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Sunday 19 Nov 2017

एकत्व

 

उमा झुनझुनवाला
लेक गार्डन्स गर्वमेंट हाउसिंग 48/4 सुल्तान आलम रोड, ब्लॉक- एक्स/7
कोलकता- 70003
एकत्व
डूबना
अंत नहीं होता
डूबना
उगना होता है

नए पहर का
एक संकेत सा
मनोहारी सा
सरल सरस सुन्दर सा

डूबना
रमना होता है
डूबना
शिव होता है
जैसे समाना
जैसे आराधना
जैसे एकत्व
रूहानी इश्क सा

मिलन
एक बार
आँखें बन्द किए
यादों की मशाल थामे
खोज रही थी
...तुम्हें
अपने अंतस की
अतल गहराइयों में
अंतस के मध्य
आया नजर
मन्नतों का इक दरख्त
जिसकी शाख पर
हमने अपनी मुलाकातों को
टाँग दिया था
बड़ी खूबसूरती से
देवालय सी पवित्रता
भीनी भीनी खुशबू
घंटियों की मधुर आवाजें
आँखें तृप्त हुईं
मुस्कानों को थिरकन मिली
इन पलों को देखकर
और मुझे तुम मिल गए
जन्मों जन्मों के लिए

मुस्कुराहटें
झील किनारे
साँझ सवेरे
मैं और ये सूखा पेड़
और अनवरत अनंत
टहलती शब्दविहीन बातें

सुनो पेड़
जब मैं चली जाऊँगी
किसी एक रोज
तब भी रहूंगी यहीं
अदेह बन कर

जब कभी तुम
अपनी बाईं ओर देखोगे
मेरे होने की गंध
पिघल कर चुपके से
तुममे व्याप जायेगी

फिर बतियाएंगे
हम वही सारे किस्से
शब्दविहीन जुबानो में
और मुस्कुराएंगे
कई कई जन्मों तक

जलधाराएँ
सबके अपने अपने पर्वत थे
अचल
अटल
एक दूजे से
कभी न मिल पाने को
अभिशप्त

और मैं
शीर्ष पर बर्फ सी जमी
इन सबकी साक्षी
उनकी कठोरता को
अपने आँचल से ढाँपती
उन्हें तरल बनाने की यात्रा में
पिघलती
उनके मध्य से बहती जाती

कि उनमें
कोमल साँसों सा
पथ हो
जीवन के सौंदर्य का
सार हो
भावों की तीव्रता का
संचार हो

जलधाराएं अक्सर कठोरता बहा ले जाती हैं