ोटोवोल्टीय सेल वाली उनकी आँखें एक दूसरे की ओर केन्द्रित तो थीं पर उन्हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। दोनों ही रोबटों की बैटरियां कब की खत्म हुई पड़ी थीं। बारिश की वजह से दोनों में जंग लग गया था और उन्हें उस जगह से सरकाना सम्भव नहीं था। उन्हें वैसा-का-वैसा ही छोड़ दिया गया जो सभी प्रेमी रोबटों के लिए स्मारक का काम देगा।