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Sunday 19 Nov 2017

चांद ने अंधकार में रक्खा

केशव शरण
2/564, सिकरौल,
वाराणसी-221002
मो. 09415295137
चांद ने अंधकार में रक्खा
रात-भर इंतजार में रक्खा

कह पड़ा एक दिन पुराना दिल
कुछ नहीं आज प्यार में रक्खा

आ गया है खिसक खिजाओं तक
जो समय था बहार में रक्खा

कामयाबी न देर तक ठहरी
दिल दबाकर करार में रक्खा

सामने सिर्फ एक सन्नाटा
दूर तक रहगुजार में रक्खा

कह रहा डर इलाज है उसका
इक चमकती कटार में रक्खा

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बहुत लात-जूता घमासान  होगा
मगर बात से ही समाधान होगा

बचेगी न रोटी अभी देख लेना
बराबर न बिलकुल तुलामान होगा

करेगी परी रक्स इन्दर सभा में
जमेंगे फरिश्ते सुरापान होगा