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Monday 20 Nov 2017

पूंजी (1)

अलीक
 वाम स्टडी सर्कल, मातृछाया
16/1 सुतारों का वास, रतलाम (म.प्र.)
मो. 911695443

पूंजी
अत्याधुनिक जीवन यंत्र शब्द संवाद,
बजाऊं नित सरगम... अरम-परम दर दम... दर दम
झमाक झम झम... झमाक झम झम...! अरम परम दर दम दर दम...!!
मैं द्वंद्व विकास $खुद से $खुद निरमम...
बजाऊं नित सरगम... झमाक झम, झमाक झम-झम।

मैं जाति-पांति... धर्म-अधर्म...
मैं कूट कपट, शर्म-बेशर्म...
मेरा वर्चस्व... चहुं दिशा विस्तार...!
मेरे बगैर... नहीं कहीं कोई... हल-निस्तार..!!

मैं कलि-काल,
मैं दुष्ट, दुष्काल... दर-दर दुर्दम... दर दर... निर्मम..!
मैं ताल-बेताल, मैं... हाल, बदहाल जीवन निर्माता...!
मैं पग... पग... रग रग रागिनी... मद... मानिनी..
उद्यम उद्योग... भाग्य विधाता...।।

मैं अवसर साध... छुआछूत, मैं जाति भेद विनाश...
मैं  भाषा भेद, रंग संवेद, भूल-$गल्ती... विदारक...।
मैं समय सन्नद्घ... अवसर साध सुधबुध... स्थितियां सुधारक...।
मैं हर दुविधा, हर मुश्किल... बाधा तारक।
मेरी माया अपरम्पार, ... मेरी दृष्टि तीक्ष्ण धार...।।

मैं युग- नवयुग की साधक...,
मैं कला निपुण, कला राग ध्वनि सुर स्वर आराधक,
मेरे  गति-मति हित पथ, रोके जो रति रथ...
मैं ध्वंस, विध्वंस, यश-अपयश...
करूं लथपथ लहू श्लथ श्लथ...
मेरे मर्म मोह, संग-साथ छोह-विछोह, हर भाव-चाव
त$र्क-वित$र्क मथ मथ,
मेरी घृणा, मेरा बैर, मेरा क्रोध, मेरी आग अगन... दाह दहे!
शोषण की मार झार... दमन दलन... सब कुछ सहे!!

मेरी धन वैभव, अनन्य अकूत सृज सम्पदा, तिनके ताड़... राई पहाड़...
बढ़ाऊं हर पल हर क्षण क्षण विपदा।
मेरी अनन -खनन झन-झन झंकार...