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Thursday 23 Nov 2017

इस तरह कंधे न उचकाओ

राघवेन्द्र तिवारी
ईएम-33, इंडस टाउन, होशंगाबाद रोड
भोपाल-462026,
 मो. 9424482812
(1)

इस तरह कंधे
न उचकाओ
हो सके तो भीड़ से हटकर
नया करतब दिखाओ
थक गई जनता तमाशे देख
सारे नट-नटी के
खोज लाओ मोतियों को
लगा गोता तलहटी के

नहीं घबराओ
हो सके तो डूबकर जल-
के हृदय को बींध आओ

समय चलते थाम सकते हो
लगामें अश्व/हय की
मोड़ सकते आदतें हो
स्वयं इस विस्तृत प्रलय की

मान भी जाओ,
हो सके तो पार जाकर
समझ लेना सभ्यताओं को

(2)
कलफ जैसे धुल रहे हैं
हम कमीजों के
मानते आभार आये
बदतमीजों के
सलवटों में ढल गया
व्यक्तित्व अपना
अब दिखाई दे न दे
पुरुषार्थ सपना
इस सियासत के
सभी संदर्भ झूठे हैं
जो बताते वंशधर
हम हैं कनीजों के

ड्योढिय़ों के अंतरण
विस्तार हों या
राजकुल के द्रोह से
जन्मे कोई अंदाज बोया
किन्तु हम शाही खजाने में
रखे मादक पटम्बर
काम आए तो भला केवल
शमीजों के
सिपहसालारों में हम
केवल रहे परिणामगामी
राजमुद्रा से पृथक
घोषित हुए हैं हम अधर्मी
किन्तु इस अधिकार के
रहते सदा पूजित रहेंगे
क्योंकि हम अवशेष हैं
उन पुरा चीजों के