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Saturday 18 Nov 2017

मुझे माफ करना

सुभाष रस्तोगी
फ्लेट नं. 14ए, डिवाइन अपार्टमेंट्स
विकास नगर, बलटाना-140604
जीरकपुर (पंजाब)
मुझे माफ करना

मुझे माफ करना
रास्तो
मेरे हमसफर पेड़ों
वनस्पतियों
चीटियों
और तिलचिट्टों
सभी मुझे माफ करना
मैं कभी तुम पर
कोई कविता नहीं लिख सका

हवाओं और मौसमों
माफ करना
तुमने तो हमेशा
सही वक्त पर दस्तक दी
मेरे द्वार पर
लेकिन मैं ही
कभी तुम्हारी अगवानी नहीं कर सका

माफ करना
तस्वीर बन कर
दीवार पर लटके मेरे पुरखों
कि मैं कभी तुम्हारे फ्रेम से
धूल तक साफ न कर सका
मुझे माफ करना
मेरे सहयात्रियों
कि मैं अपनी उंगली की रा-सी
चुभन से तो चीख पड़ा
जब-तब
लेकिन तुम्हारी चीखों को
अनसुना करता रहा

मैं बेहद शर्मिंदा हूं
अपने उन साथियों के प्रति
जिनकी उम्मीद की गाड़ी
आई ही नहीं कभी स्टेशन पर
और ऊसर से फूटने वाली
पतली जलधार के लिए
जो भटकते रहे दर-ब-दर

मैं लताओं के प्रति भी
बेहद शर्मिंदा हूं
जिन्हें समय पर कभी
अंजुरी भर पानी नहीं दे सका मैं
और वे शून्य में टकटकी लगाए
बलि चढ़ गई
काल-चक्र के

मैं जिंदगी के तमाम/अहम् सवालों से
माफी मांगता हूं
कि हर बार
बड़ी चालाकी से
उनके जवाब टाल गया

समय-देवता
ध्यान न देना तुम मेरी धूर्तता पर
जब भी मिला तुमसे
अपनी हीनताओं को छुपाया
और झूठ बोला
छुपन-छुपाई का खेल खेलता रहा
मैं हमेशा/अपने आप से भी
इसलिए क्षमाप्रार्थी हूं

मैं स्वयं से
हर दरों-दीवार से
हर दोस्त से
हर दुश्मन से

लेकिन मेरी कविता
$खफा न होना मुझसे
क्योंकि मैंने तुमसे
कभी झूठ नहीं बोला
जो शब्द मिले विरासत में
ऋषि-ऋण के रूप में
उन्हें स्वीकार कर
सही अर्थों में तलाशने की कोशिश की
और मेरी यही कोशिश
आज तक जारी है!